अनूप शुक्ल की हिंदी योग्यता क्या है?
17 सितम्बर की चिट्ठाचर्चा अनूप शुक्ल ने की. चर्चा में उन्होंने कुछ प्रश्नों के उत्तर भी दिये. उनके उत्तर देने की देर थी की अपने चिरिन्नोसेन्ट समीर जी क्षमा माँगते नजर आये. उनके क्षमा माँगने की अदा इतनी प्यारी है कि जिससे क्षमा माँगें वही क्षमा का पात्र लगे. उन्होंने परमाणु विस्फोट के सही तरह न होने के लिये भी क्षमा माँगी है आशा है देश की जनता उन्हें इस बात के लिये अबश्य क्षमा कर देगी. वैसे उन्होंने यह भी दुहराया है कि अगली बार विस्फोट सही सही करवायेंगे. कहाँ, कब और क्यों की उत्सुकता आप उन्हीं से पूछ कर शांत करें.
फिलहाल रचना सिंह ने अनूप जी के हिंदी में की गयी चर्चा का जवाब लाईन-ब-लाईन पढ़ते हुए, दुहराते हुए अंग्रेजी में एक सवाल किया है.
can we PLEASE have your qualifications in hindi language and literature so that we know how qualiified are you ? to judge so many ILLITERATES blogging in hindi .
और क्रमश:
and it really is fine to say
आपकी किसी बात का जबाब मैं नहीं दे रहा because some questions on qualifications {to correct every blogger’s hindi , judge their works and pass comments on their calibre as you have done when comparing them with your favorite blogger } cant be answere as qualifications are always backed by documentory evidence .
self appointism to judge others “caliber” without any pre requiste qualification in hindi literature or language i can only say keep avoiding this question but one day YOU will have to answer it
सबसे पहले तो आपके उपर एक खिन्न भाव सा उत्पन्न हुआ पर यह सोच कर कि बहुत से लोग हिन्दी पढ़ सकते हैं पर लिखने में उन्हें असुविधा होती है सोच कर उसे परे कर दिया.
अब मेरी बात.
अनूप जी की हिन्दी योग्यता जानने की जरूरत आपको क्यों होगी इसमें मुझे कोई रुचि नहीं है. पर इतना पता है कि केवल डिग्रीयाँ किसी व्यक्ति को लिखने व बोलने की योग्यता प्रदान नहीं करती. यदि ऐसा होता तो आप जैसा कोई भी व्यक्ति् एक से एक पूजनीय साहित्यकारों से उनकी डिग्री माँगने लगे और उसका जवाब उस स्तर का कोई साहित्यकार क्या देगा यह अंदाजा तो आप लगा ही सकती हैं.
ऐसा ही कुछ अनूप जी के कोई जवाब न देने का कारण है.
रही बात आपके “self appointism to judge others” तो इसके बारे में इतना ही कहना होगा लोग उन्हें पढ़ते हैं, उनकी राय मानते हैं इसीलिये वे अपने सुझाव देते हैं. वे जो भी कहते हैं इस बात को दुहराते हुए कहते हैं कि यह उनकी राय है और उससे सहमत होना या न होना अगले पड़े पर निर्भर करता है. अब ब्लॉग्गिंग तो अपना अपना मत प्रकट करने का स्थान ही तो है. असहमति होने पर अपनी और अगले की औकात नापने का प्रयास करना आपको हास्यप्रद ही बनायेगा.
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September 19th, 2009 at 10:22 am
आपकी बात से पूर्ण सहमति -मात्र डिग्रियां ही किसी को विषयगत पारंगतता की गारंटी नहीं देतीं !
September 19th, 2009 at 11:22 am
विवेक सिंह मुझे इसलिये प्रिय हैं कि उनके जैसी मौलिक सोच वाली कविता /तुकबंदी और कोई किसी के यहां नहीं दिखती मुझे। बहुत कम शब्दों में बिना तामझाम के बात कहने का सलीका विवेक जैसा मुझे और नहीं दिखता फ़िलहाल।
wow
can we PLEASE have your qualifications in hindi language and literature so that we know how qualiified are you ? to judge so many ILLITERATES blogging in hindi .
