एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
Archive for February, 2009
क्रेडिट कार्ड
Feb 16th
कुछ ही समय की बात है
ऐसे बजी घंटी मोबाइल की
हुआ अनर्थ हो कोई कहीं
नही था कुछ ऐसा वैसा
हो गयी थी जिसकी आशंका
यह तो थे मेरे शुभचिंतक
जिनको यह बतलाना था
कि मैं उन विरले लोगों में हूँ
जिनपर वे मेहरबान हुए हैं
मैं कहता रह गया “बीजी हूँ भई”
पर एक मिनट बस एक मिनट
कह सुना ही डाला इतने फायदे
जितना खर्चो इतना बचेगा
यह उल्टी पट्टी पढ़ा गए हमको
और थमा ही डाला क्रेडिट कार्ड
पेट्रोल पर सरचार्ज न होगा
हर खर्चे पर रिवार्ड पॉइंट
और खाने पर कैश बैक
पेनाल्टी से बचने के खातिर
हर महीने की तारिख आख़िरी
दिखला देता था फ्लैश बैक
पकड़ के कान, घुमा के फ़ोन
करवाया कैंसल क्रेडिट कार्ड को
सम्मान दिया फिर से डेबिट कार्ड को
अगली बार कोई महानुभाव
जब फ़ोन करें बन के शुभचिंतक
तो सीधा कर दो फ़ोन बंद
राहत है उधार के जीवन से
चाहे चावल या हो गुलकंद
नकद लाता हूँ खुशियाँ चंद
वैलेंटाइन डे
Feb 13th
लो आ गया प्यार के इजहार का दिन,
जोड़े हाथों में हाथ डाल घूमते नजर आएंगे
और अख़बारों में आयेगी कुछ रंगीन तस्वीरें
टीवी चैनल्स एक ही बात बकते दिन बिताएंगे
फिर श्रीमान मुतालिक और उनके साथी
अख़बारों में अपनी करनी से छप जायेंगे
और होगी साथ में कुछ चटपटी खबरें
कुछ सितारों की और कुछ लोकल तस्वीरें
फिर कल होगा, और लोग इस दिन को भी
एक आम दिन की तरह शायद भूल जायेंगे
चौराहे पर जो कल हाथों में हाथ डाले घूमते हैं
कल वो राशन की कतारों में नजर आएंगे
आज जिनसे छूटता नही एक पल का साथ
किस्मत ने चाहा तो वे पति पत्नी कहलायेंगे
शायद जिंदगी की उलझनों में उलझ कर
कहीं किसी मोड़ पर झगड़ते भी नजर आएंगे
सुबह, शाम, दिन और रात वैसी ही रहेगी
हम कुछ झुर्रियों से थोड़े और बूढे हो जायेंगे
जब हम देखेंगे उल्लुओं की तरह टीवी
हमारे बच्चे भी कहीं वैलेंटाइन डे मनाएंगे
आपस का प्यार तो उतना ही रहता है हमेशा
बस इजहार करने की आदत है चली जाती
अच्छा है साल में यह एक वैलेंटाइन डे है
वरना आई लव यू कहने की रिवाज चली जाती
मूड़न
Feb 10th
मूड़न होएतन्ही बौआ के
धोती भेटतैक नौआ के
किछ पैसा लगतैक चरहुआ में
आओर साड़ी भेटतन्हि बाँकी के
लागल चूना देखौंसी में
जेना मूडी फंसल कनौसी में
छन्हि शौख बहुत कनिया के
देथिंह कनौसी सोना के
गाम-समाज कह्तैक की
छन्हि चिंता विदेश कमौआ के
तैं करताह सभ विधि व्यवहार
जेकर ज्ञानों ने छन्हि बौआ के
देह में जेनउ ने चाही हुनका
पर वचन साँ दृढ़ बहुत छथि
जे मूडन त होयेबेक चाही
ई छन्हि कथन बुझौआ के
बॉस कहल्खिन्ह छुट्टी नहि
बैंक कहलकन्हि कर्जा नहि
अहि आर्थिक रिसेस्सन में
बिक गेल जमीन देखौआ के
तुम ही कहो ना
Feb 10th
तेरे नयना ऐसे सजना
जो ले जाते मेरे चैना
जो ना दिखे तो दिल घबराए
साँस रुके जब सामने आए
ऐसा क्यों हैं तुम ही कहो ना.
लहरों सी हैं तेरी बातें
जैसे वो धारा पर डोलें
मेरा मन भी खाए हिंडोले
चांदनी रात में जब तू बोले
ऐसा क्यों हैं तुम ही कहो ना.
मचल मचल कर दिल दहलाए
जब भी तुम सपने में आए
तुम इतने हो चंचल साथी
जैसे कोई नदी में हाथी
ऐसा क्यों हैं तुम ही कहो ना.
सोते सोते गा लेती हूँ
सो जाती हूँ गाते गाते
दिन तो लगता सपने जैसा
रात हो जैसे साथी अपना
ऐसा क्यों हैं तुम ही कहो ना.
जब तक सजन तुम न आते
तब तक तुम मेरे नींदों में हो
फिर जागें क्यों मेरे नयना
लोग कहें मुझे बावरी सजना
ऐसा क्यों हैं तुम ही कहो ना.
तू कर नाटक
Feb 5th
हैं निराश तुम्हारी प्रतिक्रिया से
अब न कोई उम्मीद है तुमसे.
कर सकता नही तू निष्पक्ष विचार,
तू कर नाटक
ले कर बदलाव कि आशा
हम लोगों ने तुम्हे जिताया था.
पर तुम तो निरे सत्ता लोलुप,
तू कर नाटक
जन मानस का बोध नही तुम्हे
न ही तुम्हे विविधता का ज्ञान.
पर आ ही गए तुम राजनीति में,
तू कर नाटक
नही भूलती जनता कुछ भी
जैसे तुम भूलते विचार हो.
अभी देर बहुत चुनाव में है,
तू कर नाटक
तुम अपने से पहले नही हो
आए यहाँ बहुतेरे तुम से.
जब तक आती है बारी मेरी,
तू कर नाटक
तुम भूलोगे, जग भूलेगा
पर कैसे भूलेगी मेरी बहना.
जो हाथ उठाया, वो मित्र तुम्हारा,
तू कर नाटक
पर याद रहे यह वचन हमारा
ऐसे ही नही यह कर्नाटक है.
जब तक हम तेवर बदलें,
तू कर नाटक

आपने कहा