एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
Archive for April 2, 2009
ताऊ की झेंप
Apr 2nd
बात सन् ९७ की है. मैं उस दौरान अपनी पहली नौकरी में था. घर से दफ्तर तक आने-जाने के लिए ऑटोरिक्शा ले लिया करता (इसका भी एक कारण है कभी इत्मीनान से बताऊँगा) . फिलहाल तो आपको यह बता दें कि पटना में बहुतेरे ऑटोरिक्शा का पिछ्वारा काट कर तीन और लोगों के बैठने की जगह बना दी जाती है. वैसे तो यह गैर-कानूनी है पर उस पर आप ध्यान न दें. क्योंकि हमारा मानना है कि ऐसे मनाही वाले कानून एक खास सरकारी कर्मचारी वर्ग के बीवियों की फरमाईशें पूरी करने के लिए बनाई जाती हैं.
खैर! तो मैं कह रहा था कि, कुल जमा के ऑटो में तीन बीच में, तीन पीछे में और दो चालक लोग को सहारा देने के लिए उसके आजू-बाजू में बैठा करते थे. जगह की थोड़ी तंगी होती थी पर काम चल जाता था. पर यदि किस्मत से कोई खाते-पीते घर का खाता-पीता बन्दा या यदि यात्रा अच्छी बनी हो तो बन्दी बैठ गयी तो तंगी बढ़ जाया करती थी.
ऐसे ही एक दिन जब लोग बैठ ही रहे थे, आख़िरी सवारी एक ताऊ जी निकले. उन्हें बैठने में थोड़ी तकलीफ हुई, सड़क पर भी घर से ऑटो तक आते हुए उनको भीड़ का सामना करना पड़ा था. और उनके मन का विसाद निकला पड़ा और कह पड़े “आबादी कितनी बढ़ गयी है”.
झल्लाए तो सब थे. यह तो रोज का काम था. पर मुझसे रहा न गया और हठात पूछ बैठा “ताऊ गलती किसकी है”? ताऊ के दुर्योग से उस दिन बाकी सभी युवा ही थे. हठात सभी ठठा कर हंस पड़े. फिर अगले पांच किलोमीटर का सफ़र सबने चुप-चाप गुजारा, पर सबों की दबी-दबी मुस्कराहट और ताऊ का झेंपना साफ़ झलक रहा था.
हाँ आपको बता दूं कि वे हमारे ताऊ रामपुरिया तो बिलकुल नहीं थे, हो भी नहीं सकते नहीं तो वे मुस्कुरा रहे होते और हम झेंप रहे होते.
मदारी-2
Apr 2nd
मदारी: जमूरे!
जमूरा: हाँ उस्ताद.
मदारी: खेल दिखायेगा?
जमूरा: सच्चा की झूठा?
मदारी: झूठा तो बहुत देखा पब्लिक ने. अब सच्चा दिखा.
जमूरा: फिर तो फरमाईशी कार्यक्रम होगा. बोल उस्ताद क्या दिखाऊँ?
उस्ताद, इलेक्शन का टाइम है, कुछ उसी पर दिखा.
जमूरा: उस्ताद, इलेक्शन का नाम मत लो (..और रोने लगता है).
मदारी: अब्बे, क्या हो गया? बाप मर गया या माँ भाग गयी?
जमूरा: बाप तो तू ही है और तेरी बीवी भागे तो मेरे ठेंगे से.
मदारी: तो क्या हुआ?
जमूरा: मैं इलेक्शन में खडा होने वाला था पर अब नहीं.
मदारी: बाप से मजाक करता है?
जमूरा: नहीं उस्ताद, सच कह रहा हूँ. मैं इलेक्शन में खडा होने वाला था.
मदारी: चल मान लेता हूँ, फिर क्या हुआ?
जमूरा: मैंने पब्लिक को बोला मैं हिन्दू हूँ, पब्लिक की बहन ने अन्दर कर दिया.
मदारी: ये तो बुरा हुआ. चल जाने दे. खेल दिखा.
जमूरा: अब तो मैं जेल में हूँ. (कह कर भाग खड़ा होता है).
हमें खींचने दो
Apr 2nd
अकेले रहने वाले नवविवाहित दोस्त को छेड़ा,
तुम यहाँ और बीवी मायके में?
बेतक्कलुफ़ सा जवाब आया
“समाज-सेवा के लिए छोड़ आया”.
एक ने कहा..
मजाक में कहते हो! सच हो गया तो?
फिर न कोई जवाब आया.

आपने कहा