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	<title>Comments on: अनूप शुक्ल की हिंदी योग्यता क्या है?</title>
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	<description>एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग</description>
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		<title>By: आशीष</title>
		<link>http://paricharcha.myindiya.com/opinion/2009/1398/comment-page-1#comment-952</link>
		<dc:creator>आशीष</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Sep 2009 12:41:00 +0000</pubDate>
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		<description>इस विवाद मे हमने सोचा कि चलो कुछ महान हिन्दी साहित्यकारो की डीग्री के बारे मे कुछ खोज बीन की जाये&#124;
वीकीपीडीया से मिले कुछ नतिजे

सूर्यकांत त्रिपाठी &#039;निराला&#039; शिक्षा हाई स्कूल तक
जयशंकर प्रसाद शिक्षा आठवीं तक 
मैथिलीशरण गुप्त विद्यालय में खेलकूद में अधिक ध्यान देने के कारण पढ़ाई अधूरी ही रह गयी। 
फणीश्वर नाथ रेणु - इन्टरमीडिएट काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से 
भीष्म साहनी अंग्रेजी साहित्य में एम ए, लेखन हिन्दी मे
प्रेमचन्द बी ए

हमने सूरदास, कबीर, तुलसीदास, भूषण के बारे मे खोज नही की क्योँकि इस समय तो ना तो तक्षशीला था ना नालँदा !</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>इस विवाद मे हमने सोचा कि चलो कुछ महान हिन्दी साहित्यकारो की डीग्री के बारे मे कुछ खोज बीन की जाये|<br />
वीकीपीडीया से मिले कुछ नतिजे</p>
<p>सूर्यकांत त्रिपाठी &#8216;निराला&#8217; शिक्षा हाई स्कूल तक<br />
जयशंकर प्रसाद शिक्षा आठवीं तक<br />
मैथिलीशरण गुप्त विद्यालय में खेलकूद में अधिक ध्यान देने के कारण पढ़ाई अधूरी ही रह गयी।<br />
फणीश्वर नाथ रेणु &#8211; इन्टरमीडिएट काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से<br />
भीष्म साहनी अंग्रेजी साहित्य में एम ए, लेखन हिन्दी मे<br />
प्रेमचन्द बी ए</p>
<p>हमने सूरदास, कबीर, तुलसीदास, भूषण के बारे मे खोज नही की क्योँकि इस समय तो ना तो तक्षशीला था ना नालँदा !</p>
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	<item>
		<title>By: Hindi Blogge</title>
		<link>http://paricharcha.myindiya.com/opinion/2009/1398/comment-page-1#comment-948</link>
		<dc:creator>Hindi Blogge</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 20 Sep 2009 08:52:39 +0000</pubDate>
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		<description>लीजिये मिल गया अनूप जी का प्रोफाइल और वो ये हैं
अनूप कुमार शुक्ल


जन्म : १६ सितंबर १९६३
शिक्षा : बी ई़ (मेकेनिकल), एम ट़ेक (मशीन डिज़ाइन)
संप्रति : भारत सरकार रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत
आयुध निर्माणी में राजपत्रित अधिकारी।
लेखन : इंटरनेट पर नियमित लेखन।

