एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
मदारी
मदारी: जमूरे!
जमूरा: हाँ उस्ताद.
मदारी: तुमने सुना?
जमूरा: क्या उस्ताद?
मदारी: चुनाव होने वाला है.
जमूरा: हाँ उस्ताद, मैं भी खड़ा हूँ.
मदारी: मजाक मत कर.
जमूरा: वो तो पब्लिक से करूंगा.
मदारी: क्या सोच कर खड़ा हुआ?
जमूरा: प्रधानमंत्री बनना है.
मदारी: औकात में रह.
जमूरा: उस्ताद, एक बात बोलूँ?
मदारी: बोल.
जमूरा: एक प्रधानमंत्री जमूरा बन गया तो एक जमूरा प्रधानमंत्री क्यों न बने?
मदारी: खेल ख़त्म हुआ पैसे मांग.
जमूरा: नहीं मिलता है उस्ताद अभी रिसेस्सन है
मदारी: स्विस बैंक से मांग
जमूरा: पच्चीस लाख करोड़ तो अपने हैं, वही न उठा कर दे दें.
| Print article | This entry was posted by दरभंगिया on March 31, 2009 at 11:14 pm, and is filed under हँसिये. Follow any responses to this post through RSS 2.0. You can leave a response or trackback from your own site. |


about 2 years ago
damdaar vyang….. short and sweet
about 2 years ago
बहुत अच्छे!