एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
Archive for September, 2009
ब्लॉगरॉलः पेज रैंकिंग बढ़ाने का सहज उपाय
Sep 7th
कमाई के आधार पर तीन तरह के ब्लॉग होते हैं.
१) पूर्णतया व्यावसायिक
२) पूर्णतया अव्यावसायिक
३) अंशतः व्यावसायिक
चाहे आपके ब्लॉग का स्वरूप कोई भी हो, यह इच्छा सदैव रहती है कि ज्यादा से ज्यादा लोग उसे जानें. उसकी रैंकिंग अच्छी हो और पाठकों की संख्या निरंतर बढ़ती रहे. खास कर यदि आप पूर्णतः या अंशतः व्यावसायिक ब्लॉग चलाते हैं. तो यह ध्यान रहे कि आप अपनी जगह दूसरों के ब्लॉगरॉल और साईट में बनायें साथ ही दूसरों को भी अपने ब्लॉग में जगह दें.
जो लोग आपको अपने ब्लॉगरॉल में जोड़ते हैं उन्हें अपने ब्लॉगरॉल में जोड़ें. यदि किसी से आप जुड़ना चाहते हैं तो सलीके से सम्पर्क करें और बतायें कि आपने उन्हें लिंक किया है और आप चाहेंगे कि वे भी आपको लिंक करें.
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जो लोग अपना ब्लॉग वर्डप्रेस के सॉफ्टवेयर की मदद से स्वतंत्र डोमेन पर चलाते हैं उनके लियेः
कई बार आपका ब्लॉगरॉल बहुत बड़ा हो जाता है वैसी स्तिथि में सहज यह होगा कि आप एक अलग पेज में कड़ियों को रखें.
यदि आप WordPress.org के द्वारा चलाते हैं तो आप अपने ब्लॉगरॉल को मेरे लिंक पेज की तरह बनाने के लिये नीचे दी हुई विधि का प्रयोग करें.
एक पी एच पी फाईल बनायें, जिसमें नीचे दिया हुआ कोड पेस्ट कर दें. उसके बाद एक पेज बनायें और उसका टेम्पलेट “Links Page” सेट कर दें. हो गया, अब आपक ब्लॉगरॉल एक अलग पेज में दिखेगा.
<?php
/*
Template Name: Links Page
*/
?>
<?php get_header(); ?>
<div id=”content”>
<?php wp_list_bookmarks(‘title_li=&categorize=0′); ?>
</div>
<?php get_sidebar(); ?>
<?php get_footer(); ?>
नोटः यदि आप मेरे ब्लॉगरॉल में हैं तो मैं आशा करूँगा कि आप भी मुझे अपने ब्लॉगरॉल में जगह दें.
“इंडिया” पुल्लिंग या स्त्रीलिंग? और “भारत”?
Sep 5th
थोड़ी दुविधा हो गयी है. राय चाहिये, आशा है मार्गदर्शन अवश्य मिलेगा.
हम कहते आये हैं “मेरा भारत महान“, फिर “भारत माता की जय“. मैंने कभी “मेरा माता” नहीं सुना. ना ही माता के नाम के साथ “मेरा” शब्द का प्रयोग देखा. यह तो दुविधा का कारण है. दरअसल में मेरी दुविधा तो है कि मैं “मेरा इंडिया” लिखूँ या “मेरी इंडिया”. यह प्रश्न इसलिये कि मेरे साईट का नाम है www.myIndiya.com.
यदि मेरा भारत और मेरा इंडिया सही है, तो यह समझ नहीं पा रहा कि कैसे?
क्षमा करें मैं वैयाकरण नहीं हूँ.
कितना उसने मुझे सताया
Sep 2nd
रात बहुत अंधियारी थी और
इन्द्रदेव का मूड अलग था
नही जानता मैं अज्ञानी कि
प्रसन्नता या कुछ कारण और.
झम झम करके रही नाचती
सुकुमारी बरखा सारी रात.
बिजली रानी के वियोग में
नही सूझते हाथों को हाथ.
बात राज की बतलाऊंगा अब
हँसना ना तुम हे प्रिय सिरमौर.
कल रात स्वामिनी मेरे घर की
करती रही एक उजड्ड संग घुरदौड़.
क्या बतलाऊँ कैसे बतलाऊँ
है कितना उसने मुझे सताया.
आकर मध्य युगल के उसने
कितना उसने हमें जलाया.
हया-दया ना धर्म है उसको
था गाना उसके कान में गाता.
वो तो बस छूने ही वाला था
कि उठकर निकाला मैंने छाता.
हुआ दरअसल ऐसा कुछ मित्रवर
लगी मुझ को भाग्य से लघु शंका.
