कुछ दिनों के लिए अवकाश पर हूँ. बिटिया का मुंडन है.
लौटने पर कुछ नया लिखने की कोशिश करूंगा. तब तक के लिए सभी ब्लॉग साथियों को नमस्कार. तीन दिन की यात्रा जाने की, तीन दिन की यात्रा आने की. दो दिन देवघर आने-जाने के लिए, एक दिन सिमरिया जाना होगा. समय लगा तो पटना भी [...]
Archive for April, 2009
http://daalrotichaawal.blogspot.com/2009/04/blog-post_23.html
अभी अभी रचना जी ने शिकायत और तगादा की, तो सोचा उन्हें निराश करना ठीक न होगा. तो आइए आज आपको एक भूटानी व्यंजन, केवा-दात्शी, के बारे मे बताऊँ.
भूटान मे चीज को दात्शी कह्ते हैं. वहाँ आपको तरह तरह के व्यंजन मिलेंगें जो चीज के साथ बनती हैं. आलू को केवा, मिर्च को एमा, बीफ़ [...]
त्याग कर अभिमान अपना
रख धरा का मान ले तू
पाया बहुत कुछ अभी तक
अब दान की भी ठान ले तू
जी चुका बहुत अभी तक
निज, सखा, संतान खातिर.
मान ले तू, धर्म तेरा
है निज नहीं, संसार-सेवा.
जो जिया है व्यर्थ अभी तक
हो गयी हो क्षीण शक्ति.
माना यह अंतिम प्रहर है
फिर भी जननी बाट जोहती.
न सोच इतना, चल चला [...]
आज ही पता चला जापानियों ने जींस का एक नया स्टाईल तैयार किया है. वैसे मेरे विदेश में रहने वाले मित्रों को शायद अब तक इसका पता चल गया हो. पहली नजर में तो मैं कुछ और ही समझ गया था.
मैं ऐसी तस्वीरें अपने ब्लॉग पर नहीं डालना चाहता इसलिए स्वयं देखिये बिकनी जींस का [...]
जानकी! कतए छी? आउ नैहर.
देखू ने धिया पुता सब पैघ भय गेल.
किछ तऽ नेतो बनल अछि.
पैघ कुर्सी पर चढ़ल अछि.
वचन दऽ कय जाए कोना
दृग आ मुंह मोरि लेने अछि.
जानकी! कतए छी? आउ नैहर.
आउ बुझबियौक ओकरो कने
कोना राम राज्य चलै छल.