this quote of yours should be an eye opener for all otherswho clap hands on this platform or comment
this is the full comment
when write write with guts and truthfully
degrees and diplomas are not required for creative original writings but to assess someones capabilty you need to be qulaified in that subject
and if anup is then what is the harm in telling it
and if not what is the harm in accepting it
he is assessing all bloggers so he has to be qualified
September 19th, 2009 at 11:24 am
dr arvind mishra
September 19th, 2009 at 10:22 am
आपकी बात से पूर्ण सहमति -मात्र डिग्रियां ही किसी को विषयगत पारंगतता की गारंटी नहीं देतीं !
great then you should stop using Dr. infront of your name
lot of hard work must have gone in getting the Docrate Dr arvind , showing disrespect to it is like putting dirt over what ever you have done
September 19th, 2009 at 11:28 am
असहमति होने पर अपनी और अगले की औकात नापने का प्रयास करना आपको हास्यप्रद ही बनायेगा.
excellent because is that what exactly i have said
one should not assess anyone which anup has done in his comment
please read the full post on charcha and if you are as honest as u seem , then a appolgy is due for me because you have missed on what i have said and in fact you are saying the saem thing
September 19th, 2009 at 11:41 am
@रचना जी ,
सही कहती हैं आप .मुझे अपने नाम के आगे डॉ. नहीं लगाना चाहिए वैसे भी यह ओछापन ही दिखलाता है -मैं तो बिना डाक्टर के संबोधन को और भी आत्मीय समझता हूँ -आप अपनी तेवर में हैं -अच्छा लग रह रहा है ,सच्ची !
September 19th, 2009 at 11:49 am
@रचना जी
मैंने पोस्ट और आपकी टिप्पणियाँ पढ़ी थी, आपने इसे पुनरुद्धरित किया तो फिर से पढ़ी. पर लगता है आप ने इसे नहीं पढ़ा.
“रही बात आपके “self appointism to judge others” तो इसके बारे में इतना ही कहना होगा लोग उन्हें पढ़ते हैं, उनकी राय मानते हैं इसीलिये वे अपने सुझाव देते हैं. वे जो भी कहते हैं इस बात को दुहराते हुए कहते हैं कि यह उनकी राय है और उससे सहमत होना या न होना अगले पड़े पर निर्भर करता है.”
अनूप जी जिस हैसियत से टीका-टिप्पणी करते हैं उसके लिये लोग उनका आदर करते हैं. वर्ना जैसा आप कह रही हैं वैसा कहने वाले पहले भी आ चुके होते. और एक बात तो पक्की है अनूप जी उन पर कोई टिप्पणी नही करते जिन्हें बुरा लगता हो. तो इस हैसियत से उन्हें लोगों ने ही आदर दिया हुआ है.
वे अगर आप पर टिप्पणी करें तो आप उनसे शिकायत कीजिये देखिये यदि आपको उसके बाद कोई भी टिप्पणी मिलती हो.
September 19th, 2009 at 12:00 pm
I hve not said on anything about anup but about his comapring all bloggers and finding one the best to support
in what capacity ?? is my question
what is his qualification in hindi to judge so many hindi bloggers ??
commenting has nothing to do with judgeing and assessing
to judge someones creativity and say that i find him the best one has to have the ability and qualification
no degree or diploma is needed to blog and comment
but to write on charcha विवेक सिंह मुझे इसलिये प्रिय हैं कि उनके जैसी मौलिक सोच वाली कविता /तुकबंदी और कोई किसी के यहां नहीं दिखती मुझे। बहुत कम शब्दों में बिना तामझाम के बात कहने का सलीका विवेक जैसा मुझे और नहीं दिखता फ़िलहाल।
clearly means that all others besides vivek are duffers which includes me , u and dr arvind
so if you feel its ok then its ok with you
i did not feel it was ok so i asked in what capacity { ie what is anups qualification in hindi }
you should appologise to me because its u who is taking up my comment and writing on your post
I STILL REPEAT WE NEED DEGREES AND DIPLOMAS AND DOCTRATES IF WE WANT TO BEOME TEACHERS AND ASSESS OTHER
I STILL REPEAT WE SHOULD NOT TRY TO TEACH OTHERS IF WE ARE NOT QUALIFIED IN THAT SUBJECT { HINDI LITERATURE AND LANGUANGE } WE NEED TO HAVE PROFICIENCY
AND CREATIVE WRITING CAN BE DONE WITHOUT ANY DEGREE OR DIPLOMA
SO EITHER GIVE PROOF OF WHAT YOU ARE SAYING OR SAY YO ARE SORRY AND YOU MISUNDERSTOOD
September 19th, 2009 at 12:02 pm
अनूप जी जिस हैसियत से टीका-टिप्पणी करते हैं उसके लिये लोग उनका आदर करते हैं. वर्ना जैसा आप कह रही हैं वैसा कहने वाले पहले भी आ चुके होते. और एक बात तो पक्की है अनूप जी उन पर कोई टिप्पणी नही करते जिन्हें बुरा लगता हो. तो इस हैसियत से उन्हें लोगों ने ही आदर दिया हुआ है.
