एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
पागल हूँ, बेवकूफ नहीं
एक बार पागलों को ले कर जाने वाली एक गाड़ी के ड्राईवर को रास्ते में ही दीर्घ शंका की तत्काल आवश्यकता महसूस हुई. वह गाड़ी खड़ी कर निपटने चला गया. लौट कर जब आया तो उसके होश उड़ गए, देखता है कि किसी ने एक चक्का निकाल लिया. अब ड्राईवर बेचारा सर पकड़ कर बैठ गया. उसके पास स्टेपनी तो थी पर नट्स नहीं थे. वह पागलों को छोड़ कर कहीं जा भी नहीं सकता था और न ही उनमे से कोई उसकी मदद कर सकता है. बात पुराने ज़माने की है जब मोबाइल की छोडिये टेलीफोन भी सज्जनों की तरह विरले ही दिखते थे.
बहुत देर तक जब गाड़ी न चली तो एक पागल ने पूछ ही लिया, “क्या हुआ?”
हालाँकि उसे जवाब देने का कोई फायदा नहीं दिखता था फिर भी कोई तो समस्या पर बात करने वाला है सोच कर बोला “गाड़ी एक चक्का कोई निकाल ले गया, स्टेपनी है पर नट्स नहीं हैं. अब इसे लगाऊं तो पहुंचूं.”.
इस पर पागल बोला “तो इसमें ऐसे सर पकड़ कर क्यों बैठे हो? चारों चक्के से एक एक नट निकाल कर चौथा चक्का लगा लो”.
ड्राईवर खुशी से उछला और पागल की तारीफ में बोला “अरे वाह, लोग खामखा तुम्हे पागल कहते हैं तुमने कितने अकल की बात की है”.
पागल बोला “पागल हूँ, बेवकूफ नहीं”.
| Print article | This entry was posted by दरभंगिया on May 29, 2009 at 12:32 pm, and is filed under हँसिये. Follow any responses to this post through RSS 2.0. You can leave a response or trackback from your own site. |



about 2 years ago
हम सब के साथ भी अक्सर यही कुछ होता रहता है. सलाह देने वाला कोई पागल नज़दीक नहीं होता. यही समस्या है.
about 2 years ago
kautukji to hambhi bevakoof nahin jo comment de (magar paagal jaroor haiN)
badiya chutkula aabhaar
ww.veerbahuti.blogspot.com
about 2 years ago
lajawaab….
about 2 years ago
बात पुराने ज़माने की है जब मोबाइल की छोडिये टेलीफोन भी सज्जनों की तरह विरले ही दिखते थे.
अच्छा कटाक्ष। वाह।।
कभी कभी पागल की बातें कर जातीं हैं काम
बेवकूफ पागल से अच्छा रचना का पैगाम।।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
http://www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com
about 2 years ago
“दीर्घशंका”
- लोटे से सम्बन्धित इस प्रक्रिया को साहित्य में कम ही जगह मिलती है। एक उपेक्षित को मान देने के लिए धन्यवाद ।
“टेलीफोन भी सज्जनों की तरह विरले ही दिखते थे.”
“पागल हूँ, बेवकूफ नहीं”
स्वस्थ हास्य। मजा आ गया।
http://girijeshrao.blogspot.com
http://kavita-vihangam.blogspot.com
about 2 years ago
Sahi hi hai, Hum bhi pagalon ko dost banane aur unaki baten sunane aur padane me man lagate hai…aur bewkoofon se doori banakar rakhate hai…
Dekhiye aakhir aapase dosti kar hi li…
about 2 years ago
padhane me der hui. par comment to karenge hee
about 2 years ago
Bahut Bahut Dhanyavad.
Krpiaya yun hee apna sneh banaye rakhen.
about 2 years ago
स्वागत है दोस्त.