अक्टूबर में एक ब्लैक्बेरी खरीदा, फोन तो बहुत अच्छा है पर एक मुश्किल है. हिन्दी नहीं पढ सकता. तीन महीनें से कोशिश कर रहा हूँ पर ब्लैकबेरी ९००० बोल्ड पर हिन्दी नहीं देख पा रहा. यदि किसी सज्जन को पता हो तो कृपया बतायें.
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बहुत दिनों से कुछ लिख नहीं पाया, व्यस्त समय चल रहा है. आप पाठकों के लिये इतना ही कहूँगा कि “व्यस्त रहें मस्त रहें.” समय जब चाहेगा कुछ लेकर उपस्थित हो पाऊँगा.
लोग एक दूसरे का नाम लेकर लिखते हैं. मैंने भी लिखा. अभी तक उसकी लीपा-पोती नहीं हुई है. शायद कालांतर में हो या कभी ना हो और लोग अपने अपने मन का मैल या तो दिल में संजो कर रख लें या किसी पोस्ट में उल्टी कर दें या वैसे ही भूल जायें, या यह [...]
रोज देखता हूँ कुछ कुछ रेंगते हुए लोग
और उनसे लिपट कर रेंगते हुए कुछ और लोग.
दिन रात बस उन्हीं से पाला पड़ता है मुझे
मैं भी उनसे डरकर अब रेंगना सीख रहा हूँ.
मुझे याद आता है वो दिन भी
जब जोड़ से पत्थर उठा कर फेंका था
उस कीचड़ उछाल कर जाती कार को.
पर ये तब की बात [...]
17 सितम्बर की चिट्ठाचर्चा अनूप शुक्ल ने की. चर्चा में उन्होंने कुछ प्रश्नों के उत्तर भी दिये. उनके उत्तर देने की देर थी की अपने चिरिन्नोसेन्ट समीर जी क्षमा माँगते नजर आये. उनके क्षमा माँगने की अदा इतनी प्यारी है कि जिससे क्षमा माँगें वही क्षमा का पात्र लगे. उन्होंने परमाणु विस्फोट के [...]