वे अगर आप पर टिप्पणी करें तो आप उनसे शिकायत कीजिये देखिये यदि आपको उसके बाद कोई भी टिप्पणी मिलती हो.
TIPPANI IS COMMENT
AND “self appointism to judge others” IS WHEN YOU APPOINT YOURSELF AND TELL OTHERS THAT THIS IS BEST AND THIS IS WORST
September 19th, 2009 at 12:09 pm
समस्या तब होती है जब आप आपके तथाकथित ज्ञान की काट तर्क से की जाती है. तब आप तिलिमिलाने लगते हैं
September 19th, 2009 at 12:10 pm
is post kaa maksad hi nahin samjh aa rahaa
Happy Blogging
September 19th, 2009 at 12:10 pm
@रचना जी
यह तो व्यक्तिगत पसंद की बात हुई. यदि उन्हें कोई सबसे अच्छा लगता है तो जरूरी नहीं कि बाकी सारे लोग अपने आप को नीचा दिखाया हुआ साबित करें. यह तो वही बात हुई कि यदि मैं कहूँ कि मुझे Brad Pitt से अच्छा नायक नहीं दिखता तो शाहरुख खा़न के चाहने वाले या स्वयम शाहरूख मुझे यह पूछने आ जायें कि तू किस हैसियत से Brad Pitt को सबसे अच्छा बोला, अपनी योग्यता साबित कर कि तुझे Acting की समझ भी है.
वैसे यदि आप अपनी संतुष्टि के लिये क्षमा चाहती है तो मैं आपसे क्षमा माँगने में अपनी हेठी होते नहीं देखता. सो कभी मौका देख कर, क्षमा माँग लूँगा. तत्काल तो मैं अपने मुद्दे पर अड़ा हुआ हूँ.
September 19th, 2009 at 12:14 pm
मैं कब से ढूँढ रहा हूँ कि आज बहस कहाँ हो रही है,
पता ठिकाना पूछता अब आके लगा हूँ
September 19th, 2009 at 12:17 pm
तत्काल तो मैं अपने मुद्दे पर अड़ा हुआ हूँ.
sure you can
it depends on what is the amount of respect one has for others
full people become self appointees of judging others caliber
on creative writing
bloging is about isues and not judgeing creativity
to judge someones creativity one needs to have required qualifications and
if u like Brad Pitt better then others then why should feel
एक खिन्न भाव सा उत्पन्न हुआ पर यह सोच कर कि बहुत से लोग हिन्दी पढ़ सकते हैं पर लिखने में उन्हें असुविधा होती है
and hindi literatute and language is not hindi blogging
September 19th, 2009 at 12:18 pm
appology is due for taking up a issue without understanding the issue and not for any thing else and saying sorry if we are wrong is no issue at all
September 19th, 2009 at 12:21 pm
no futre comments from me any more happy parenting because hindi bloging is a child and god father is there
September 19th, 2009 at 12:40 pm
hum yahan kuchh nahi kahenge.. kisi ek ke bare me kuchh achchha ya bura kah do to turat certificate ka demand ho jayega..
vaise ham bataye dete hain.. dubara koi kabhi mat puchhna..
hum MCA kiye huye hain.. aur last time hindi 10th me padhe the.. usme bhi 45 number laye the 100 me..
September 19th, 2009 at 3:59 pm
डा.अरविन्द मिश्र के ब्लाग से यहां आया। रचनाजी के और अन्य लोगों के मजेदार टिप्पणियां देखकर आनन्दित हुआ। रचनाजी को काफ़ी दिन बाद सक्रिय रूप से टिपियाते हुये देखकर बड़ा अच्छा लग रहा है। रचना की को सही में हमारी शिक्षा जाननी होती तो देख लेती कई जगह दी है मेरे प्रोफ़ाइल में।
September 19th, 2009 at 5:23 pm
हम्म…यहां भी झगड़ा चल रहा है !
September 19th, 2009 at 5:41 pm
आप कहना क्या चाह रहे हैं?
