Archive for June, 2009

कितना अच्छा होगा जब
एक ही किताब पढ़ायी जायेगी
दिल्ली से सुदूर गाँव तक.
बिजली का क्या है
दिल्ली में भी कायम नही रहती.
रास्ते में गड्ढे के लिये भी
जरूरी नहीं है किसी गाँव मे होना.
हस्पताल के दरवाजे पर मरने के लिये
कहीं और जाने की जरूरत नहीं.
राख़ आँखों मे उड़ कर गिरे
उसके लिये जरूरी है
कि हवा करो.
या फिर मारो पैर
राख [...]

लगे आपको “अप्रतिम”
वह शब्द कहाँ से लाऊँ मैं.
स्वरचित अज्ञान शिविर में
जब तड़प रहा हूँ हर दिन मैं.
अतुल्य लगे जो पाठक को
और जलाये दीप तिमिर में
वह कविता कैसे बनाऊँ मैं.
शब्द नहीं हैं पास मेरे
भाव गये कब के संग छोड़.
लिखना नहीं चाहता हूँ मैं
पर जब दबते हाथों के पोड़.
बह जाती मसि की इक धार
फिर बिखरते शब्द चहुँ [...]

तुम बहुत याद आओगे.

एक लड़की पर तेज़ाब डाला गया.
दूसरी जींस पहन कर घूम रही थी.
तीसरी ने अपनी माँ की हत्या कर दी.
चौथी को ससुराल में जला दिया गया.
पाँचवीं को सेना मे भरती किया गया है.
छठी ने अपने पति को मार दिया.
सातवीं ने पति के साथ जान दे दी.
आठवीं मेरे साथ ही जी रही है.
नौवीं को लोग मेरी बेटी [...]

हे आगंतुक गण! तनिक सुनो!
चाँद के गिर्द तारों के समान,
समंदरी रेत पर पाँव के निशान,
शादी के कार्डों पर छपे हुए नाम,
बधाईयों वाले कार्डों के पैगाम,
मौके बेमौके भेजे हुए टेलीग्राम
जैसी ही होती हैं इन चिट्ठों पर
हमारी और आपकी टिप्पणियाँ.
इसीलिये, जब आये हो यहाँ तो
इन कहावतों को चरितार्थ करो,
अपने आगमन को यथार्थ करो.
मुझे व मुझ जैसे लेखकों [...]

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