जालघर : www.fursatiya.blogspot.com, www.hindini.com/fursatiya  
संपर्क : anupkidak@gmail.com
यानी हिन्दी की कोई भी शैक्षिक योग्यता उनमे नहीं हैं</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>लीजिये मिल गया अनूप जी का प्रोफाइल और वो ये हैं<br />
अनूप कुमार शुक्ल</p>
<p>जन्म : १६ सितंबर १९६३<br />
शिक्षा : बी ई़ (मेकेनिकल), एम ट़ेक (मशीन डिज़ाइन)<br />
संप्रति : भारत सरकार रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत<br />
आयुध निर्माणी में राजपत्रित अधिकारी।<br />
लेखन : इंटरनेट पर नियमित लेखन।</p>
<p>जालघर : <a href="http://www.fursatiya.blogspot.com" rel="nofollow">http://www.fursatiya.blogspot.com</a>, <a href="http://www.hindini.com/fursatiya" rel="nofollow">http://www.hindini.com/fursatiya</a><br />
संपर्क : <a href="mailto:anupkidak@gmail.com">anupkidak@gmail.com</a><br />
यानी हिन्दी की कोई भी शैक्षिक योग्यता उनमे नहीं हैं</p>
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	<item>
		<title>By: विवेक सिंह</title>
		<link>http://paricharcha.myindiya.com/opinion/2009/1398/comment-page-1#comment-945</link>
		<dc:creator>विवेक सिंह</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 20 Sep 2009 05:01:14 +0000</pubDate>
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		<description>कई बार सुनने को मिलता है कि ट्रेन में फ़र्जी टिकिट जाँच अधिकारी घुस आते हैं, जो यात्रियों को परेशान करते हैं और जिनके पास टिकिट नहीं उनसे तो खैर अधिकांश मामलों में रिश्वत ले ही  लेते हैं .

पर कई बार इन्हें लेने के देने भी पड़ जाते हैं, जब कोई पूछ लेता है कि मैं तो टिकिट बाद में दिखाऊँगा पहले तू दिखा कि तू कौन सा अधिकारी है ?

ऐसे में नीरज जाट का &lt;a href=&quot;http://neerajjaatji.blogspot.com/2008/12/2.html&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt;&lt;b&gt;यह संस्मरण&lt;/b&gt;&lt;/a&gt; बड़े काम का है, हमारी मानें तो पढ़ ही लें!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>कई बार सुनने को मिलता है कि ट्रेन में फ़र्जी टिकिट जाँच अधिकारी घुस आते हैं, जो यात्रियों को परेशान करते हैं और जिनके पास टिकिट नहीं उनसे तो खैर अधिकांश मामलों में रिश्वत ले ही  लेते हैं .</p>
<p>पर कई बार इन्हें लेने के देने भी पड़ जाते हैं, जब कोई पूछ लेता है कि मैं तो टिकिट बाद में दिखाऊँगा पहले तू दिखा कि तू कौन सा अधिकारी है ?</p>
<p>ऐसे में नीरज जाट का <a href="http://neerajjaatji.blogspot.com/2008/12/2.html" rel="nofollow"><b>यह संस्मरण</b></a> बड़े काम का है, हमारी मानें तो पढ़ ही लें!</p>
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	<item>
		<title>By: rachna singh</title>
		<link>http://paricharcha.myindiya.com/opinion/2009/1398/comment-page-1#comment-944</link>
		<dc:creator>rachna singh</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 20 Sep 2009 04:24:05 +0000</pubDate>
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		<description>हम किसी की कविता कहानी को पसंद या नापसंद कर सकते हैं , पर क्या हम ये कह सकते हैं की ब्लॉगर नीरज की ग़ज़ल ब्लॉगर राकेश की ग़ज़ल से बेहतर हैं , ग़ज़ल लिखने की तकनीक की दृष्टि से , वही कह सकता हैं जिस ने ग़ज़ल लिखने की तालीम ली हो । बिना विषय की  तालीम के कोई कैसे आकलन कर सकता हैं । हाँ जो लोग ब्लोगिंग करते हैं जैसे सुरेश हम जरुर कह सकते हैं की हम इनके विचारों से सहमत हैं या हमे आपति हैं । अगर दिनेश या लोकेश को हम ये बताये की धारा सो एंड सो लगेगी तो हम एक ब्लॉगर की हैसियत से ये कह सकते हैं क्युकी हम भी कही कुछ पढ़ कर आये हैं पर क्या हम किसी मुकदमे को कोर्ट मे लड़ सकते बिना कोर्ट की डिग्री लिये ।

किसी विषय मे शिक्षित होना और किसी विषय मे वो  शैक्षित योग्यता रखना जिसकी बिना पर हम को ये अधिकार हो की हम उस विषय मे हो रहे रिसर्च और मौलिक लेखन पर एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति की क्षमताओं का आकलन कर सके ।

