एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
Archive for January 7, 2009
सुख का भरम
Jan 7th
हाँ कुछ अच्छा भी हुआ था आज
मैंने बिटिया को स्कूल छोरा
और बेटे के साथ की थोरी मस्ती
दफ्तर को निकलने से पहले बीवी को क्या प्यार
बहुत अच्छा लगा ये सब बहुत दिनों के बाद
अरे नही, हम एक कॉम से आते हैं
जो पुरा दिन काम में लगा देते हैं
और जमा करते हैं कुछ चर्बी अपने तन में
जो दिखाती है कि कितने कर्मठ होंगे हम
कसूर हमारा नहीं कि हम ऐसे हो गए
थे तो हम भी निठल्ले ही बचपन से
कि अचानक शौक चर्राया नौकरी का
और अमीरों की तरह जीने का
कुछ इस तरह अमीर होने लगे हम
कि चल नहीं सकता घर दो महीने
बिना माहवारी तनख्वाह और भत्ते के
हाँ मिला एक भरम कि हम सुखी हैं
शायद हम भी आज एक किसान होते
पर पुरखों को रास आया नहीं खेत
और हमें नहीं भायी गाँव की धूल
पुकार
Jan 7th
आज कल कुछ खास होता ही नहीं
और अगर होता भी है तो कुछ मौतें
और होती है कुछ गिनतियाँ और समीक्षाएं
मालूम नहीं कब तक यूँ मैं रोज मरता रहूँगा
किसी आतंकी, किसी अपराधी, किसी नेता के हाथों
कोई बचाए ऐसा तो कोई दीखता ही नहीं
एक ही बार में मार डाले ऐसा कोई दिखे तो कहना

आपने कहा