बहुत दिनों बाद यह किस्सा याद आया, तो सोचा आप लोगों से भी बाँट लूं. हो सकता है आप ने पहले भी सुना हो.

एक बार की बात है. नारद मुनि भगवान शिव को प्रणाम करने पहुंचे, देवी पार्वती मायके गयीं हुई थी. महादेव के पास ध्यान योग के पश्चात् भी समय ही समय था. नारद जी ने चुटकी ली “प्रभू फोर्स्ड बैचेलरहुड एन्जॉय कर रहे हैं”. महादेव ने मुस्कुराते हुए कहा आप तो इन सबसे अलग हो स्वयं विश्व भ्रमण करते रहते हैं, अच्छे अच्छे दृश्य और व्यंजनों से आपका मन न अघाता होगा और हम यहाँ भांग खा कर सर्दी में गुजारा करते हैं ऊपर से आप को चुटकी सूझ रही है.

नारद तो ठहरे नारद, चढ़ा दिया प्रभू को. ठीक ही कहा आपने महादेव! आप ही की दुनिया में आप ही का नाम लेकर लोग एक से एक पेय बना रहे हैं पी रहे हैं,   और जब आपको चढाने की बारी आये तो भांग और धतूरा चढ़ा कर निपटा दिया. आप स्वयं जा कर उनका आनंद लें तो पता चले की आपके भक्त आपको कितना सीधा समझते हैं.

महादेव ने कहा “कह तो आप ठीक ही रहे हैं, वैसे भी देवी के बिना यहाँ कुछ रखा नहीं है, ससुराल में पत्नी न हो तो ससुराल का आनंद ही चला जाता है. आप भी चलेंगे साथ में?”

नारद ने कहा “नारायण नारायण, प्रभू कहें तो अवश्य चलूँगा, परन्तु भगवान विष्णु को भी प्रणाम करने की इच्छा थी”.

महादेव ने कहा तो आप जाएँ, हमें आवश्यकता होगी तो आपको बुलवा लूँगा, हाँ भगवान् से मेरा भी प्रणाम कह दें”.

नारद “जैसी प्रभू की इच्छा” कह वहां से प्रस्थान कर चले.

नीचे धरती पर प्रभु पहुंचे, तो देखा लोग “जय शिव शंकर” का नारा लगा लगा कर ताड़ी, तरह तरह के शराब, भांग, गांजा, मारिजुआना और न जाने क्या क्या चढाये जा रहे थे. महादेव ने कहा, नारद सच ही कहते थे, चलो आज स्वयं इनका भोग लगाता हूँ.

तत्पश्चात महादेव भेष बदल कर जा पहुंचे एक बार में और काउंटर पर खड़े हो गए. बारटेंडर को एक बोतल दिखाते हुए पूछा “वह क्या है?” वह हंसा और पूछा “पहली बार आये हो? वह बीयर है तुम्हारे लिए एक दम ठीक रहेगा.” महादेव ने “तो इधर लाओ” कह वहीं बगल की ऊंची वाली कुर्सी पर बैठ काउंटर पर हाथ टिका कर बैठ गए. बीयर की बोतल आयी और प्रभू ने सीधा उड़ेल लिया. बारटेंडर का मुंह आश्चर्य से खुला ही रह गया, वह सोच रहा था “जो व्यक्ति बीयर का नाम नहीं जानता था वह एक ही बार में पूरी बोतल गटक कर कैसे आराम से बैठा है? डकार भी नहीं मारा पट्ठे ने”.

तभी महादेव ने उसे बुलाया “यह क्या पानी पिला रहे हो, कुछ और दमदार है?”  अब तक बारटेंडर को यह समझ में आ चूका था की सामने वाला बंदा नौसिखिया नहीं है हो सकता है गाँव से आया हो. फिर भी उसने झिझकते हुए व्हिस्की की एक बोतल बढ़ा दी.  प्रभु को क्या उन्होंने उसे भी बीयर की तरह उड़ेल लिया. अब तो बारटेंडर का चेहरा देखने लायक था. जब तक वह कुछ सोच समझ पाता प्रभु ने हुकुम दिया “तुम्हारे पास जितनी तरह की चीजें हैं सब ले आओ”. बारटेंडर घबरा कर रम, वोदका, जिन, सकोच जो कुछ भी था सब एक एक बोतल ला कर रख दिया. फिर होश में आते हुए पूछा पैसे तो हैं ना?  भगवान् मुस्कुराते हुए बोले चिंता मत कर और एक एक कर सारी बोतलें उड़ेलते गए.

बाकी लोग अपना पीना छोड़ महादेव का पीना देखने लगे. अब तक बारटेंडर घबरा रहा था, पर अब वह भी बाकी लोगों की तरह तमाशा देखने लगा था.

जब भगवान् सब ख़तम कर चुके तो उसने सोचा ऐसा ग्राहक यदि पक्का हो जाए तो अपने तो वारे न्यारे हो जायेंगे. यही सोचते हुए बहुत ही अदब से भगवान् से पूछा “आप जितनी पी चुके हैं, उतने में तो ये सब लोग लुढ़क चुके होते, आप ने सब ख़तम कर दिया फिर भी आराम से बैठे हैं. जरूर आप कोई बहुत बड़े व्यक्ति हैं. प्लीज मुझे बताईये आप कौन हैं.” भगवान् अब तक उसके व्यवहार से प्रसन्ना थे सो सोचा चलो इसे बता ही दें, और कहा “हम भगवान् शिव हैं”.

बारटेंडर मुस्कुराया, लोगों की तरफ मुड़ा, और बोला “अब चढ़ी इसको”.