एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
Archive for April 11, 2009
दो डील: भगवान से
Apr 11th
स्वर्ग या नर्क
धरती पर यह परम्परा रही है कि जो भी व्यक्ति मर जाये उसे स्वर्गवासी डिक्लेयर कर दिया जाय. अभी तक तो यमराज जी ने भी लोगों की इच्छा का सम्मान रखते हुए सबको स्वर्ग ही भेजा. फलतः स्वर्ग लगभग हाउसफुल होने को था, सीटें कम बचीं थी और सीटों के बढ़ने की तब तक सम्भावना न थी जब तक कुछ लोग स्वयं पुनर्जन्म ले कर जगह खाली न कर दें. सरकारी व्यवस्था पर ऐश करना सबको अच्छा लगता है फिर भगवानी व्यवस्था तो इस से लाखों गुना बेहतर है.
अब भरते हुए स्वर्ग को देख यमराज ने मंत्रियों को पूछा कि यदि स्वर्ग का विस्तार करना संभव है तो उत्तर नकारात्मक मिला. यमराज ने मनुष्यों के अभियांत्रिकी और योजना की दुहाई और कुछ उदहारण भी दिए कि “देखो कैसे दिल्ली को बढा कर के एन सी आर तक ले गए, कैसे बंगलूरु को पहले बृहत् बंगलूरु और अब बंगलूरु मेट्रोपोलिटन रीजन बना रहे हैं. जो कुछ दिन में पूरा बंगलूरु जो जायेगा. अब तो छोटे-छोटे शहरों का भी विस्तार कर रहे हैं. गावों को शहर में विलीन कर शहर बनाये जा रहे हैं. और एक आप हैं कि स्वर्ग का विस्तार नहीं कर सकते”?
विश्वकर्मा: प्रभु विस्तार करना तकनीकी रूप से संभव है यदि नर्क के कुछ हिस्से को स्वर्ग में मिला दिया जाये. हमारे पास और कोई जगह तो है नहीं.
बीच में वृहस्पति बोल पड़े: प्रभु स्वर्गवासी आन्दोलन पर उतर आएंगे. नर्क में कुछ गिने चुने हैं उन्हें ज्यादा विरोध न होगा. हाँ उनमे से कुछ अपने अधिपत्य खोने के दर से विरोध करें, पर उन्हें भी नर्क के बदले स्वर्ग का लालच शांत कर देगा. स्वर्ग्वासीयों को भी स्वर्ग के नाम पर विचरने के लिए और जगह मिलेगी तो वे भी खुश रहेंगे.
कुबेर: प्रभु धन की समस्या आ जायेगी, नर्क के एक हिस्से को स्वर्ग बनाने में जो धन लगेगा अभी अपने खजाने में उतना भी नहीं है. प्रभु से अनुरोध है कि ऐसी योजना पर ध्यान न दें.
यमराज: और भक्तगण जो चढावा देते हैं वो?
कुबेर: अमूमन तो कोई आपके खाते में कुछ दान करता नहीं. बाकी देवताओं के नाम जो चढाये जाते हैं उसमे पुजारियों का हिस्सा देने के बाद उनके स्वयं की योजनाओं के लिए कम पड़ता है.
तभी नारद जी बोल पड़े:: प्रभु मेरे पास एक उपाय है जो मैं आप ही को बताना चाहता हूँ.
यमराज: कृपया हमें एकांत में छोड़ दिया जाय…..(और नारद से मंत्रणा करने लगते हैं. थोड़ी देर बाद दोनों मंद मंद मुस्काते हुए एक दुसरे से विदा लेते हैं).
अगले दिन दरबार में एक आदमी, जो एच आर मैनेजर था, मर कर यमराज के दरबार पहुंचा. यमराज ने पूछा “तुम कहाँ जाना चाहोगे वत्स, स्वर्ग या नर्क परन्तु ध्यान रहे कि निर्णय बदला नहीं जा सकता “? आदमी चकराया, प्रभु ने आप्शन दिया है, ऐसा कैसे हो सकता है, चलो जो भी हो स्वर्ग ही मांग लेता हूँ. बोला “स्वर्ग”. यमराज बोले “अरे नहीं, इतनी जल्दी नहीं पहले एक बार स्वर्ग और नर्क दोनों देख आओ, फिर आराम से अपना विचार हमें बता देना”.
