कितना प्यार तुम्हें करता हूं जानू तुम्हें पता है?
एक दिन मुर्गा जोश में मुर्गी से ऐसा ही कहता है.
मुर्गी थोड़ा शरमायी और फिर थोड़ा इतरायी
और फिर वही “पुरातन सवाल” झट से जा दुहरायी.
“अच्छा मेरे लिए कुछ भी कर सकते हो?”
मुर्गे ने “हाँ” कह अपना सीना ज्यों ही फुलाया.
“अच्छा तो अंडा देकर दिखाओ!” मुर्गी ने फरमाया.
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हुआ गजब एक दिन कुछ ऐसा
अंडा लेने खुद मुर्गी गयी दुकान.
दुकानदार ने अचरज से पूछा
“तुम खुद मुर्गी होकर अंडा लेने क्यूँ आई?
हे सतरंगी दो तुम मुझे इसका जवाब”.
मुर्गी थोड़ा शरमायी, और फिर इतरा के बोली
“मुर्गा कह्ता दो रूपए के अंडे की ख़ातिर,
ना कर अपना फिगर खराब”.
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मालिक ने टोका दफ्तर में महिला को
कपड़े थोड़े ज्यादा पहनो लड़के होते हैं खराब.
महिला ने बस देख के मौका किया तगादा
“क्या करें इतनी सैलरी मे इतना ही आता”.
मालिक ने भी झट इक हुकुम सुनाया
तीन महीने के लिये बंद कर दिया
मैडम जी का तन्खा खाता.
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बनिये ने ग्राहक को हाँकी
“रातों की नींद उड़ जायेगी
इतनी अच्छी है यह किताब”.
ग्राहक सिर हिलाते बोला
क्योंकि मेरे घर है पड़ी लुगाई
इसकी जरूरत नहीं है भाई.
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“बच्चे भगवान का रूप होते हैं उन्हें मारें नहीं”
शिक्षक ने बच्चों के पिता को समझाया.
“फिर तो मैं भगवान का बाप हूँ”
इसका अर्थ यही उसके समझ में आया.
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एक ब्लॉगर ने टिप्पणी पाने का एक सहज उपाय निकाला. उसका ब्लॉग हर आने जाने वाले पाठक को कहता “ऑटोग्राफ प्लीज”. फिर भी जब टिप्पणी की संख्या में बढ़त नहीं हुई तो उसने जानना चाहा कि वे कौन से “र्यूड लोग” हैं जो “इतनी पोलाईटनेस्स” के साथ मांगने पर भी टिप्पणी नहीं देते. पता चला सबके सब ब्लॉगर थे और कुछ गलती से आ टपके थे.
