परिचर्चा

एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग

कुछ पुराने चुटकुले नये अंदाज में

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कितना प्यार तुम्हें करता हूं जानू तुम्हें पता है?
एक दिन मुर्गा जोश में मुर्गी से ऐसा ही कहता है.
मुर्गी थोड़ा शरमायी और फिर थोड़ा इतरायी
और फिर वही “पुरातन सवाल” झट से जा दुहरायी.
“अच्छा मेरे लिए कुछ भी कर सकते हो?”
मुर्गे ने “हाँ”  कह अपना सीना ज्यों ही फुलाया.
“अच्छा तो अंडा देकर दिखाओ!” मुर्गी ने फरमाया.

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हुआ गजब एक दिन कुछ ऐसा
अंडा लेने खुद मुर्गी गयी दुकान.
दुकानदार ने अचरज से पूछा
“तुम खुद मुर्गी होकर अंडा लेने क्यूँ आई?
हे सतरंगी दो तुम मुझे इसका जवाब”.
मुर्गी थोड़ा शरमायी, और फिर इतरा के बोली
“मुर्गा कह्ता दो रूपए के अंडे की ख़ातिर,
ना कर अपना फिगर खराब”.

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मालिक ने टोका दफ्तर में महिला को
कपड़े थोड़े ज्यादा पहनो लड़के होते हैं खराब.
महिला ने बस देख के मौका किया तगादा
“क्या करें इतनी सैलरी मे इतना ही आता”.
मालिक ने भी झट इक हुकुम सुनाया
तीन महीने के लिये बंद कर दिया
मैडम जी का तन्खा खाता.

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बनिये ने ग्राहक को हाँकी
“रातों की नींद उड़ जायेगी
इतनी अच्छी है यह किताब”.
ग्राहक सिर हिलाते बोला
क्योंकि मेरे घर है पड़ी लुगाई
इसकी जरूरत नहीं है भाई.

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“बच्चे भगवान का रूप होते हैं उन्हें मारें नहीं”
शिक्षक ने बच्चों के पिता को समझाया.
“फिर तो मैं भगवान का बाप हूँ”
इसका अर्थ यही उसके समझ में आया.

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एक ब्लॉगर ने टिप्पणी पाने का एक सहज उपाय निकाला. उसका ब्लॉग हर आने जाने वाले पाठक को कहता “ऑटोग्राफ प्लीज”. फिर भी जब टिप्पणी की संख्या में बढ़त नहीं हुई तो उसने जानना चाहा कि वे कौन से “र्‌यूड लोग” हैं जो “इतनी पोलाईटनेस्स” के साथ मांगने पर भी टिप्पणी नहीं देते. पता चला सबके सब ब्लॉगर थे और कुछ गलती से आ टपके थे.

कितना उसने मुझे सताया

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रात बहुत अंधियारी थी और
इन्द्रदेव का मूड अलग था
नही जानता मैं अज्ञानी कि
प्रसन्नता या कुछ कारण और.

झम झम करके रही नाचती
सुकुमारी बरखा सारी रात.
बिजली रानी के वियोग में
नही सूझते हाथों को हाथ.

बात राज की बतलाऊंगा अब
हँसना ना तुम हे प्रिय सिरमौर.
कल रात स्वामिनी मेरे घर की
करती रही एक उजड्ड संग घुरदौड़.

क्या बतलाऊँ कैसे बतलाऊँ
है कितना उसने मुझे सताया.
आकर मध्य युगल के उसने
कितना उसने हमें जलाया.

हया-दया ना धर्म है उसको
था गाना उसके कान में गाता.
वो तो बस छूने ही वाला था
कि उठकर निकाला मैंने छाता.

हुआ दरअसल ऐसा कुछ मित्रवर
लगी मुझ को भाग्य से लघु शंका.
और हड़क कर दुबका कहीं वो राक्षस
जैसे हनुमान स्वयम् पहुँचे हो लंका.

पर “ढीठ” कहाँ है ऐसे मानते
हो गया शुरू फिर वहीं वह प्रचंड.
चूम ही डाला मेरे प्रियतम को
जैसे करता कोई मनचला उद्दंड.

और फिर मुझ बदकिस्मत को देखें
कैसे कहूँ कहाँ कहाँ उसने है काटा.
जब जब मैंने किया वार घात को
खाना पड़ा अपने मुँह पर ही चाँटा.

देर से जागी पर जागी बुद्धि मेरी
स्मृत हुआ बुजुर्गों से सुना उपाय.
वही किया हमने जो सब हैं करते
भगा दिया दुष्ट को कछुआ जलाय.

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जरा नीचे स्क्रॉल करना

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इधर बहुत दिनों से कुछ लिखा नहीं, बीच बीच में कुछ बातें सूझीं जो आप लोगों से बाँट सकता हूँ. तो हँस लें अगर जी चाहे.

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एक मच्छर क बच्चा पहली बार उड़ान भर कर वापस आया. पिता ने पूछा “कैसा महसूस कर रहे हो?”

वह बोला “बहुत अच्छा! सब लोग मेरे लिये ताली बजा रहे थे”.

