एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
मिथिलाक विकास कोना होएत
मिथिलाक प्रत्येक व्यक्ति जे बाहर रहैत छथि सम्भवतः वापस आबए चाहैत छथि, मुदा करता की? जतए कतहु रहैत छथि जीविका उपार्जन मे ओझरा कए रहि जाएत छथि आओर यदि ओहि सँ उबरि गेलाह तँ धनोपार्जन मे लागि जाएत छथि। काज ई दुनु सेहो जरूरी छैक।मोन हुनको कचोटैत होयेबे करतन्हि जे मातृभूमि लेल किछ नहि कए पाएब रहल छथि। तथापि किछ लोकन्हि एहन होयेताह जे किछ करए चाहैत होएताह। कोनो व्यवसाय, कोनो नौकरी वा स्वाध्याय। परन्तु एक नजरि अहि पर देल जाऊ जे अवसर कतेक अछि?
हमरा लंदन सँ दिल्ली आबै मे 10 घंटा लगैत अछि मुदा दिल्ली से गाम पहुन्च्बा मे 20 घंटा। छोरु दिल्ली के पटना मात्र 175 किलोमीटर अच्छी मुदा लगभग 8 घंटा लागि जाएत अछि, दरभंगा मात्र 35 किलोमीटर लेकिन लागत दू घंटा । तहु पर यदि राति भय गल तँ रास्ते मे रहै परत। चलू ओहो स्वीकार दु पाई कम्मे कमा कए बच्चा सबहक नीक शिक्षा के सोची तँ युनिवसि॓टी आ विद्यालय केर हालत देखि कए सिहरि जाएत छी।यदि स्वास्थ्यक कोनो समस्या होए तँ कतय जाएब? गाम में तँ डाक्टर भेटता तकर कोनो गारंटी नहि.
ई सम्भव नहि छैक जे परिवारक रिस्क लय कय समाजक उद्धार करय लेल सभ लोकन्हि सहमत होएत. एहन बहुत रास छोट छोट गैप छैक जे ध्यान मंगैत छैक. वास्तव में बहुत स्वार्थी भये कय कही सकैत छी जे यदि कोई कठिन परिस्थिति से उबरि जायेत तँ वापस ओही में नहि जाए चाहत। तथापि एहन कम्मे मैथिल छथि जे गाँव सँ संपर्क निकुन्न कयने छथि.
जे समाज मे रहि रहल छथि यदि हुनका दिक्कत नहि होयेत छन्हि आओर यदि दिक्कत होयेत छन्हि तँ ओ चुप्प छथि तँ बाहर रहनिहार की करताह?
हमरा अंदाज सँ अधिकतर लोक जे बाहर रहैत छैथ कोनो ने कोनो रूपे गाम के मददि करिते छैथ। अधिकांशतः आर्थिक रुपे। तँ यदि अर्थ मददि नहि कए सकैत अछि तँ की मददि करत?
अहाँ कही सकैत छी जे नब विचार मददि करतैक। मुदा विचारक उपयोग लेल बहुत निष्ठा, सकारात्मक सोच आओर अधीर प्रयत्न लग्तैक। दोसर बाहर रहनिहार वाला सँ सोच मिलब सेहो अत्तेक आसान नहि छैक. बेसी काल सुननिहार के ई लागतैक जे छाँटि रहल छथि. हमर कहब जे पहिन प्रयास जे लोकन्हि गाम में रहि रहल छठी हुनका लोकन्हि के करय पड़तन्हि.
गाम विकास नही कएलक ता दोष ककर, पहिल दोष हरदम नागरिक के होएत छैक. हम ई मानैत छी जे ई आसान काज नही छैक. ताहि पर सँ ई बड़का छोटका आओर जाति धर्मक राजनीति जे प्रत्येक गुप्प में घुसि जायेत छैक से अलग. मुदा परिस्तिथि के अनदेखा नहि कएल जायेत सकैत अछि.
एकर निदान हमरा विचार सँ “जागरूकता” थिक. यदि कहुना कय सभ मैथिल के ई बुझायेल जाय सकैत
- जे विकास पहिल प्राथमिकता होएबाक चाही चाहे नेतृत्व कोनो वर्गक हाथ में रहए
- कि सरकारी तंत्र से काज कोना करौल जाए से बुद्धि सभ के बतोल जाए
- कि ग़लत होएत काजक विरोध कोना कएल जाए
- कि शिक्षा सभहक लेल जरूरी छैक ओर ओकरा में कोनो भेद भाव नही राखल जाए
- कि वर्गक भेद सभ काज में नही आनी, पावनि त्यौहार, वियाह दान अलग थिक आओर समाजक विकास अलग
- कि चुनाओ में वोट जातिक नहीं बल्कि उमीदवार के व्यक्तित्व अओर ओकर क्षेत्र के प्रति निष्ठां पर आधारित रहय
- कि सरकार कोण कोण योजना गमक विकास लेल शुरू कयने अछि अओर ओकर प्रगति कोना भये रहल अछि
- कि अधिकारीगण से कोना काज कराओल जाय
- कि मात्र छोट मोट निज स्वार्थ लेल समाजक हित ताक पर नहि राखी
एहन बहुत रास गुप्प छैक जे समाज के विकासक दिश लय जायत.
| Print article | This entry was posted by दरभंगिया on March 9, 2009 at 7:20 am, and is filed under मेरी बात, मैथिली. Follow any responses to this post through RSS 2.0. You can leave a response or trackback from your own site. |