दूत उसे पहले नर्क ले गया, वहां देखता है कि सभी आदमी-औरत नए-नए कपडे पहन कर इधर-उधर घूम रहे हैं. कहीं पकवाने तली और परोसी जा रही हैं, कहीं नाच गाना हो रहा है, कहीं लोग आपस में ठिठोली कर रहे हैं, कहीं शराब और खाना परोसा जा रहा है, कहीं कैबरे, कहीं डिस्को. शोर शराबा और पूरा पार्टी जैसा माहौल था और वातावरण (क्लाइमेट) भी बड़ा ही आरामदायक था.
फिर दूत उसे स्वर्ग ले गया. वहां देखता है कि सभी लोग सफ़ेद कपड़े पहने हुए शांति से बैठे हैं. कोई पूजा कर रहा है, कोई ध्यान कर रहा है, कोई प्रकृति की सुन्दरता को निहारे जा रहा हा है. स्त्रियाँ स्वेत वस्त्रों में मोतियों की माला पहने इधर से उधर घूम रही हैं, को शास्त्रीय संगीत गा रही हैं, कोई नृत्य कर रही हैं. सब अपने आप में मगन हैं. कोई किसी से बात नहीं करता. वातावरण यहाँ शांत और सुन्दर है पर यहाँ उत्सव जैसा नहीं बल्कि किसी सुबह सुबह मंदिर के जाप करने समय जैसा दृश्य हो रखा है.
अब उसे निर्णय लेना था. उसने सोचा मौसम तो दोनों जगह एक ही जैसा है. खाने,पीने, रहने और मनोरंजन वगैरह की भी दोनों जगह उत्तम व्यवस्था है. पर नर्क में चहल-पहल है और स्वर्ग में बोरियत. यहाँ कौन धरती से देखने आ रहा कि मैं नर्क में हूँ या स्वर्ग में. सो उसने निर्णय कर लिया वह नर्क ही चुनेगा और अगले दिन उसने अपना निर्णय यमराज को सुना दिया. यमराज भी प्रसन्न हो कर बोले “तथास्तु” और उसे नर्क भेज दिया.
अगले दिन जब वह नर्क पहुंचा तो वहां पहले जैसा कोई दृश्य न था, लोग फटे-पुराने कपडे पहन कर भिखारियों से हालत में मार खा खा कर काम कर रहे थे. वह दंग रह गया और दौर कर दूत के पास पहुंचा. मुझे यमराज जी से अभी के अभी मिलना है. दूत ने उसे दरबार भेज दिया. उसने यमराज से कहा: प्रभु मेरे साथ छल हुआ. पहले दिन तो नर्क बहुत ही मस्ती भरा था और अब….(रोने लगा). यमराज ने कहा “तब हम तुम्हे हायर कर रहे थे”.
-X-
पार्किंग स्पेस
एक आदमी साक्षात्कार देने देर से पहुंचा, परन्तु कोई भी पार्किंग स्पेस उसे खाली न मिला. अब घबराहट में उसने भगवन से विनती शुरू की. हे भगवन यदि मुझे अभी के अभी पार्किंग स्पेस मिल जाता है तो मैं शराब पीना छोड़ दूंगा और प्रत्येक रविवार को मंदिर भी जाऊँगा. तभी अचानक से एक पार्किंग स्पेस उसे मिल भी गया.
उसने ऊपर देखा और कहा “आप रहने दें, मुझे मिल गया”.
छापिये अपने रहस्य (गुप्त रूप से)
Apr 11th
कुछ दिनों पहले एक ब्लॉग पर नजर पडी. कोई हैं जो लोगों के गुप्त रहस्य बिना किसी को बताये अपने ब्लॉग पर छापते हैं. यह भेजने वाले का मन हल्का करता है. आपके मन में कुछ हो जो आप किसी से कहना चाहते हैं पर कह नहीं सकते और अन्दर ही अन्दर घुटते रहते हैं. तो आपके लिए ही बना है.
http://postsecret.blogspot.com

आपने कहा