एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
चित्रपट
मेरी पीं पीं करने वाली गुड़िया
Apr 21st
बिटिया बड़ी हो रही है.
अब वो पीं पीं करने वाले खिलौनों से नहीं खेलती.
अब उसे चाहिए नए कपडे, गहने और गुडिया.
कल ही की बात है कि हथेलियों में समा जाती थी.
शायद कल गोद में भी न समायेगी.
रह जायेगी यही यादें मेरे साथ.
जब कभी दूर वो चली जायेगी.
उन्ही यादों का एक कतरा
रख लेता हूँ सजों कर अपने पत्र में.
अच्छा है अब पत्र बोल सकते हैं.
वरना कहाँ वापस आएगा ये मेरा बचपन.
आप भी मुस्कुरा देंगे
Feb 20th

अखबार पढ़ती हुई कांक्षा

और उसकी ट्राईसाइकिल चलते हुए कांक्षा के पितामह

आपने कहा