एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
Archive for April 15, 2009
हम वोट क्यों दें?
Apr 15th
एक बार नजर दौड़ाईए देश के उन व्यक्तियों पर जो संभावित रूप से प्रधानमंत्री बन सकते हैं और फिर बताईये कि आपको यह नहीं लगता कि आप से कहा जा रहा है कि “इन बेशर्मों और बेगैरतों में से एक को अपना प्रधानमंत्री चुन लो”.
आप कहेंगे कि इन पार्टियों को वोट ना देकर किसी निर्दलीय या किसी तीसरी चौथी पार्टी के उमीदवार को वोट दीजिये.
तो? हल मिल गया?
वैसा उम्मीदवार अमूमन तो मिलेगा नहीं और मिल गया तो जीतेगा नहीं. चलिए मान लिया कि उसकी किस्मत जीतने की है और वह जीत गया. फिर वह क्या करेगा? किसी एक बेगैरत इंसान के साथ चिपक जायेगा. फिर पांच साल हम भकुआ की तरह उनका मुंह देखें और अपना सर धुनें. यही हमारी नियति है?
नहीं यह हमारी नियति नहीं है. यह हमारे सामुदायिक दायित्व से मुंह फेरने का नतीजा है. ऐसा इसलिए हो रहा है कि हम राजनीति का हिस्सा नहीं बनना चाहते. हम उसके दर्शक हैं जो दूर खड़े तमाशा देखते हैं. फिर सिर धुनते हैं कि तमाशा ठीक नहीं हो रहा. फिर खुद करो ना तमाशा, किस ने रोका है? उठो स्वयं और खड़े हो जाओ मंच पर. डरते क्यों हो? तुम जैसे हजारों जब तक नहीं आते, और उनमे से उन्नत निकल कर वृहद् अकार नहीं लेते, तमाशा तो ऐसा ही होता रहेगा. अब तुम्हारे पास दो रास्ते हैं. एक कि स्वयं तमाशाई बन कर खड़े हो जाओ या फिर अच्छे तमाशबीन बन कर वोट करो. फिर तुम्हारे हाथ में होगा कि तुम किस का तमाशा देखना चाहते हो. कौन सबसे बेहतर है.
सबसे बेहतर का अर्थ यह नहीं कि पूरे देश में कौन सबसे बेहतर है. तुम्हे उन्ही में से चुनना होगा जो अपना सब कुछ छोड़ (यदि छोडा हो तो) कर तमाशा दिखाने आये हैं. अब उन में से कुछ लालच में आये हों और कुछ सुच्चा कलाकार हों, यह वाजिब है. और तुम्हे इस तमाशे में हर बार शामिल होना होगा. चयन इमानदारी से करते रहो. घटिया कलाकार तो स्वयं खेल से बाहर हो जायेंगे.
नहीं मानते तो संगीत को लीजिये, सिनेमा को लीजिये. आप ख़राब कलाकारों को धीरे धीरे निकालते जाते हैं और बच जाते हैं आपके पास घिस कर निकले हुए चमकते सितारे. ठीक उसी तरह नेता भी एक दिन में नहीं बनता. आपकी पसंद को भी घिसना होगा, उसे भी कई परीक्षाओं में पास होना होगा. और वह परीक्षा आप लेते हैं. आपके विचार से ही वह उत्तीर्ण या अनुत्तीर्ण होता है. और जो बार बार उतीर्ण होता आया वही सबसे आगे की कतार में खडा है. उसे भी बार बार उतीर्ण कर के वहां तक भेजा आया है जहाँ से वह आपको साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा है. अब यदि वह, जो दूर खडा सबसे ऊपर दिख रहा है, आपको पसंद नहीं है, तो जो पसंद है उसे आगे बढाईये.
इसीलिए वोट दो.
२००९ चुनाव का भविष्यफल
Apr 15th
यह मेरी भविष्यवाणी है.
आने वाले चुनाव में कांग्रेस चुनाव हार जायेगी, भाजपा को उस से थोड़े कम सीटें मिलेंगी, जिसके कारण एक तीसरा मोर्चा सामने आएगा. जिसमे मायावती और शरद पवार के प्रधान मंत्री बनने के पूरे असार हैं. कुछ असार जयललिता, लालू, राबडी, मुलायम और अन्य नेताओं के भी हैं. ऐसा इस लिए की बहुमत न होने से कोई भी पार्टी अपना नेता नहीं थोप पायेगी.
सरकार यु पी ऐ की हो या तीसरे मोर्चे की, लालू यदि प्रधानमंत्री न बन पाए तो फिर से रेल मंत्री बनेंगे और पिछले सत्र की तरह आने वाले सत्र में भी रेल को नफा ही नफा होगा. यह नफा तब तक चलेगा जब तक लालू रेल मंत्री रहेंगे और उसके बाद वाला रेल मंत्री सही सही जानकारी देगा.
