कुछ ही समय की बात है
ऐसे बजी घंटी मोबाइल की
हुआ अनर्थ हो कोई कहीं

नही था कुछ ऐसा वैसा
हो गयी थी जिसकी आशंका
यह तो थे मेरे शुभचिंतक

जिनको यह बतलाना था
कि मैं उन विरले लोगों में हूँ
जिनपर वे मेहरबान हुए हैं

मैं कहता रह गया “बीजी हूँ भई”
पर एक मिनट बस एक मिनट
कह सुना ही डाला इतने फायदे

जितना खर्चो इतना बचेगा
यह उल्टी पट्टी पढ़ा गए हमको
और थमा ही डाला क्रेडिट कार्ड

पेट्रोल पर सरचार्ज न होगा
हर खर्चे पर रिवार्ड पॉइंट
और खाने पर कैश बैक

पेनाल्टी से बचने के खातिर
हर महीने की तारिख आख़िरी
दिखला देता था फ्लैश बैक

पकड़ के कान, घुमा के फ़ोन
करवाया कैंसल क्रेडिट कार्ड को
सम्मान दिया फिर से डेबिट कार्ड को

अगली बार कोई महानुभाव
जब फ़ोन करें बन के शुभचिंतक
तो सीधा कर दो फ़ोन बंद

राहत है उधार के जीवन से
चाहे चावल या हो गुलकंद
नकद लाता हूँ खुशियाँ चंद