Archive for May, 2009

अश्लील

एक पुरुष का चॉकलेट बन जाना
एक लड़की का उसके नितम्ब का टुकडा खाना
कहलाता है अश्लील

उसी बदबू छुपाने वाली तरल के प्रचार में
जब गोते लगाती है एक स्त्री मन ही मन अभिसार में
तो वह नहीं कहलाता अश्लील

फिर लगाता है वही तरल एक पुरुष समंदर किनारे
लड़कियाँ अन्तरंग वस्त्रों में चली आती हैं दौड़े दौड़े
तो नहीं कहलाता अश्लील

स्त्री को निहारना इतना सहज है
कि हम विज्ञापन बनाते हैं सिर्फ उन्ही को देखने के लिए
हम सर हिलाते हैं जब वह पूछती है “छुओगे?”