परिचर्चा

एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग

जरा नीचे स्क्रॉल करना

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इधर बहुत दिनों से कुछ लिखा नहीं, बीच बीच में कुछ बातें सूझीं जो आप लोगों से बाँट सकता हूँ. तो हँस लें अगर जी चाहे.

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एक मच्छर क बच्चा पहली बार उड़ान भर कर वापस आया. पिता ने पूछा “कैसा महसूस कर रहे हो?”

वह बोला “बहुत अच्छा! सब लोग मेरे लिये ताली बजा रहे थे”.

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हीरो होन्डा का नया विज्ञापनः गुड नाईट का एस एम एस पा कर लड़का लड़की को गुड नाईट कहने उसके घर जाता है, आखिर गुड नाईट तो कहना ही था. पर मुझे लगता है मोबाईल में बैलेन्स नहीं था.

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एक महिला मेकअप करते हुए ढेर सारा क्रीम अपने मुँह पर लगाया. बेटे ने पूछा “यह क्या कर रही हो?”.
वह बोली “मैं खूबसूरत बन रही हूँ”.
तभी उसने फलतू क्रीम हटाने के लिये टिसू पेपर से अपना मुँह पूछा.
बच्चे ने फिर पूछा “हार मान गयी?”

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कुछ दिनों पहले मेरा जन्मदिन था. सबका होता है, पर नयी बात यह थी कि लोग मुझे विवाह के सालगिरह की बधाई भेज रहे थे. वास्तव में मैने Gtalk में अपना status लिखा था “एक और साल शांतिपुर्वक बीत गया!”.

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एक आदमी की धोती में किसी चलती मोटरसाईकिल की डिक्की का सिरा फँस गया. किसी ने पूछा आप को दुःख किस बात का ज्यादा है धोती फटने का या चोट लगने का?

उन्होंने कहा, मोटरसाईकिल वाले को पीट न पाने का.

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एक आई टी इंजिनियर कई दिनों से दिन रात दफ्तर में बिता रहा था, और उसका काम था ढेर सारे डाटा एन्ट्री स्क्रीन में सब कुछ एक सा दिखाना. इस काम में एक आदमी को सबसे ज्यादा Font ही बदलने पड़ते हैं. वह एक सुबह अखबार वाले के पास गया और बोला एक “Times New Roman” देना.

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एक दिन मेरी पत्नी ने मुझसे कहा मेरे लिये एक पेटीकोट ला दो. मेरी तीन साल की बेटी सुन रही थी. उसने पूछा, पेटीकोट क्या होता है? उससे बड़ा पाँच साल का बेटा, जो “बड़ा” को “ब्रा” बोलता है, बोला “वह एक ब्रा कोट होता है“.

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और जाते जाते…

एक चिट्ठाचर्चाकार बहुत देर से पोस्ट दर पोस्ट पढ़े जा रहे थे. श्रीमती जी बहुत देर से खाने के लिये बुला रहीं थीं. पर वे भाषा-सेवा कर रहे हैं यह सोच गुस्सा नहीं कर रही थीं. पर उन्हें उठाना तो था ही. सो वह धीरे से उनके पीछे पहुँचीं और उनके पीठ पर धीरे धीरे उंगली से खुजाने लगीं.

तभी चर्चाकार महाशय ने कहा “जरा नीचे स्क्रॉल करना“.

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आज इतना ही, दिमाग थोड़ा सुस्त है. दरअसल जब से स्वाईन फ्लू आया, शाहरुख खान को अमेरिका ने सताया, जसवंत सिंह ने जिन्ना को महान बताया, “परमाणु टेस्ट भी फेल था” यह भी किसी ने बताया तब से रोजमर्रा की बातें उतनी महत्वपूर्ण नहीं रह गयी हैं.

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4 Responses to “जरा नीचे स्क्रॉल करना”


  1. K M Mishra
    on Sep 3rd, 2009
    @ 11:04 pm

    Mazedaar Chutkalon ke liye Dhanyawaad. Isme se kuch aap beeti bhi The Kya ?


  2. Jasmin Sakry
    on Sep 6th, 2010
    @ 1:02 pm

    In general, it is safe to assume they don’t like when a share of folks collect photographs of.


  3. Julianne Backe
    on Sep 8th, 2010
    @ 12:46 am

    It is my turn to linger on something that gives a key explanation about.


  4. Junior Hanton
    on Sep 9th, 2010
    @ 2:39 am

    One man’s junk pile might just be another man’s.

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