एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
Archive for April 5, 2009
मैं सबको नेता बनाना चाहता हूँ
Apr 5th
बड़ी तमना है दिल में अपने गाँव-समाज के लिए कुछ करने की. वास्तव में मैं अपने गाँव, जिले और राज्य को समृद्ध देखना चाहता हूँ. और उसका सीधा-सीधा उपाय यही दिखता है कि सबसे पहले मेरे जैसे लोगों, जिनको भविष्य की जरूरत और रास्ते थोड़े बहुत दिखते हैं, को सड़क पर आना होगा. इसे क्रांति कहें या कुछ और, लेकिन रास्ता एक ही है – “सड़क पर उतरो”. हाथ पैर गंदे करो और हर चीजों को दुरुस्त करो.
तो मुश्किल क्या है? इरादे हैं, हौसले हैं, रास्ते हैं और मैं भी हूँ.
मुश्किल यह है कि मैं यदि अभी चल पड़ा तो मेरे ऊपर आधारित दस जिंदगियां कहाँ जायेंगी? उनको भूखा और उनके भविष्य को आग में झोंक कर तो अन्याय ही करूंगा ना? जिसे जन्म दिया है उसकी चिंता भी तो मेरा ही कर्त्तव्य है. उनको छोड़िए मुझे भी तो आजीविका की जरूरत होगी. जो काम मैं करना चाहता हूँ उसमे भी तो पैसे लगेंगे. कैसे होगा? खाली पेट, नंगे बदन तो काम न होगा. फिर करें क्या? मेरे जैसे व्यक्ति यदि कुछ बड़ा करना भी चाहें तो कैसे करें.
बहुत सोच विचार के बाद एक रास्ता निकला है, समय लगेगा, पर संभव लगता है.
आज से दस साल बाद मेरी पत्नी हमारे घर की जिम्मेदारी उठाने लायक हो जायेंगी. अभी मैं ३५ का हूँ तो ४५ के आस पास जब बच्चे उच्च विद्यालय से बाहर निकल चुके होंगे और दुनियादरी समझने लायक हो जायेंगे, तो मैं पत्नी को घर बार की जिम्मेदारी दे कर समाज की जिम्मेदारी ले सकता हूँ.
बहुत अजीब लगता है इतना कायराना तर्क देते हुए. पर शायद मेरी ही जैसी हालत मेरे हम-उम्रों की है जिनकी अपने देश को बहुत जरूरत है. सबकी मजबूरी भी एक सी होगी. मैं इसीलिए अपने विचार को पोस्ट की शक्ल में डाल कर उनके दिल की बात कहना चाहता हूँ.
मैं चाहता हूँ कि मैं और मेरे हम-उम्र लोग यह स्वीकार करें कि हमारी हमारे समाज को बहुत जरूरत है और हम जितनी जल्दी पारिवारिक जिम्मेदारी निभा कर समाज के लिए तत्पर हों उतना ही सुखी जीवन हमारे बच्चों का होगा. सिर्फ महंगी और ऊंची शिक्षा दिला देने या पैसा कमा कर रख देने से उनका जीवन सुखी नहीं होगा. उन्हें एक चुस्त-दुरुस्त सरकारी तंत्र और मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर भी चाहिए, और भी बहुत कुछ चाहिए होगा.
मेरी एक गुजारिश अपने बुजुर्गों से भी है. जो अवकाश प्राप्त लोग हैं, उनमे बहुतों को भगवान ने ज्ञान, साधन और स्वास्थ्य सब दिए हैं. जिनसे वे समाज में बदलाव ला सकते हैं. मेरा उनसे इतना आग्रह है, आपने भी हमारी तरह सपने देखे होंगे. अपने लिए, अपने बच्चों के लिए, अपने घर के लिए, अपने समाज के लिए, अपने राज्य फिर अपने देश के लिए. तो उठिए सोचिये कि उनमे से कितने सपने आपके पुरे हो गए और कितने बाकी हैं?
अच्छी पढाई कर ली. बच्चों को पढ़ा दिया, उनकी शादियाँ करवा दी, घर-बार भी बनवा दिया. और अब? कहीं आप इंतजार तो नहीं कर रहे? अपनी मृत्यु का?
वैसे तो अभी भी जहाँ पारिवारिक और सामाजिक दायित्वों में टकराव नहीं आता वहाँ जिम्मेदारी से मुख नहीं मोड़ता हूँ मैं. फिर भी मैं वचन लेता हूँ अपने आप से कि मैं अपने परिवार की मूलभूत आवशयकता पूरी कर के अपने सामाजिक उत्तरदायित्व का निर्वाह करना शुरू कर दूंगा.
यदि आप अपने पारिवारिक दायित्वों का निर्वाह कर चुके तो चलिए आपके घर के बाहर का सपना आपको बुला रहा है.
घी कहाँ गिरी तो दाल में
Apr 5th
दफ्तर में मैं और मेरे कुछ साथी जिनकी शादी नहीं हुई है उनको खींचते रहते हैं या यूँ कहिये कि चने की झाड़ पर चढ़ाते रहते हैं. यह एक ऐसी उम्र होती है जब हर लड़के लड़कियों को शादी के नाम पर एक अजीब सी गुदगुदी होती है. अब इस बात से यदि आप इनकार करते हैं तो मैं साफ़ साफ़ बता दूं कि जिनको ऐसी गुदगुदी नहीं होती हम उनकी बात ही नहीं कर रहे. अब ऐसे ही एक ताजा-तरीन वाकया पर नजर डालें.