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हीरो होन्डा का नया विज्ञापनः गुड नाईट का एस एम एस पा कर लड़का लड़की को गुड नाईट कहने उसके घर जाता है, आखिर गुड नाईट तो कहना ही था. पर मुझे लगता है मोबाईल में बैलेन्स नहीं था.

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एक महिला मेकअप करते हुए ढेर सारा क्रीम अपने मुँह पर लगाया. बेटे ने पूछा “यह क्या कर रही हो?”.
वह बोली “मैं खूबसूरत बन रही हूँ”.
तभी उसने फलतू क्रीम हटाने के लिये टिसू पेपर से अपना मुँह पूछा.
बच्चे ने फिर पूछा “हार मान गयी?”

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कुछ दिनों पहले मेरा जन्मदिन था. सबका होता है, पर नयी बात यह थी कि लोग मुझे विवाह के सालगिरह की बधाई भेज रहे थे. वास्तव में मैने Gtalk में अपना status लिखा था “एक और साल शांतिपुर्वक बीत गया!”.

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एक आदमी की धोती में किसी चलती मोटरसाईकिल की डिक्की का सिरा फँस गया. किसी ने पूछा आप को दुःख किस बात का ज्यादा है धोती फटने का या चोट लगने का?

उन्होंने कहा, मोटरसाईकिल वाले को पीट न पाने का.

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एक आई टी इंजिनियर कई दिनों से दिन रात दफ्तर में बिता रहा था, और उसका काम था ढेर सारे डाटा एन्ट्री स्क्रीन में सब कुछ एक सा दिखाना. इस काम में एक आदमी को सबसे ज्यादा Font ही बदलने पड़ते हैं. वह एक सुबह अखबार वाले के पास गया और बोला एक “Times New Roman” देना.

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एक दिन मेरी पत्नी ने मुझसे कहा मेरे लिये एक पेटीकोट ला दो. मेरी तीन साल की बेटी सुन रही थी. उसने पूछा, पेटीकोट क्या होता है? उससे बड़ा पाँच साल का बेटा, जो “बड़ा” को “ब्रा” बोलता है, बोला “वह एक ब्रा कोट होता है“.

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और जाते जाते…

एक चिट्ठाचर्चाकार बहुत देर से पोस्ट दर पोस्ट पढ़े जा रहे थे. श्रीमती जी बहुत देर से खाने के लिये बुला रहीं थीं. पर वे भाषा-सेवा कर रहे हैं यह सोच गुस्सा नहीं कर रही थीं. पर उन्हें उठाना तो था ही. सो वह धीरे से उनके पीछे पहुँचीं और उनके पीठ पर धीरे धीरे उंगली से खुजाने लगीं.

तभी चर्चाकार महाशय ने कहा “जरा नीचे स्क्रॉल करना“.

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आज इतना ही, दिमाग थोड़ा सुस्त है. दरअसल जब से स्वाईन फ्लू आया, शाहरुख खान को अमेरिका ने सताया, जसवंत सिंह ने जिन्ना को महान बताया, “परमाणु टेस्ट भी फेल था” यह भी किसी ने बताया तब से रोजमर्रा की बातें उतनी महत्वपूर्ण नहीं रह गयी हैं.

टेस्ट पोस्ट पर छह टिप्पणियाँ

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अभी मैंने अपना ब्लॉग www.wordpress.com से wordpress.org पर स्थांतरित किया और भतेरे (हम इसको अनूप जी की शब्दावली से चुरायिस) लोगों ने मेरे टेस्ट पोस्ट पर, जो कि चिट्ठाजगत की फीड में गड़बड़ी ठीक करने के बाद जाँचने के लिये लिखी थी, वाह वाह कर दिया. हम उपकृत हुये और एक और पोस्ट ठेल रहा हूँ. हाँलाकि होली नहीं है फिर भी अनुरोध है कि “बुरा न मानो”.

टेस्ट पोस्ट पर छह टिप्पणियाँ
सबकी सब जैसे झुनझुनियाँ

मजा बहुत आवे है हमको
जब सब बोले हम को गुनिया

अब का कहें हम मति तिहारी
मिला टेस्ट को भी बलिहारी

सब लोगन ने है अब ठाना
नये ब्लॉग पर है टिपियाना

सबने माँगा वचन सुहाना
होगा इसका कर्ज चुकाना.

अब चढ़ी इसको

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बहुत दिनों बाद यह किस्सा याद आया, तो सोचा आप लोगों से भी बाँट लूं. हो सकता है आप ने पहले भी सुना हो.

एक बार की बात है. नारद मुनि भगवान शिव को प्रणाम करने पहुंचे, देवी पार्वती मायके गयीं हुई थी. महादेव के पास ध्यान योग के पश्चात् भी समय ही समय था. नारद जी ने चुटकी ली “प्रभू फोर्स्ड बैचेलरहुड एन्जॉय कर रहे हैं”. महादेव ने मुस्कुराते हुए कहा आप तो इन सबसे अलग हो स्वयं विश्व भ्रमण करते रहते हैं, अच्छे अच्छे दृश्य और व्यंजनों से आपका मन न अघाता होगा और हम यहाँ भांग खा कर सर्दी में गुजारा करते हैं ऊपर से आप को चुटकी सूझ रही है. …………….आगे पढ़िये

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