एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
Archive for March, 2009
कौन देता हैं इन्हें हथियार?
Mar 3rd
रोज खबर आती है आतंकवादी और अपराधिक हमलों की. पर मैंने कभी यह नहीं सुना की दुनिया भर की सरकार मिल कर हथियार बनाने वाली या इन लोगों तक हथियार पहुँचने वाले कंपनी और देश का कभी कुछ किया हो.
इतने हथियार उनके पास ऐसे ही तो नहीं आ जाते. वे इतनी मात्र में हैं की लुटे हुए भी नहीं मने जा सकते. फिर कोई तो नेटवर्क है जो इन्हें यह सब मुहैया करवाता है. फिर कोई यदि बता सकता तो मैं जरूर पूछता कि बंबई या लाहौर में होने वाले हमलों में जो हथियार प्रयोग में आये वे किस के किस कंपनी के द्वारा बनाये गए थे. और उस देश की सर्कार या विश्व समुदाय ने उनके साथ क्या किया.
मुझे लगता है कि यदि इनके सप्लाई का रास्ता रोक दिया जाये तो इन पर काबू पाना आसान हो जायेगा. फिर समझ नहीं आता कि विश्व समुदाय इन आयुध निर्माताओं पर या निर्यातकर्ताओं पर कोई कारर्वाई क्यों नहीं करता.
क्या पाकिस्तान तालीबनिस्तान बन जायेगा?
Mar 3rd
आज पाकिस्तान में जो कुछ भी हो रहा है वह यह साबित करता है कि आम आदमी क्या सोचता है इस बात से किसी को सरोकार नहीं है.
मैं यह कतई नहीं मान सकता की एक आम पाकिस्तानी अमन और सुकून नहीं चाहता होगा, फिर यह सरकारें ऐसी क्यों हैं? क्या उनको नहीं पता की अगर देश ही न होगा तो उनकी सरकारियत भी नहीं रहेगी? एक पल को मान लें की सर्कार बेबस है और आर्मी व आई एस आई ही दखल दे रहे हैं, तो इतना तो वह भी समझते होंगे की अगर देश न होगा तो वह भी नहीं रहेंगे. फिर आखिर वह कौन सी ताकत है जो पकिस्तान को पीछे की ओर धकेल रही है और उसे दुनिया में सबसे बदनाम देश बना चुकी है. फिर भी वहां की सर्कार उन ताकतों का कुछ भी नहीं बिगाड़ पा रही है? क्या उन्हें यह नहीं लगता की यदि ऐसा ही चलता रहा तो एक खूबसूरत देश तबाह हो जायेगा? पाकिस्तान का जन्म चाहे जिस सपने के साथ हुआ हो, यह तो किसी ने भी नहीं सोचा होगा की वह देश बर्बाद हो जायेगा.
मुझे दर लगता है कि पाकिस्तान जल्दी ही उन लोगों के हाथों में चला जायेगा या उन लोगों से ही उलझा हुआ नजर आयेगा जिन्हें उसने आज तक बढ़ावा दिया है.
आपको क्या लगता है कि पाकिस्तान तालीबनिस्तान बन जायेगा या पाकिस्तान एक खूबसूरत अमन पसंद और खुशहाल देश बन कर उभरेगा? आखिर वहां की आवाम ने किसी का क्या बिगाडा है, उसकी खुशी का ख्याल करने वाला कोई नहीं?
मेरा क्या है, मैं तो बस पिता हूँ
Mar 3rd
आजकल रात बहुत छोटी होती है
थोड़ी थोड़ी देर में बिटिया रोने लगती है
कभी कभी कुढन भी होने लगती है
नहीं कुढ़ती है, तो वो बस मेरी पत्नी
कहती है उसीने तो उन्हें जना है
तभी तो कुढ़ना उसके लिए मना है
उन्होंने मान दिया है उसको कुछ ऐसे
अहसान किया हो जनम कर जैसे
मुझे क्या जब उसे भी नहीं शिकायत इन से
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कहती है, मेरा क्या है मैं तो बस पिता हूँ
दुःख भरी ये उलहन चुप से सुन लेता हूँ
क्योंकि मेरा क्या है, मैं तो बस पिता हूँ
मैं नहीं आंकता तुम्हारा दर्द सहा हुआ
पर अच्छा नहीं लगता ऐसा कहा हुआ
मैं इतने आसानी से भी नहीं पिता हुआ
नहीं, मैं बस पिता नहीं, एक पिता हूँ
जिसने अपनी सालों की नींद गवां दी
और इन बच्चों की दुनिया सजा दी
नहीं मानती, तो बस एक शर्त कर लो
अगली बार हमारा पति-पत्नी का रोल उलट जाये
प्रभु के द्वार बस इतनी ही अर्ज कर लो
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अरे छोरो! अब तुम क्या पति बनोगी
छोरियां होंगी हजार बटा आठ-नौ सौ
तो फिर तुम्हे मैं यूँ ही ना मिलूंगा
इतनी किल्लत होगी लड़कियों की
रूप का तो कोई जिक्र भी न करेगा
जिसको जो मिलेगी वह उसी पर मरेगा
ऐसे में मैं क्यों तुम से शादी करूंगा
किसी बड़े अमीर के पल्ले न हो लूँगा
बच्चे किसी पालने वाली कंपनी को दे दूंगा
अगरचे तुम भी अमीरजादा हो गयी
तो फिर हमारे इस रोल बदलने और
बच्चे पालने की नौबत क्यों आ निकली
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मुझे फिक्र इसकी भी है कि कहीं तुम
अगले जनम और गरीब ना हो जाओ,
उस पर दो बच्चों की पिता न हो जाओ
मुझे पता है पिता होना इतना सरल नहीं
जितना समझ तुम मुझे कह देती हो
कि मेरा क्या है मैं तो बस पिता हूँ
यही सोच कर तुम्हारे भले के लिए
भूल जाता हूँ तुम्हारे ताने कल के लिए
फिलहाल तैयार होना है दफ्तर के लिए
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आपने कहा