Archive for January, 2009

माँ तो सबकी होती है
मेरी थोड़ी अनोखी है
कुछ ऐसे छुप कर बैठी है
जैसे जन्म से मुझ से रूठी है
हाँ सुना है मैंने,
“वो नही रही” मेरे बचपन से
पर सरल नही है यूँ समझाना
उसको जिसका दूध छिना हो
मुझे यकीं था आयेगी वो
और ढूंढेगी हर पल मुझको
और उसे जब पीड़ा होगी
लग के सीने सो जायेगी
बिटिया बड़ी हो रही [...]

आज अख़बार में पढ़ा की एक आदमी को ऑस्ट्रेलिया ने नौकरी से इस लिए निकाल दिया की वो शौचालय में पानी का प्रयोग करता था.  यह सन्दर्भ मात्र है. मैं लन्दन गया हूँ और वहां शौचालय में पानी का प्रबंध ही नही मिला. अब मैं यह तो नही जनता कि पानी का प्रबंध था परन्तु [...]

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धर्म की चिंता होती उनको
वे भाषा की भी चिंता करते
और राज्य भी तो चिंतनीय है
पर हम अकिंचन पर कोई क्यों चिन्ते
इन्द्र देव को भूल गए वो
और भूले वो रति कामदेव को
इसीलिए तो तोड़ा मदिरालय
किन किन चीजों की बात करें हम
स्वयम्वर भी उन्हें याद नहीं अब
तभी तो विरोध वैलेंटाइन डे का
जो भूल गए मेरे माँ बाप सिखाना 
की [...]

दुनिया बदलने वाली है
क्योंकि अमेरिका बदलने वाला है
अमेरिका ही तो दुनिया है
और नही तो दुनिया का ठेकेदार है
ऐसा वो कहते हैं, पर सब नही मानते
घर में भी और बाहर में भी
कुछ लोगों ने कहा है कुछ नही बदलेगा
अगर बदलेगा तो बदलने वाले के हालात
मुझे भी लगता है कि कुछ नही बदलेगा
क्योंकि नही बदलेगा हमारे देश [...]

तुम तो रहोगी दूर, मगर रात तो आयेगी
यहाँ न होगा आँचल तेरा, क्या हवा सुलायेगी
सुबह तो होगी रोज पर वो कैसे मुझे जगायेगी
कपरों की सिलवटों से तुम्हारी याद तो आयेगी
एक नयी आदत लगी है तुम से झगरने की
जब दिल न लगेगा तो ये घर मुझे चिढायेगी
सूना दरवाजा सूना कमरा खाली बिस्तर
ये सब हर पल हर [...]

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