और हड़क कर दुबका कहीं वो राक्षस
जैसे हनुमान स्वयम् पहुँचे हो लंका.
पर “ढीठ” कहाँ है ऐसे मानते
हो गया शुरू फिर वहीं वह प्रचंड.
चूम ही डाला मेरे प्रियतम को
जैसे करता कोई मनचला उद्दंड.
और फिर मुझ बदकिस्मत को देखें
कैसे कहूँ कहाँ कहाँ उसने है काटा.
जब जब मैंने किया वार घात को
खाना पड़ा अपने मुँह पर ही चाँटा.
देर से जागी पर जागी बुद्धि मेरी
स्मृत हुआ बुजुर्गों से सुना उपाय.
वही किया हमने जो सब हैं करते
भगा दिया दुष्ट को कछुआ जलाय.
जरा नीचे स्क्रॉल करना
Sep 2nd
इधर बहुत दिनों से कुछ लिखा नहीं, बीच बीच में कुछ बातें सूझीं जो आप लोगों से बाँट सकता हूँ. तो हँस लें अगर जी चाहे.
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एक मच्छर क बच्चा पहली बार उड़ान भर कर वापस आया. पिता ने पूछा “कैसा महसूस कर रहे हो?”
वह बोला “बहुत अच्छा! सब लोग मेरे लिये ताली बजा रहे थे”.
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हीरो होन्डा का नया विज्ञापनः गुड नाईट का एस एम एस पा कर लड़का लड़की को गुड नाईट कहने उसके घर जाता है, आखिर गुड नाईट तो कहना ही था. पर मुझे लगता है मोबाईल में बैलेन्स नहीं था.
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एक महिला मेकअप करते हुए ढेर सारा क्रीम अपने मुँह पर लगाया. बेटे ने पूछा “यह क्या कर रही हो?”.
वह बोली “मैं खूबसूरत बन रही हूँ”.
तभी उसने फलतू क्रीम हटाने के लिये टिसू पेपर से अपना मुँह पूछा.
बच्चे ने फिर पूछा “हार मान गयी?”
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कुछ दिनों पहले मेरा जन्मदिन था. सबका होता है, पर नयी बात यह थी कि लोग मुझे विवाह के सालगिरह की बधाई भेज रहे थे. वास्तव में मैने Gtalk में अपना status लिखा था “एक और साल शांतिपुर्वक बीत गया!”.
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एक आदमी की धोती में किसी चलती मोटरसाईकिल की डिक्की का सिरा फँस गया. किसी ने पूछा आप को दुःख किस बात का ज्यादा है धोती फटने का या चोट लगने का?
उन्होंने कहा, मोटरसाईकिल वाले को पीट न पाने का.
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एक आई टी इंजिनियर कई दिनों से दिन रात दफ्तर में बिता रहा था, और उसका काम था ढेर सारे डाटा एन्ट्री स्क्रीन में सब कुछ एक सा दिखाना. इस काम में एक आदमी को सबसे ज्यादा Font ही बदलने पड़ते हैं. वह एक सुबह अखबार वाले के पास गया और बोला एक “Times New Roman” देना.
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एक दिन मेरी पत्नी ने मुझसे कहा मेरे लिये एक पेटीकोट ला दो. मेरी तीन साल की बेटी सुन रही थी. उसने पूछा, पेटीकोट क्या होता है? उससे बड़ा पाँच साल का बेटा, जो “बड़ा” को “ब्रा” बोलता है, बोला “वह एक ब्रा कोट होता है“.
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और जाते जाते…
एक चिट्ठाचर्चाकार बहुत देर से पोस्ट दर पोस्ट पढ़े जा रहे थे. श्रीमती जी बहुत देर से खाने के लिये बुला रहीं थीं. पर वे भाषा-सेवा कर रहे हैं यह सोच गुस्सा नहीं कर रही थीं. पर उन्हें उठाना तो था ही. सो वह धीरे से उनके पीछे पहुँचीं और उनके पीठ पर धीरे धीरे उंगली से खुजाने लगीं.
तभी चर्चाकार महाशय ने कहा “जरा नीचे स्क्रॉल करना“.
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आज इतना ही, दिमाग थोड़ा सुस्त है. दरअसल जब से स्वाईन फ्लू आया, शाहरुख खान को अमेरिका ने सताया, जसवंत सिंह ने जिन्ना को महान बताया, “परमाणु टेस्ट भी फेल था” यह भी किसी ने बताया तब से रोजमर्रा की बातें उतनी महत्वपूर्ण नहीं रह गयी हैं.


आपने कहा