इस पोस्ट में “उनके उत्तर देने की देर थी की अपने चिरिन्नोसेन्ट समीर जी क्षमा माँगते नजर आये” का उल्लेख करना अच्छा नहीं लग रहा
शेष “आपके” अनूप शुक्ल ने कहा ही है कि आदमी अपनी अक्ल जितनी बात करता है
September 19th, 2009 at 5:57 pm
पोस्ट और कमेंट्स पढ़ आनंद आया .
सुन्दर प्रस्तुति . धन्यवाद . नवरात्र पर्व की हार्दिक शुभकामनाये
September 19th, 2009 at 6:23 pm
लगता है यहाँ भी कोई झगडा है चलते है भाई !
September 19th, 2009 at 6:52 pm
नवरात्र पर्व की हार्दिक शुभकामना
September 19th, 2009 at 6:52 pm
“मात्र डिग्रियां ही किसी को विषयगत पारंगतता की गारंटी नहीं देतीं !” सहमत.
September 19th, 2009 at 7:14 pm
नवरात्र पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ.
माँ दुर्गा सबका भला करें.
September 19th, 2009 at 7:47 pm
लड़ते रहिए
प्यार बढ़ता है
लड़ने से
भिड़ें मत
प्यार उतरता है
भिड़ने
और
चिढ़ें कतई मत
नकाब उतरता है
चिढ़ने से।
September 19th, 2009 at 7:51 pm
उपर्युक्त टिप्पणी में
6ठी पंक्ति में से
और जोड़ लें।
September 19th, 2009 at 8:37 pm
Dear Mr Anup Shukul
Its so simple to say see my qualifications on the profile where as the simple question is what are your qualification is hindi to be able to assess all hindi bloggers and short list one saying only he is original विवेक सिंह मुझे इसलिये प्रिय हैं कि उनके जैसी मौलिक सोच वाली कविता /तुकबंदी और कोई किसी के यहां नहीं दिखती मुझे। बहुत कम शब्दों में बिना तामझाम के बात कहने का सलीका विवेक जैसा मुझे और नहीं दिखता फ़िलहाल।
do you have any proficieny in hindi literature to be so judgemental if yes then please answer the simple question
why should it be so difficult for you to anwwer a question
its simpler to answer rather than deflecting the issue
ARE YOU QUALIFIED IN HINDI LANGUAGE AND LITERATURE TO JUDGE HINDI BLOGGING COMMUNITY
IF YES THEN SAY IT IF KNOW THEN BE POLITE TO APPOLOGISE TO THE ENTIRE COMMUNITY YOU HAVE JUDGECD
AND IF YOU ARE QULAIFIED IN HINDI I WILL APPOLOGISE ON THE PUBLIC DOMAIN
IT NEEDS GUTS TO ACCEPT OUR FOLLIES AND ACEEOT TRUTH AND LETS NOT BE SPINE LESS
September 19th, 2009 at 9:02 pm
एक टिप्पणीकार ने अभी कहा कि अब और टिप्पणी नहीं,
अब फिर टिप्पणी!
September 19th, 2009 at 11:02 pm
का दरभंगिया बाबू ..पहले त ई मधुबनिया का नमस्कार लें..सब ठो हिंदी वाला टीप पढ लिये..इंग्रेजी जरा कम आती है..डिग्री है तईयो…काहे से कि हिंदी दिवस अभीये अभीये न मनाये हैं….बकिया अनूप जी के लिये का कहें ..एतने कह सकते हैं..प्रणाम..
