एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
गुलेल बनाऊँगा और चिडिया मारूंगा
बचपन में हर बच्चे को लोग पूछते रहते हैं कि वह बड़ा हो कर क्या करेगा. ऐसा ही एक लड़का था जो इस प्रश्न का उत्तर हर बार एक ही देता था “बड़ा हो कर गुलेल बनूंगा और चिडिया मारूंगा”. शुरू शुरू में तो उसके माता पिता ने बच्चे की नादानी या मश्खारी समझ कर ताल दिया, परन्तु जब बच्चा सब कुछ समझने बूझने लायक हो गया तो भी उसका यह उत्तर न बदला.
परेशान हो माँ बाप ने हर तरफ मदद की गुहार लगाई और अखिरतः उन्हें एक मनोवैज्ञानिक का पता मिला जो ऐसे बच्चों को सही रस्ते पर सोचना सिखाता था. बच्चे को उस मनोवैज्ञानिक के पास ले जाया गया, तो सलाह दी गयी कि उसे कुछ हफ्ते वहीं छोड़ दिया जाये. तथास्तु “हारे को हरिनाम” वाली हालत में माँ बाप बच्चे को वहीं छोड़ आये.
जब बच्चा वापस लौटा तो कुछ समय तक किसी ने कुछ नहीं पूछा परन्तु माँ बाप ने उत्सुकतावश उससे पूछ ही डाला कि “बेटा बड़े हो कर क्या करोगे?”
बेटे ने इत्मीनान से जवाब दिया:
“पहले तो मैं बहुत ही मन लगा कर पढूंगा और इस लायक बनूँगा कि विदेशों में एक बड़ी सी नौकरी मिले. बहुत काम और नाम करूंगा, पैसे भी बचूंगा और जब ढेर सारा पैसा होगा तो वापस आऊँगा शादी करने. शादी में दहेज़ भी लूँगा. दहेज़ में सब कुछ लूँगा, घर, पैसा, गहने, कपडे यहाँ तक कि अंडरवियर भी. और जब वो अंडरवियर पुराने हो जायेंगे तो उनके रबर से गुलेल बनूँगा और चिडिया मारूंगा”.
| Print article | This entry was posted by दरभंगिया on March 5, 2009 at 8:40 pm, and is filed under हँसिये. Follow any responses to this post through RSS 2.0. You can leave a response or trackback from your own site. |


about 2 years ago
हा, हा, हा, हा.
कुत्ते की दम टेढी की टेढी ही रही.
about 2 years ago
हा, हा, हा, हा.
कुत्ते की दुम टेढी की टेढी ही रही.
about 2 years ago
भई वाह्! क्या खूब कही……..
about 2 years ago
पहले सुना था..फिर भी मजा आया..:)
about 2 years ago
ha ha ha ha
maza aaya
मेरी कलम – मेरी अभिव्यक्ति
about 2 years ago
nice
about 2 years ago
wah maza a gaya sarkar
about 2 years ago
varry funny