एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
Archive for February 10, 2009
मूड़न
Feb 10th
मूड़न होएतन्ही बौआ के
धोती भेटतैक नौआ के
किछ पैसा लगतैक चरहुआ में
आओर साड़ी भेटतन्हि बाँकी के
लागल चूना देखौंसी में
जेना मूडी फंसल कनौसी में
छन्हि शौख बहुत कनिया के
देथिंह कनौसी सोना के
गाम-समाज कह्तैक की
छन्हि चिंता विदेश कमौआ के
तैं करताह सभ विधि व्यवहार
जेकर ज्ञानों ने छन्हि बौआ के
देह में जेनउ ने चाही हुनका
पर वचन साँ दृढ़ बहुत छथि
जे मूडन त होयेबेक चाही
ई छन्हि कथन बुझौआ के
बॉस कहल्खिन्ह छुट्टी नहि
बैंक कहलकन्हि कर्जा नहि
अहि आर्थिक रिसेस्सन में
बिक गेल जमीन देखौआ के
तुम ही कहो ना
Feb 10th
तेरे नयना ऐसे सजना
जो ले जाते मेरे चैना
जो ना दिखे तो दिल घबराए
साँस रुके जब सामने आए
ऐसा क्यों हैं तुम ही कहो ना.
लहरों सी हैं तेरी बातें
जैसे वो धारा पर डोलें
मेरा मन भी खाए हिंडोले
चांदनी रात में जब तू बोले
ऐसा क्यों हैं तुम ही कहो ना.
मचल मचल कर दिल दहलाए
जब भी तुम सपने में आए
तुम इतने हो चंचल साथी
जैसे कोई नदी में हाथी
ऐसा क्यों हैं तुम ही कहो ना.
सोते सोते गा लेती हूँ
सो जाती हूँ गाते गाते
दिन तो लगता सपने जैसा
रात हो जैसे साथी अपना
ऐसा क्यों हैं तुम ही कहो ना.
जब तक सजन तुम न आते
तब तक तुम मेरे नींदों में हो
फिर जागें क्यों मेरे नयना
लोग कहें मुझे बावरी सजना
ऐसा क्यों हैं तुम ही कहो ना.

आपने कहा