एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
Archive for April, 2009
मदारी-2
Apr 2nd
मदारी: जमूरे!
जमूरा: हाँ उस्ताद.
मदारी: खेल दिखायेगा?
जमूरा: सच्चा की झूठा?
मदारी: झूठा तो बहुत देखा पब्लिक ने. अब सच्चा दिखा.
जमूरा: फिर तो फरमाईशी कार्यक्रम होगा. बोल उस्ताद क्या दिखाऊँ?
उस्ताद, इलेक्शन का टाइम है, कुछ उसी पर दिखा.
जमूरा: उस्ताद, इलेक्शन का नाम मत लो (..और रोने लगता है).
मदारी: अब्बे, क्या हो गया? बाप मर गया या माँ भाग गयी?
जमूरा: बाप तो तू ही है और तेरी बीवी भागे तो मेरे ठेंगे से.
मदारी: तो क्या हुआ?
जमूरा: मैं इलेक्शन में खडा होने वाला था पर अब नहीं.
मदारी: बाप से मजाक करता है?
जमूरा: नहीं उस्ताद, सच कह रहा हूँ. मैं इलेक्शन में खडा होने वाला था.
मदारी: चल मान लेता हूँ, फिर क्या हुआ?
जमूरा: मैंने पब्लिक को बोला मैं हिन्दू हूँ, पब्लिक की बहन ने अन्दर कर दिया.
मदारी: ये तो बुरा हुआ. चल जाने दे. खेल दिखा.
जमूरा: अब तो मैं जेल में हूँ. (कह कर भाग खड़ा होता है).
हमें खींचने दो
Apr 2nd
अकेले रहने वाले नवविवाहित दोस्त को छेड़ा,
तुम यहाँ और बीवी मायके में?
बेतक्कलुफ़ सा जवाब आया
“समाज-सेवा के लिए छोड़ आया”.
एक ने कहा..
मजाक में कहते हो! सच हो गया तो?
फिर न कोई जवाब आया.
नया ज्ञानोदय
Apr 1st
हाल ही में भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा प्रकाशित होने वाली “नया ज्ञानोदय” का फरवरी अंक पढने को मिला. पत्रिका अच्छी लगी और कहूंगा कि ज्यादा से ज्यादा लोग इसके बारे में जाने. आप इसके बारे में और जानकारी के लिए नीचे दिए कड़ी पर चटकाएं.
और हाँ, यदि आप इसे डाउनलोड कर के पढना चाहें तो वर्त्तमान अंक आप दाहिनी ओर ऊपर की तरफ “नया ज्ञानोदय” पर चटका कर इसे पा सकते हैं.
धन्यवाद

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