कुछ ही दिनों पहले हमारे एक सहकर्मी अपनी छोटी बहन की शादी करवा कर लौटे हैं. वे कुंवारे हैं और हंसमुख भी. उनसे हमारी अच्छी बंटी हैं वजह वही है कि वे नए ज़माने के शब्दों में कहें तो पक्का “स्पोर्ट” हैं. एक आदर्श भाई होने के नाते वे और उनके अग्रज दोनों ने ही अभी तक विवाह नहीं किया है. वैसे उन दोनों की उम्र आज के ज़माने के हिसाब से ज्यादा नहीं हुई है. अभी वे अपने २० के खाने में ही हैं.
खैर तो मैं बता रहा था कि – हम उन्हें खींच रहे थे कि आपने अपनी बहन की शादी में जो लड़की पसंद की उसका क्या हुआ? यह किस्सा वो जब से आये हैं तब से चल रहा है और आखिर आज उन्होंने राज खोल ही दिया. कहानी कुछ ऐसी है..उन्ही की जुबानी. अरे हाँ एक बात बता दूं कि मेरे यह मित्र “मस्त” शब्द का मस्त प्रयोग करते हैं.
शादी के दिन लोगों के स्वागत का मस्त काम चल रहा था कि तभी एक चाचा आये और एक ओर थोरी दूर की तरफ इशारा कर के कहा “वहां गुलाबी कपडों वाली लड़की को देख रहे हो ना, उसके बारे में अपनी राय बताओ” और कहीं चले गए. अब मैं तो मस्ती में खुश की चाचा जी ने हरी झंडी दिखा कर गुलाबी इंजन दिखा दी है तो मुझे तो मस्त चलना चाहिए पहली बोगी बन के. पर बड़ी प्रॉब्लम हो गयी.
जब लड़की देखने के लिए उस तरफ गया तो देखा कि वहां दो लड़कियां गुलाबी कपडों में एक ही साथ थी. मैंने इधर उधर देखा पर चाचा जी नजर नहीं आये. गौर से देखा तो उसमे एक तो बहुत मस्त थी, बोले तो एकदम मस्त. मैं भी यह सोच कर कि इसमें एक तो है ही तो क्यों न दोनों का ख्याल रखूँ, उनका ख्याल रखने लगा (अपने यहाँ इसको ‘चारा डालना’ कहते हैं).
अगले चार पांच घंटे में शादी हो गयी. फिर सबके जाने के समय में चाचा जी नजर आये और पूछा “कैसी लगी वह लड़की”? मैंने पहले पूछा कि वहां तो दो गुलाबी कपडों वाली लड़की थी उसमे से कौन सा वाला देखने को बोला था? जब उन्होंने डिटेल में बताया तो पता चला कि वे उसी मस्त लड़की की बात कर रहे थे और मैंने मस्ती में बता दिया कि एकदम मस्त लगी. तभी तपाक से उन्होंने कहा कि “हाँ उसे तुम्हारे भाई के लिए दिख रहे हैं”.
फिर न उनसे कहा गया और न हमसे सुना गया. कुछ सुनाई दे रही थी तो सबकी हंसी और हमने उन्हें सांत्वना दे दी कि चिंता की कोई बात नहीं क्योंकि “घी कहाँ गिरी तो दाल में”.
आपका ब्लॉग कंटेंट चोरी हुआ?
Apr 5th
अभी अभी पता चला हरकीरत जी कि कविता उर्दू में नाम बदल कर छाप लिया गया है. ऐसी चोरी के लिए मैंने गूगल किया तो पता चला कि इसी रोकना या ठीक करना इतना कठिन नहीं है.
और हरकीरत जी तो कानूनी दावा भी थोक सकती हैं, इसके लिए उनको किसी वकील का सहारा लेना पड़ेगा. यदि ऐसा कुछ करें तो हमें भी अपने अनुभव से बताएं.
फिलहाल नीचे दिए लिंक पर देखें कि क्या किया जा सकता है.
http://www.eblogtemplates.com/did-someone-copy-your-blog-content/
अपील
Apr 5th
मुझे प्यार न करो तुम, तो भी गम नहीं.
बस अपने दिल में नफरत न बसा लेना.
रह लेंगे घरों के दरवाजे बंद कर के हम,
रहे ताकीद कभी भीड़ में मुंह न फिरा लेना.
यह चमन है तुम्हारा भी मानो या न मानो.
गफलत में कभी घर में दुश्मन न घुसा लेना.
और कहें क्या तुम से कितनी है उम्मीद,
घर छोड़ तू मुझे अपने दिल में भी जगह देना.
सोया रहे भगवान तो गम नहीं दोस्त,
मुझे डर है तू शैतान न जगा लेना.
हार जाए मनपसंद पात्र तो कोई गम नहीं,
रहे ख्याल तुम्हे भी कि कुपात्र न जीता देना.
तिजारत तुम्हारे सपनों का करते हैं जो,
भूले से भी तुम उन्हें दिल में न जगह देना.
नहीं काम आयेंगे तुम्हारे ये मौकापरस्त कभी,
किसी उसूलोईमान वाले को दिल से लगा लेना.

आपने कहा