September 19th, 2009 at 11:06 pm
डिग्री?लिखा हुआ लोग पढ लें और समझ लें,वही सही है।मै अपनी डिग्री से जिओलोजिस्ट नही बन पाया मगर पत्रकार बन गया जिसकी डिग्री मेरे पास नही है।
September 20th, 2009 at 12:00 am
इस गर्मागर्म बहस का सिर पैर सुलझाने की कोशिश करने पर यह समझ पाया हूँ कि हिन्दी भाषा और साहित्य में उपाधि धारण किए बगैर किसी का मूल्यांकन करना ठीक नहीं। मैं इस बात का विरोध नहीं करना चाहता, क्योंकि यूनिवर्सिटी में परीक्षक होने के लिए लेक्चरर, रीडर या प्रोफ़ेसर होना पड़ता है। यह उपाधि के बिना सम्भव नहीं।
लेकिन अपनी निजी राय व्यक्त करने के लिए किसी डिग्री की आवाश्यकता नहीं है। रचना जी ने अनूप जी के जिस वक्तव्य पर आपत्ति उठाई है उसे दुबारा पढ़ना जरूरी है:
“विवेक सिंह मुझे इसलिये प्रिय हैं कि उनके जैसी मौलिक सोच वाली कविता /तुकबंदी और कोई किसी के यहां नहीं दिखती मुझे। बहुत कम शब्दों में बिना तामझाम के बात कहने का सलीका विवेक जैसा मुझे और नहीं दिखता फ़िलहाल।”
इसमें तीन बार ‘मुझे’ शब्द का प्रयोग किया गया है, जिससे स्पष्ट है कि यह उनके द्वारा एक ब्लॉगर के बारे में अपनी निजी पसन्द की बात की गयी है। दूसरे ब्लॉगर्स पर उनकी ऐसी कृपा नहीं है तो यह उनका (अनूप जी का) दोष नहीं है। दूसरे लोग अपने को विवेक जी जैसा बना लें तो देखा जाएगा।
वैसे दूसरों का मूल्यांकन करने की प्रवृत्ति सभी नॉर्मल मनुष्यों में स्वाभाविक रूप से पायी जाती है। सभी ऐसा करते हुए पाये भी जाते हैं। रचना जी स्वयं प्रायः सभी सक्रिय ब्लॉगर्स का मूल्यांकन अपने तरीके से कर चुकी होंगी। एक महिला होकर पुरुषों का मूल्यांकन करने के लिए भी कभी किसी ने उनसे पुरुष-विशेषज्ञता की उपाधि नहीं मांगी होगी। हिन्दी ब्लॉगिंग का सही स्वरूप क्या होना चाहिए इसपर भी उन्होंने लगातार अंग्रेजी में लिख-लिखकर समझाने का प्रयास किया है। व्याकरण और वर्तनी की असंख्य त्रुटियाँ भी बदस्तूर जारी हैं। लेकिन किसी ने यह नहीं पूछा कि किस हैसियत से यह पाठ उनके द्वारा पढ़ाये जा रहे हैं। मैं भी यह नहीं पूछ रहा हूँ। क्योंकि यह पूछना जायज नहीं है। (वे हम अकिंचन ब्लॉगर्स के लिए इतना श्रम और समय खर्च कर रही हैं यही क्या कम है?)
यह तो एक स्वतंत्र माध्यम है। अपनी सभी जिज्ञासाएं और जानकारियाँ यहा बाँट लेने की पूरी छूट है। मुझे रचना जी को यहाँ देखकर बहुत अच्छा लगा। जय हो।
September 20th, 2009 at 12:01 am
“ARE YOU QUALIFIED IN HINDI LANGUAGE AND LITERATURE TO JUDGE HINDI BLOGGING COMMUNITY
IF YES THEN SAY IT IF KNOW THEN BE POLITE TO APPOLOGISE TO THE ENTIRE COMMUNITY YOU HAVE JUDGECD
AND IF YOU ARE QULAIFIED IN HINDI I WILL APPOLOGISE ON THE PUBLIC DOMAIN
IT NEEDS GUTS TO ACCEPT OUR FOLLIES AND ACEEOT TRUTH AND LETS NOT BE SPINE LESS”
ऊपर लिखा मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा मेरे विचार में KNOW की जगह NOT लगाने से ही कुछ बात बनेगी। छह स्पेलिंग भी गलत हैं इस में…
अनिल पुसदकर जी से सहमत,
किसी भी रचनात्मक क्षेत्र में डिग्री का कोई महत्व नहीं, ज्यादातर लेखक,
कलाकारों, चित्रकारों, संगीतकारों,गायकों, खिलाड़ियों आदि के पास उनके क्षेत्र की हाई फाई डिग्री नहीं होती तो क्या उनको हक नहीं किसी को आंकने का, बड़ा विचित्र तर्क है यह तो…
September 20th, 2009 at 2:41 am
अरे भैया,यहां तो आतंक मचा हुआ है। ब्लॉगिंग जैसी लोकतांत्रिक जगह पर ये ख़ामख़ां की बहस देख कर मन खट्टा हो गया। बहस कभी बुरी नहीं होती लेकिन उसका कोई औचित्य तो हो। अब किसी को किसी का लिखा दूसरों से बेहतर लगा तो इसमें बहस कैसी। तिस पर डिग्री-डिप्लोमा की मांग…उफ़
@रचनाजी, ये बहस हिन्दी में शुरु हुई थी तो हिन्दी में ही रहने देतीं, भाषा पर इस तरह का अत्याचार कहां तक जायज़ है। मुझे नहीं लगता कि अंग्रेज़ी लिखने से आपकी बात में कोई अतिरिक्त वज़न पैदा हो जाएगा, कम से कम इस तरह की ग़लत अंग्रेज़ी से क़तई नहीं।
दूसरा,आपने कहा- …IF YES THEN SAY IT IF KNOW THEN BE POLITE TO APPOLOGISE TO THE “ENTIRE COMMUNITY” YOU HAVE JUDGECD
बड़ा ख़फ़ा हूं मैं अपने साथी ब्लॉगरों से कि मुझे किसी ने बताने की ज़हमत नहीं उठाई कि हमने रचना जी को ENTIRE COMMUNITY की तरफ़ से बोलने की इजाज़त दी है।
अमां छोड़िए भी अब। त्योहारों के मौसम में काहे खटास घोलते फिर रहे हैं हम??
