एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
Archive for January 16, 2009
इस रात की सुबह तो जल्दी आयेगी
Jan 16th
तुम तो रहोगी दूर, मगर रात तो आयेगी
यहाँ न होगा आँचल तेरा, क्या हवा सुलायेगी
सुबह तो होगी रोज पर वो कैसे मुझे जगायेगी
कपरों की सिलवटों से तुम्हारी याद तो आयेगी
एक नयी आदत लगी है तुम से झगरने की
जब दिल न लगेगा तो ये घर मुझे चिढायेगी
सूना दरवाजा सूना कमरा खाली बिस्तर
ये सब हर पल हर दिन मुझे रुलायेगी
बिखरी चीजों की याद तुम्हे भी आयेगी
बच्चों की शैतानी से जब तुम थक जाओगी
“कहाँ गए तुम” यह आवाज अन्दर से आयेगी
हम तो रहेंगे दूर मगर याद तो आयेगी
हाँ फोन करूंगा और तुम भी करना
क्या इन से जुदाई कुछ कम हो पायेगी
है भरोसा ये रात नही है ज्यादा लम्बी
इस रात की सुबह तो जल्दी आयेगी
सत्यम
Jan 16th
लेखा को समझ “ले” और “खा”
मिल के दोनों बाप और पूत
कर गए सात अरब का लूट
नाम है सत्यम बेचते झूठ
सब कानून को चकमा दे कर
५३ हजार को सदमा दे कर
बाजार कर दिया चकना चूर
नाम है सत्यम बेचते झूठ
देश और आंध्र के गर्व थे जो
लाखों की उम्मीद रहे जो
आज हो गए हैं देश कपूत
नाम है सत्यम बेचते झूठ

आपने कहा