एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
Archive for September, 2009
Youtube से अब कुछ भी डाउनलोड कीजिये (विडियो, प्लेलिस्ट और चैनल्स)
Sep 13th
Youtube देखना तो अच्छा लगता है, पर यदि आपका ब्रॉडबैन्ड कनेक्शन लिमिटेड प्लान वाला है तो एक ही विडियो को दुबारा देखना पॉकेट पर भाड़ी पड़ता जाता है. कुछ विडियो या प्लेलिस्ट तो मैं बच्चों के लिये बार बार चलाता हूँ और बेकार में बैन्डविड्थ गवाँना अखरता था. तो इससे बचने के लिये कल सुबह से मैं एक प्लेलिस्ट डाउनलोड करने में भिड़ा था. बहुत मुश्किल से एक ऐसा टूल मिला जो न सिर्फ़ आसानी से काम करता है बल्कि छोटा भी है. अभी अभी मैंने इसे आजमाया और सोचा आप लोगों से भी बाँट लूँ.
इसे आप http://www.himili.com/blog/downloads/youtube-video-downloader/ से डाउनलोड कर सकते हैं. डाउनलोड करने के बाद इसे इन्स्टॉल करने की भी जरूरत नहीं. मैं अनजान सॉफ्टवेयर इन्स्टॉल करने से डरता हूँ.
इसे केवल Run करें. फिर विडियो URL में आप किसी विडियो, प्लेलिस्ट या चैनल की कड़ी डाल दें. थोड़ी देर में आप एक कमान्ड प्रॉम्प्ट खुला हुआ देखेंगे उसके बाद डाउनलोडर और कमान्ड प्रॉम्प्ट दोनों को खुला छोड़ दें. आप डाउनलोड की प्रगति कमान्ड प्रॉम्प्ट में देख पायेंगे. यह स्क्रीन शॉट आपकी सुविधा के लिये. और हाँ यदि पॉवरकट या लिंक डाउनटाईम या किसी और कारण से डाउनलोड बीच में ही रुक जाये तो कमान्ड प्रॉम्प्ट स्वत: बन्द हो जायेगा, ऐसा डाउनलोड पूरा होने के बाद भी होगा. पर यदि बीच में ही रुक गया हो तो घबरायें नहीं फिर से उसी लिंक को डाउनलोड करें यह टूल स्वत: जहाँ से बाधा आई थी वहीं से शुरु कर लेगा.
एक कली जो देखते देखते गुलाब हो गयी
Sep 12th
बनाने वाले ने चीजों को कितना खूबसूरत बनाया है. इस मंत्रमुग्ध करने वाली सुन्दरता को देखते ही रहने का मन करता है.
शायद अच्छाई हमेशा दूसरों में अच्छी लगती है
Sep 11th
मुझे चाहिये एक अच्छा सा रोजगार
क्योंकि मैं अच्छा पैसा कमाना चाहता हूँ
चाहिये एक अच्छी गाड़ी और एक अच्छा घर
एक अच्छी सी पत्नी और अच्छे बच्चे भी
और इससे अच्छा क्या होगा मेरे लिये?
यूँ तो मुझे तब भी अच्छा लगता है
जब कोई बाजी लगाता है देश के लिये
या हटाता है गली में पसरी गंदगी को
या फिर लड़ता है कहीं अन्याय के खिलाफ़
पर मैं ऐसा नहीं करना चाह्ता
क्योंकि उससे कुछ हासिल नहीं होता.
शायद ऐसा ही खयाल हर दिल में आता होगा.
पर क्या सोचते हैं वे लोग जो फिर भी
कुर्बान जाते हैं कुछ ऐसी अच्छाई पर
जिससे कुछ भी अच्छा नहीं होता उनके लिये.
मैं तो सब कुछ अच्छा पाना चाहता हूँ.
जो दूसरों का ख़याल करता हो
और जिसे परवाह हो
इस दुनिया और दुनिया के लोगों की
देखता हूँ उसे लोग अच्छा तो कहते हैं
पर कुछ भी अच्छा नहीं होता उसके साथ.
कल सुना एक सिपाही मर गया
कुछ घुसपैठियों को रोकने में
पर उसके घर का पहरेदार कौन होगा अब.
उसके पीछे तो एक जवान बीवी
और एक मासूम बच्ची भी है.
शायद अच्छाई हमेशा दूसरों में अच्छी लगती है.
नहीं तो ऐसा न होता कि उन घुसपैठियों को
देश के अंदर के लोग चुन चुन कर
कत्ल कर देते यह सोच कर कि
उन्होंने मारा है हमारे जवान को और
न जाने कितनों को निशाने पर रखा है.
