एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
Archive for April 9, 2009
१० पटाखे
Apr 9th
१) एक सच्चे संगीत प्रेमी की पहचान क्या है?
जब एक आदमी एक औरत को बाथरूम में गाते सुनता है और फिर दरवाजे के छेद में आँख की बजाय कान लगा देता है.
२) हाईवे पर भैंस पर चढ़ कर जाते हुए एक व्यक्ति को ट्रैफिक हवालदार ने रोका, हेलमेट कहाँ है? जुरमाना लगेगा.
भैंससवार बोला: ध्यान से नीचे देख फोरव्हीलर है.
३) कंजूसी की हद क्या है?
सेकंड हैण्ड नैनो जिसमे गैस किट लगा हो खरीदने का इस्तहार देना.
४) शिक्षक: राहुल शराब नहीं पीता, इसमें राहुल क्या है?
विद्यार्थी: राहुल गधा है.
५) १० प्रतिशत दुर्घटनाएं शराब पीकर चलने से होती है. तो साबित होता है कि शराब नहीं पीने से ९० प्रतिशत दुर्घटनाएं होती हैं.
६) चांदनी रात थी, नदी का किनारा था, आसमान में तारों का नजारा था ऐसे में नौकर ने नौकरानी से कहा “आ बीड़ी पी ले”.
७) एक नर्स साक्षात्कार देने आयी.
डॉक्टर: कितनी तनख्वाह चाहिए?
नर्स: बारह हजार.
डॉक्टर: माई प्लेजर
नर्स: फिर तो २५ हजार
८) तुम्हारी गर्लफ्रेंड का एस एम् एस मिला है कहती है कोई पत्थर से ना मारे मेरे दीवाना को ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी है बोम्ब से उड़ा दो साले को.
९) जीजा: साली जी, आपके यहाँ कि सबसे मशहूर चीज़ कौनसी है?
साली: जीजा जी, जो मशहूर थी, उसे तो आप ले गए!
१०) केमिस्ट्री की क्लास में शिक्षक ने पुछा नाईटरेट क्या है. लडकी बोली वह दिन का दुगुना है.
मजाक हो गया अब कुछ सीरियस बातें. फालतू मेल फॉरवर्ड मत कीजिये. मैं ऐसे इमेल न फॉरवर्ड करता हूँ न करने की सलाह देता हूँ. वास्तव में हैवी फोर्वार्ड्स एक सोची समझी साजिश के तहत शुरू होती है जिसका उद्देश्य होता है इन्टरनेट को चोक (जाम) करना. और हम में से बहुत इस काम में इस कुकृत्य में मदद करते हैं. बिना यह जाने कि यह हमारे नुक्सान के लिए ही बनाया गया है. इन्टरनेट धीमा होगा या बंद होगा तो हमारे काम धीमे चलेंगे. और हम जैसे लाखों लोगों का नुक्सान होगा, जो कि ऐसे फॉरवर्ड बानने वाले चाहते हैं.
जिन्दगी
Apr 9th
आज बड़ी बोरियत हुई है.
तो?
कल भी तो हुई थी.
और कब नहीं हुई थी?
नहीं, कहना क्या चाहते हो?
इस से पहले कभी बोरियत नहीं हुई?
मैंने देखा है आपको.
घंटो कारें गिनते हुए.
चढ़ना तो बस में है ही नहीं.
अच्छा अब छोडो भी.
तुमने सुना?
क्या?
वर्मा की बेटी किसी के साथ भाग गयी.
अच्छा? यह तो पता ही न था.
किसके साथ?
क्या पता.
हम्म
अरे वो देख, शर्मा की बीवी
पता नहीं कितना खाते हैं ये लोग
दो ही तो जाने हैं.
पर सामान तरकारी रोज एक मन खरीदेंगे.
तुझे क्या लेना?
अरे नहीं, कभी खाने पर नहीं बुलाती.
हे हे हे हे ही ही ही ही हा हा हा हा
और तेरा घर का क्या हुआ?
पैसे नहीं हैं यार.
और तेरा बेटा?
लव मैरिज कर लिया.
कुछ पैसे आते तो घर का काम करवा देता.
फिर तो बेटी….
अरे नहीं एक लड़का है पड़ोस में.
काम हो जायेगा.
चल घर चलते हैं.
सड़क कितनी ख़राब है.
यह सरकार कुछ नहीं करती.
तो फिर क्या करें.
हम क्या करेंगे जो करेंगे ये नेता लोग.
सुना है कल कोई नेता आने वाला है?
हाँ, कुछ कम्बल पैसे भी देगा.
मुझे साथ ले लेना.
हाँ ठीक है.
माकन मालिक आया था.
काहे को?
अरे, उसका किराया नहीं दिया ना.
दे दूंगा काहे को जान खाती है.
हाँ तुझे दारू से फुर्सत हो तब न.
जुबान लड़ाती है?
फटाक, तड़ाक, टन्न्न्न..
अबे सुन,
कही देखा है उसे?
किसे साहब?
अच्छा, नहीं मालूम?
चल थाने मैं बताता हूँ.
दो पड़ेगी न सब याद आ जायेगा.
सलाम साहेब.
कुछ बताया?
नहीं दवाई चाहिए.
दे दो फिर.
सुना है उसे पकड़ कर ले गए.
सोचता हूँ सरेंडर कर दूं.
पागल हो?
उसको छोड़ देंगे कुछ दिन में.
मैंने दस हजार भिजवा दिया
उसकी बीवी के हाथ.
तेरी बेटी की शादी कब है?
अभी कहाँ, लड़का शहर चला गया.
मैं सोच रहा था.
ह्म्म्म पच्चीस हजार लूँगा
ठीक है.
सुनिए.
हाँ
पागल हो जायेंगे
अगर इनके बारे में सोचते रहे तो.
ये ऐसे ही हैं.
आप हाथ मुंह धो लो
मैं खाना लगाती हूँ.
एकांतवास में हड़बड़ी
Apr 9th
आज कल मैं एकांतवास में हूँ.
इसलिए नहीं कि मैं उदास हूँ या कर रहा हूँ कोई साधना.
दरअसल मायके गयी हैं मेरी प्यारी ‘भावना’.
हर पति-पत्नी का रिश्ता भी बड़ा अजीब है.
उनकी दूरी से ही पता चलता है वे कितने करीब हैं.
यह सुख कहें या दुःख, मिलना भी एक नसीब है.
यह सिर्फ मैं नहीं हर जोड़ा जानता है.
शादी कर के खुश है यह फिर भी कहाँ मानता है.
सुख को दुःख या फिर उल्टा ही कह रहा जानता है.
दोस्तों, सहकर्मियों ने भी शुरू कर दी हैं चुटकियाँ
ऐसी आजादी हर किसी को बार बार नहीं मिलती.
यार तेरी तो लाटरी लगा गयी ये छुट्टियाँ, “ऐश कर”.
“ऐश” क्या बंदा तो बिपाशा मल्लिका को भी तैयार है.
पर उसकी वापसी पर कैसे कहूँगा कि तुमसे मुझको प्यार है.
फिर सोचता हूँ उनका क्या, एक गया तो दूसरा यार तैयार है.
अभी भी पड़ा हूँ बिस्तर पर उसके इंतजार में
शायद अभी कहेगी “अब उठो भी चाय तैयार है”.
अरे बाप रे, नौ बज गए और मैं बैठा हूँ जैसे इतवार है.

आपने कहा