September 20th, 2009 at 5:34 am
अनूप चिठ्ठा चर्चा का दुरुपयोग अपने छुद्र स्वार्थों के लिये शुरू से करते आये है इसी के चलते चिठ्ठा चर्चा चिथड़ा चरचा बन कर रह गई है ब्लागिंग गुटबाजी और मठाधीशी की शुरूआत करने का श्रेय इन्हीं महानुभाव को जाता है
September 20th, 2009 at 6:59 am
पूरे मामले का दुखद पहलू ये है कि ….अब ब्लागिंग करने से पहले चाणक्य-नीति सीखनी पड़ेगी…ऐसा संकेत मिल रहा है।
September 20th, 2009 at 9:40 am
किसी की हिन्दी कृतियों का मूल्यांकन करने के लिये हिन्दी भाषा मे कोई ना कोई उपाधि जरुर होनी चाहिये । पसन नापसन अपनी जगह होती हैं लेकिन ये कहना की केवल और केवल एक ब्लॉगर मे मोलिकता देखी गयी का सीधा अर्थ हैं की बाकी सब कोपी करते हैं सो हिन्दी ब्लॉग पर मौलिक केवल अनूप के अनुसार विवेक ही हैं । किसी विषय पर अपनी इकांकी राय देना अलग बात हैं । सिदार्थ त्रिपाठी अगर बता सके की मेने कब आर कहा किसी के आलेख पर ये कहां की यी बकवास कृति हैं । ब्लॉग और साहित्य अलग अलग विधा हैं और हिन्दी साहित्य को “जाचने ” के लिये कोई तो डिग्री / डिप्लोमा / दोक्ट्राते हिन्दी मे हो नी आवश्यक ।
या आप सब ये मानते हैं को लोग हिन्दी मे डिग्री । दोक्ट्राते लेते हैं और कॉलेज मे छात्रो को पढाते हैं और मौलिक लेखन सीखते वो सब बेकार मास्टरी करते हैं । क्या हिन्दी मे शिक्षित हुए बिना ही हिन्दी जाँची जा सकती हैं ।
अनूप शुक्ल के लिये कोई भी ब्लॉगर चहेता हो सकता हैं पर क्या अनूप शुक्ल के पास हिन्दी मे वो योग्यता हैं की वो जितनो को पढ़ते हैं उनको एक दुसरे से टोल कर बता सके की कौन मौलिक लेखन करता हैं । अगर हैं तो उसको बताने मे क्या बुराई हैं ।
और रही बात ब्लोगिंग की तो आप को अगर किसी को नहीं पढ़ना आप वहा ना जाए , आप को कोई कमेन्ट करने को मना करे ना करे , और पब्लिक लिटिगेशन भी हो सकता इस वक्तव्य पर जो अनूप शुक्ल ने पूरी ब्लोगिंग कम्युनिटी { हिन्दी } के लिये दिया हैं ।
September 20th, 2009 at 9:54 am
हम किसी की कविता कहानी को पसंद या नापसंद कर सकते हैं , पर क्या हम ये कह सकते हैं की ब्लॉगर नीरज की ग़ज़ल ब्लॉगर राकेश की ग़ज़ल से बेहतर हैं , ग़ज़ल लिखने की तकनीक की दृष्टि से , वही कह सकता हैं जिस ने ग़ज़ल लिखने की तालीम ली हो । बिना विषय की तालीम के कोई कैसे आकलन कर सकता हैं । हाँ जो लोग ब्लोगिंग करते हैं जैसे सुरेश हम जरुर कह सकते हैं की हम इनके विचारों से सहमत हैं या हमे आपति हैं । अगर दिनेश या लोकेश को हम ये बताये की धारा सो एंड सो लगेगी तो हम एक ब्लॉगर की हैसियत से ये कह सकते हैं क्युकी हम भी कही कुछ पढ़ कर आये हैं पर क्या हम किसी मुकदमे को कोर्ट मे लड़ सकते बिना कोर्ट की डिग्री लिये ।
