एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
Archive for March 31, 2009
मदारी
Mar 31st
मदारी: जमूरे!
जमूरा: हाँ उस्ताद.
मदारी: तुमने सुना?
जमूरा: क्या उस्ताद?
मदारी: चुनाव होने वाला है.
जमूरा: हाँ उस्ताद, मैं भी खड़ा हूँ.
मदारी: मजाक मत कर.
जमूरा: वो तो पब्लिक से करूंगा.
मदारी: क्या सोच कर खड़ा हुआ?
जमूरा: प्रधानमंत्री बनना है.
मदारी: औकात में रह.
जमूरा: उस्ताद, एक बात बोलूँ?
मदारी: बोल.
जमूरा: एक प्रधानमंत्री जमूरा बन गया तो एक जमूरा प्रधानमंत्री क्यों न बने?
मदारी: खेल ख़त्म हुआ पैसे मांग.
जमूरा: नहीं मिलता है उस्ताद अभी रिसेस्सन है
मदारी: स्विस बैंक से मांग
जमूरा: पच्चीस लाख करोड़ तो अपने हैं, वही न उठा कर दे दें.
दिल
Mar 31st
दिल्ली हिंदुस्तान का दिल है
बड़ा ही मजबूत और सुन्दर
करोडों को खुद में समाये हुए
पूरे वतन का बोझ उठाये हुए
एक दिल करता है खून से विष की सफाई
पर इस दिल की है ऐसी शामत आयी
पूरे शरीर से आये हुए विष
अब तो ह्रदय में ही बसना चाहते हैं
और चाहते हैं दिलो-दिमाग पर राज
उस पर बाकी पीड़ित अंग
भर रहे हैं बस इतनी ही आहें
कि ये विष दिल में या कहीं और चले जाएँ
परिष्कृत हों न हों, पर वापस न आयें
सुना है तंत्र को मौका मिलेगा
चुनने को खून और विष में अपनी पसंद
पर क्या करे यह जड़ तंत्र
जब कोशिकाओं में ही नहीं उमंग
दिल भी क्या करे
उसकी भी एक क्षमता है
उसे खून में से विष अलग करना है
पर कैसे निकले विष से खून
विष को ही चुनता है
और निराश पड़ा देखता है
थोड़ा बहुत बचा खून भी
धीरे धीरे हो रहा है नीला
अभी अभी जाने वाला योगी
लौट कर आ जायेगा
ऐसी एक आस भी है
चाहे यह देह न हिले न डुले
आशा है जब तक आख़िरी सांस भी है
चतुर
Mar 31st
अवकाश से लौटते हुए
एक हमसफ़र बच्चे से पूछा
मुझे भी अपने साथ ले चलोगे
मैं तुम्हारे साथ
तुम्हारे कमरे में ही रह लूँगा.
मुस्कुराया
सोचा
और कहा
हमारे यहाँ खाने की मेज के साथ तीन ही कुर्सियां हैं

आपने कहा