चोरों, पॉकेटमारों और लफंगों को पीटने में
बहुतों ने हाथ आजमाया तो होगा.
पर क्या यह अच्छा नहीं होता कि
हर आदमी आजमाता इन घुसपैठियों पर.
शायद अच्छाई हमेशा दूर से ही अच्छी लगती है.
कुछ पुराने चुटकुले नये अंदाज में
Sep 10th
कितना प्यार तुम्हें करता हूं जानू तुम्हें पता है?
एक दिन मुर्गा जोश में मुर्गी से ऐसा ही कहता है.
मुर्गी थोड़ा शरमायी और फिर थोड़ा इतरायी
और फिर वही “पुरातन सवाल” झट से जा दुहरायी.
“अच्छा मेरे लिए कुछ भी कर सकते हो?”
मुर्गे ने “हाँ” कह अपना सीना ज्यों ही फुलाया.
“अच्छा तो अंडा देकर दिखाओ!” मुर्गी ने फरमाया.
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हुआ गजब एक दिन कुछ ऐसा
अंडा लेने खुद मुर्गी गयी दुकान.
दुकानदार ने अचरज से पूछा
“तुम खुद मुर्गी होकर अंडा लेने क्यूँ आई?
हे सतरंगी दो तुम मुझे इसका जवाब”.
मुर्गी थोड़ा शरमायी, और फिर इतरा के बोली
“मुर्गा कह्ता दो रूपए के अंडे की ख़ातिर,
ना कर अपना फिगर खराब”.
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मालिक ने टोका दफ्तर में महिला को
कपड़े थोड़े ज्यादा पहनो लड़के होते हैं खराब.
महिला ने बस देख के मौका किया तगादा
“क्या करें इतनी सैलरी मे इतना ही आता”.
मालिक ने भी झट इक हुकुम सुनाया
तीन महीने के लिये बंद कर दिया
मैडम जी का तन्खा खाता.
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बनिये ने ग्राहक को हाँकी
“रातों की नींद उड़ जायेगी
इतनी अच्छी है यह किताब”.
ग्राहक सिर हिलाते बोला
क्योंकि मेरे घर है पड़ी लुगाई
इसकी जरूरत नहीं है भाई.
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“बच्चे भगवान का रूप होते हैं उन्हें मारें नहीं”
शिक्षक ने बच्चों के पिता को समझाया.
“फिर तो मैं भगवान का बाप हूँ”
इसका अर्थ यही उसके समझ में आया.
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एक ब्लॉगर ने टिप्पणी पाने का एक सहज उपाय निकाला. उसका ब्लॉग हर आने जाने वाले पाठक को कहता “ऑटोग्राफ प्लीज”. फिर भी जब टिप्पणी की संख्या में बढ़त नहीं हुई तो उसने जानना चाहा कि वे कौन से “र्यूड लोग” हैं जो “इतनी पोलाईटनेस्स” के साथ मांगने पर भी टिप्पणी नहीं देते. पता चला सबके सब ब्लॉगर थे और कुछ गलती से आ टपके थे.
वर्डप्रेसः पोस्ट एडिटर को बड़ा कैसे करें
Sep 10th
ध्यान रखिये यह सिर्फ wordpress.org द्वारा संचालित ब्लॉग्स के लिये है.
मुझे वर्डप्रेस में बहुत सी बातें अच्छी लगती हैं पर कुछ चीजें खटकती हैं. तो ऐसी ही एक चीज थी वर्डप्रेस का पोस्ट एडिटर जो कि जरूरत से ज्यादा छोटा है. वह कहीं से एडिटर दिखता ही नहीं बल्कि एक टेक्स्ट इनपुट बाक्स ज्यादा लगता है और इससे मुझे बहुत समस्या होती थी. आप देख सकते हैं यह कुछ ऐसा दिखता था.
तो देखिये मैंने इसको बड़ा करने के लिये क्या क्या किया.
१) स्क्रीन ऑप्शन में नम्बर ऑफ कॉलम ऑप्शन का प्रयोग कर एडिटिंग सक्रीन को १ कॉलम का बनाया.
२) पोस्ट टैग और कैटेगरी वाले बक्सों को एडिटिंग एरिया के नीचे खिसका दिया.
३) एडिटिंग एरिया को बड़ा करने के लिये अपने ब्लॉग के /wp-admin/option.php में जा कर default_post_edit_rows के वैल्यू को बढ़ा कर २० कर दिया. आप इसे यदि ३ से कम या १०० से ज्यादा सेट करेंगे तो वर्डप्रेस इसे १२ पर सेट कर देगा.
और अब यह ऐसा दिखता है.



आपने कहा