विदेश मंत्रालय श्री प्रकाश सिंह करत को दिया जायेगा ताकि वे अमेरिका और यूरोप से मुंह मोड़ कर देश को चीनमुखी बना सकें.
सुरक्षा संबधी खर्चों में कमी की जायेगी और कम्युनिस्टों के योगदान से चीन से लगी सीमाओं से सेना हटा कर बांग्लादेश की सीमा पर लगा दिया जायेगा जो वहां से आने वाले शरणार्थियों की देखभाल करेंगे.
शिक्षा पर खर्च का बजट कम किया जायेगा ताकि निजी स्कूलों और महाविद्यालयों को रहत मिल सके.
शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय श्री मती राबडी देवी को दिया जायेगा ताकि बाकी महिलाएं उन से प्रेरणा ले कर शिक्षा के बजाय अपने परिवार का विकास करें.
गोपीनाथ बंगलोर दक्षिण से जीत सकते हैं और उन्हें विमान एवं पत्तनन विभाग दिया जायेगा ताकि वह दक्कन एयरवेज की तरह इस विभाग को भी ठिकाने लगा सकें.
वैसे यह कोरी गप्प है और इसे भविष्यवाणी नहीं बकवासवाणी कहते हैं.
वोट कहऽ की भोट, करिहऽ जरूरे चोट
Apr 15th
गली-गली लगा के फेरे मांगे है ऊ भोट सखी.
और करीं जे आना-कानी, तऽ दिखलावे ऊ नोट सखी.
जे हमका समझे दू कौड़ी के ई नेतवन लोग सखी.
अबकी बेर चल के दिखाईन हिनको आपन गुरुर सखी.
अरे चाउर पडल वा, रहे दीं.
भैंसा बहकल वा, जाये दीं.
दुकान के देखी, जुनि चिंता करीं.
पांच साल में दीं एक बेर,
नहि तऽ मिली दुःख बेर बेर.
अरे गर्मी वा, तऽ जर ना जाईब.
अरे बरखा वा, तऽ गल ना जाईब.
अरे थाकल हईं, जुनि बात बनाईं.
अबकी जे अलसयलल तू.
फेर पांच बरख होई थू-थू.
I wish someone take this to rural people of Bihar, UP and people who understand this language (Bhojpuri).
एक बेचारा बादल
Apr 15th
घुम्म्क्कड़, आवारा, एक बादल बेचारा,
संयोग था, दुर्योग था, यह तो पता नहीं.
एक अल्हड़ पहाड़ी से एक दिन टकरा गया,
नादान था, उलझ गया, रहने लगा वो वहीं.
नदियों से, तालाबों से, झरनों व समुद्र से,
लाता है चुन चुन कर खुशबू भरे जल.
नहलाता है खुद से अपनी उस प्यारी को,
रहे रूप उसकी प्रिया का, ऐसे ही अविचल.
हर रोज, शाम से ही, रात बहुत देर तक,
सजाता है वो उसे, बारिश के बूंदों से.
फिर आधी रात में, निहारता थोड़ी दूर से,
छिटकती चांदनी को, अल्हड़ के देह से.
भोर से पहले, वह ओस की बूंदों से,
सजाता है फिर से, उस अल्हड़ पहाड़ी को.
और थोडा हो परे, निहारता है हर सुबह,
उस चिकने, चमकते, स्वर्णिम बदन को.
जी चाहे पहाड़ का, पर यह भी एक प्रेम है.
तभी तो इस अल्हड़ पहाड़ी को भी एक डर है.
सोचती है, क्या भरोसा, यह भी तो बादल है.
मुआ न जाने कब फिर कहीं चला जाता है.
बादल भी समझाता है फिर बड़े प्यार से,
समझा कर मेरे पगली!
मैं जाऊँगा तो फिर चला आऊँगा.
कभी इस रूप में या कभी किसी रूप में.
पर तुम क्यों घबराती हो?
जब तक हो तुम, रहेगा तुम्हारा रूप,
और रहेंगे तुम्हरे चाहने वाले बादल.
चढेगी तेरी जवानी, कभी न ढलने के लिए.
न डरता हूँ तनिक मगर, जरा मेरी सोच,
बादल का जीवन है और पानी की मौत.
जीवन यह मेरा, श्रृंगार तो है ही तेरा,
मरते हुए भी तुझे ही सजा जाऊँगा.
प्रेम तेरे देह पर, कुछ ऐसे लिख जाऊँगा.
होगा बदन तेरा, हरा-भरा श्रृंगार से.
आएंगे अनगिनत बादल,
हर मौसम में सँवारने तुझे प्यार से.

आपने कहा