एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
Archive for March 11, 2009
होली बहुत जरूरी है
Mar 11th
जो नर न खेले फाग
कल जायेगी उसकी बीवी भाग
और यदि वो हो एक नारी
मिले न उसको सुन्दर साड़ी
शौहर उसका पी के भंग
करे पडोसन संग हुरदंग
न मान बुरा मेरी बातों का
भूत हुआ मैं लातों का
आज नहीं खुद में रहना है
जो आये जी में कहना है
इतना होश अभी है बाकी
होली मुबरक तुम को साकी
सुन लो मेरी इतनी बात
रहो मगन तुम इस दिन रात
चाहे जो मजबूरी है
होली बहुत जरूरी है
पंजाबी और बिहारी
Mar 11th
कुछ सालों पहले मैं दिल्ली में था. वहां एक चलन है कि मजदूर टाइप के आदमी को बिहारी बुलाते हैं, साथ ही यह संबोधन गाली के रूप में भी प्रयोग होता है. इस शब्द का प्रयोग यदि आप गौर से देखेंगे तो ज्यादातर हरियाणवी या पंजाबी लोग करते हुए मिलेंगे. ऐसा इसलिए कि दिल्ली उनका पड़ोस है और उस पर उन्हें अपना हक़ ज्यादा दिखता है. मुझे इस लगाव की भावना से ऐतराज भी नहीं.
मैं इसका उतना बुरा नहीं मानता क्योंकि मुझे पता है की स्थानीय लोगों को हमेशा से प्रवासी लोगों से थोड़ी सी असहजता महसूस होती है और यह मनोवैज्ञानिक स्तिथि ज्यादा है और सामाजिक कम. इसे हलके भाव से लेना ही अच्छा है. अपने लन्दन प्रवास के समय भी मैंने कई बार “गो होम यू ब्राउन बास्टर्ड्स” सुना है. हालाँकि लन्दन में यदि इस बात की शिकायत ले कर आप अदालत चले जाएँ तो ऐसा बोलने वालों की शामत आ जाये जो यहाँ शायद मुश्किल है.
परन्तु एक रोचक बात मुझे अपने एक रिश्ते के भाई, जो शौकियाना गुरुमुखी सीख रहे थे, से पता चली कि गुरुमुखी में बड़ी “ई” की मात्रा को बिहारी कहते हैं. और तब का दिन और अब जब भी मुझे कोई पंजाबी बिहारी कह कर बुलाता है तो बड़े सहज भाव से कह देता हूँ कि अब हमें निकाल दोगे तो सिर्फ पंजाब बचेगा पंजाबी नहीं और उत्तर में मिलती है एक प्यारी सी हंसी.

आपने कहा