about 1 year ago - 4 comments
बात मेरे अन्तर-स्नातक की पढ़ाई शुरु करने के तुरंत बाद से शुरु होती है. नया नया कॉलेज वह भी मॉर्निंग. मेरे दो दोस्त भी बन गये थे. अच्छी जमती थी हमारी. गर्मी से लेकर सर्दियों तक सुबह सुबह पसीने में नहाते, बारिश में भींगते या ठिठुरते हुए कालेज जाना अभी भी याद आता है. बस
about 1 year ago - 1 comment
अक्टूबर में एक ब्लैक्बेरी खरीदा, फोन तो बहुत अच्छा है पर एक मुश्किल है. हिन्दी नहीं पढ सकता. तीन महीनें से कोशिश कर रहा हूँ पर ब्लैकबेरी ९००० बोल्ड पर हिन्दी नहीं देख पा रहा. यदि किसी सज्जन को पता हो तो कृपया बतायें.
about 2 years ago - 3 comments
रोज देखता हूँ कुछ कुछ रेंगते हुए लोग और उनसे लिपट कर रेंगते हुए कुछ और लोग. दिन रात बस उन्हीं से पाला पड़ता है मुझे मैं भी उनसे डरकर अब रेंगना सीख रहा हूँ. मुझे याद आता है वो दिन भी जब जोड़ से पत्थर उठा कर फेंका था उस कीचड़ उछाल कर जाती
about 2 years ago - 1 comment
मुझे चाहिये एक अच्छा सा रोजगार क्योंकि मैं अच्छा पैसा कमाना चाहता हूँ चाहिये एक अच्छी गाड़ी और एक अच्छा घर एक अच्छी सी पत्नी और अच्छे बच्चे भी और इससे अच्छा क्या होगा मेरे लिये? यूँ तो मुझे तब भी अच्छा लगता है जब कोई बाजी लगाता है देश के लिये या हटाता है
about 2 years ago - 2 comments
कितना प्यार तुम्हें करता हूं जानू तुम्हें पता है? एक दिन मुर्गा जोश में मुर्गी से ऐसा ही कहता है. मुर्गी थोड़ा शरमायी और फिर थोड़ा इतरायी और फिर वही “पुरातन सवाल” झट से जा दुहरायी. “अच्छा मेरे लिए कुछ भी कर सकते हो?” मुर्गे ने “हाँ” कह अपना सीना ज्यों ही फुलाया. “अच्छा तो अंडा
about 2 years ago - No comments
रात बहुत अंधियारी थी और इन्द्रदेव का मूड अलग था नही जानता मैं अज्ञानी कि प्रसन्नता या कुछ कारण और. झम झम करके रही नाचती सुकुमारी बरखा सारी रात. बिजली रानी के वियोग में नही सूझते हाथों को हाथ. बात राज की बतलाऊंगा अब हँसना ना तुम हे प्रिय सिरमौर. कल रात स्वामिनी मेरे घर
about 2 years ago - 1 comment
इधर बहुत दिनों से कुछ लिखा नहीं, बीच बीच में कुछ बातें सूझीं जो आप लोगों से बाँट सकता हूँ. तो हँस लें अगर जी चाहे. -x- एक मच्छर क बच्चा पहली बार उड़ान भर कर वापस आया. पिता ने पूछा “कैसा महसूस कर रहे हो?” वह बोला “बहुत अच्छा! सब लोग मेरे लिये ताली
about 2 years ago - 1 comment
जय होगी हमारी निश्चित ही पर निर्णय लेना होगा यह कि कितना स्वार्थ समोचित है. है नही दोष निज उन्नति में जब तक न पाप समाहित हो करता यह जन-कल्याण ही है. यदि शिक्षा एक साधन हो बस कुटुम्ब पालन का तो इतर कहाँ हम पशुओं से. हैं गिले व शिकवे सबको यहाँ और दोष
about 2 years ago - 10 comments
कितना अच्छा होगा जब एक ही किताब पढ़ायी जायेगी दिल्ली से सुदूर गाँव तक. बिजली का क्या है दिल्ली में भी कायम नही रहती. रास्ते में गड्ढे के लिये भी जरूरी नहीं है किसी गाँव मे होना. हस्पताल के दरवाजे पर मरने के लिये कहीं और जाने की जरूरत नहीं. राख़ आँखों मे उड़ कर
about 2 years ago - 2 comments
लगे आपको “अप्रतिम” वह शब्द कहाँ से लाऊँ मैं. स्वरचित अज्ञान शिविर में जब तड़प रहा हूँ हर दिन मैं. अतुल्य लगे जो पाठक को और जलाये दीप तिमिर में वह कविता कैसे बनाऊँ मैं. शब्द नहीं हैं पास मेरे भाव गये कब के संग छोड़. लिखना नहीं चाहता हूँ मैं पर जब दबते हाथों
about 2 years ago
bahut badhiya .
about 2 years ago
बहुत खूब…….