Archive for May, 2009

शुभ प्रभात

सुबह हो गयी है. अर्धांगी कल निकल गयी आधी जान को वापस पाने के लिए अभी तक अचेत लेटी है. पुत्र जागते हुए लेट कर ऊर्जा बचा रहा है ताकि आज कल से ज्यादा साईकिल चला पाए. बेटी अपने पौनबोली (यह अधबोली से थोड़ा ज्यादा हुआ) में यह सोच कर कि सब सो रहे हैं कुछ गा रही है. बस उसी के उठने की देर है और घर में सबको जैसे कोई खदेरने लगेगा. उसे यह नहीं पता कि मैं यहाँ एक कोने में चुप से बैठ कर लोगों के ब्लॉग पढ़ रहा हूँ. More >

तरक्की

अरसा हो गया जुगनू नहीं दिखा
ना ही गोरैया दिखी सालों से जंगलों पर.
हमने ऐ सी लगवा लिया है घरों में
और बुन दिए दरवाजे और खिड़कियाँ. More >