किसी विषय मे शिक्षित होना और किसी विषय मे वो शैक्षित योग्यता रखना जिसकी बिना पर हम को ये अधिकार हो की हम उस विषय मे हो रहे रिसर्च और मौलिक लेखन पर एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति की क्षमताओं का आकलन कर सके ।
आप हिन्दी के प्रमोटर हो सकते हैं । आप हिन्दी मे पारंगत हो सकते हैं , पर क्या आप हिन्दी विषय मे किसी को नम्बर देने के लिये क़ुअलिफ़िएद हैं ।
बात पसंद ना पसंद से ऊपर की हैं । अनूप को विवेक पसंद हैं सही बात पसंद अपनी अपनी पर क्यूँ पसंद हैं क्युकी अनूप को केवल वही मौलिक लेखन करता दीखा तो अनूप को बताना चाहिये की किस विश्विद्यालय से उन्होने हिन्दी मे शिक्षा ली हैं
अगर ली हैं तो बताये मे उन से क्षमा मांगूगी और नहीं ली हैं तो वो ब्लॉग जगत से क्षमा मांगे , इतना मुस्किल क्यूँ हैं , आप सब के कहे से चलती हूँ तो सब अपने ही हैं फिर कायरता क्यूँ । मुझ मे तो नहीं हैं
September 20th, 2009 at 10:31 am
कई बार सुनने को मिलता है कि ट्रेन में फ़र्जी टिकिट जाँच अधिकारी घुस आते हैं, जो यात्रियों को परेशान करते हैं और जिनके पास टिकिट नहीं उनसे तो खैर अधिकांश मामलों में रिश्वत ले ही लेते हैं .
पर कई बार इन्हें लेने के देने भी पड़ जाते हैं, जब कोई पूछ लेता है कि मैं तो टिकिट बाद में दिखाऊँगा पहले तू दिखा कि तू कौन सा अधिकारी है ?
ऐसे में नीरज जाट का यह संस्मरण बड़े काम का है, हमारी मानें तो पढ़ ही लें!
September 20th, 2009 at 2:22 pm
लीजिये मिल गया अनूप जी का प्रोफाइल और वो ये हैं
अनूप कुमार शुक्ल
जन्म : १६ सितंबर १९६३
शिक्षा : बी ई़ (मेकेनिकल), एम ट़ेक (मशीन डिज़ाइन)
संप्रति : भारत सरकार रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत
आयुध निर्माणी में राजपत्रित अधिकारी।
लेखन : इंटरनेट पर नियमित लेखन।
जालघर : http://www.fursatiya.blogspot.com, http://www.hindini.com/fursatiya
संपर्क : anupkidak@gmail.com
यानी हिन्दी की कोई भी शैक्षिक योग्यता उनमे नहीं हैं
September 23rd, 2009 at 6:11 pm
इस विवाद मे हमने सोचा कि चलो कुछ महान हिन्दी साहित्यकारो की डीग्री के बारे मे कुछ खोज बीन की जाये|
वीकीपीडीया से मिले कुछ नतिजे
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ शिक्षा हाई स्कूल तक
जयशंकर प्रसाद शिक्षा आठवीं तक
मैथिलीशरण गुप्त विद्यालय में खेलकूद में अधिक ध्यान देने के कारण पढ़ाई अधूरी ही रह गयी।
फणीश्वर नाथ रेणु – इन्टरमीडिएट काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से
भीष्म साहनी अंग्रेजी साहित्य में एम ए, लेखन हिन्दी मे
प्रेमचन्द बी ए
हमने सूरदास, कबीर, तुलसीदास, भूषण के बारे मे खोज नही की क्योँकि इस समय तो ना तो तक्षशीला था ना नालँदा !