आप हिन्दी के प्रमोटर हो सकते हैं । आप हिन्दी मे पारंगत हो सकते हैं , पर क्या आप हिन्दी विषय मे किसी को नम्बर देने के लिये क़ुअलिफ़िएद हैं ।

बात पसंद ना पसंद से ऊपर की हैं । अनूप को विवेक पसंद हैं सही बात पसंद अपनी अपनी पर क्यूँ पसंद हैं क्युकी अनूप को केवल वही मौलिक लेखन करता दीखा तो अनूप को बताना चाहिये की किस विश्विद्यालय से उन्होने हिन्दी मे शिक्षा ली हैं

अगर ली हैं तो बताये मे उन से क्षमा मांगूगी और नहीं ली हैं तो वो ब्लॉग जगत से क्षमा मांगे , इतना मुस्किल क्यूँ हैं , आप सब के कहे से चलती हूँ तो सब अपने ही हैं फिर कायरता क्यूँ । मुझ मे तो नहीं हैं</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>हम किसी की कविता कहानी को पसंद या नापसंद कर सकते हैं , पर क्या हम ये कह सकते हैं की ब्लॉगर नीरज की ग़ज़ल ब्लॉगर राकेश की ग़ज़ल से बेहतर हैं , ग़ज़ल लिखने की तकनीक की दृष्टि से , वही कह सकता हैं जिस ने ग़ज़ल लिखने की तालीम ली हो । बिना विषय की  तालीम के कोई कैसे आकलन कर सकता हैं । हाँ जो लोग ब्लोगिंग करते हैं जैसे सुरेश हम जरुर कह सकते हैं की हम इनके विचारों से सहमत हैं या हमे आपति हैं । अगर दिनेश या लोकेश को हम ये बताये की धारा सो एंड सो लगेगी तो हम एक ब्लॉगर की हैसियत से ये कह सकते हैं क्युकी हम भी कही कुछ पढ़ कर आये हैं पर क्या हम किसी मुकदमे को कोर्ट मे लड़ सकते बिना कोर्ट की डिग्री लिये ।</p>
<p>किसी विषय मे शिक्षित होना और किसी विषय मे वो  शैक्षित योग्यता रखना जिसकी बिना पर हम को ये अधिकार हो की हम उस विषय मे हो रहे रिसर्च और मौलिक लेखन पर एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति की क्षमताओं का आकलन कर सके ।</p>
<p>आप हिन्दी के प्रमोटर हो सकते हैं । आप हिन्दी मे पारंगत हो सकते हैं , पर क्या आप हिन्दी विषय मे किसी को नम्बर देने के लिये क़ुअलिफ़िएद हैं ।</p>
<p>बात पसंद ना पसंद से ऊपर की हैं । अनूप को विवेक पसंद हैं सही बात पसंद अपनी अपनी पर क्यूँ पसंद हैं क्युकी अनूप को केवल वही मौलिक लेखन करता दीखा तो अनूप को बताना चाहिये की किस विश्विद्यालय से उन्होने हिन्दी मे शिक्षा ली हैं</p>
<p>अगर ली हैं तो बताये मे उन से क्षमा मांगूगी और नहीं ली हैं तो वो ब्लॉग जगत से क्षमा मांगे , इतना मुस्किल क्यूँ हैं , आप सब के कहे से चलती हूँ तो सब अपने ही हैं फिर कायरता क्यूँ । मुझ मे तो नहीं हैं</p>
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		<title>By: rachna singh</title>
		<link>http://paricharcha.myindiya.com/opinion/2009/1398/comment-page-1#comment-943</link>
		<dc:creator>rachna singh</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 20 Sep 2009 04:10:50 +0000</pubDate>
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		<description>किसी की हिन्दी कृतियों का मूल्यांकन करने के लिये हिन्दी भाषा मे कोई ना कोई उपाधि जरुर होनी चाहिये । पसन नापसन अपनी जगह होती हैं लेकिन ये कहना की केवल और केवल एक ब्लॉगर मे मोलिकता देखी गयी का सीधा अर्थ हैं की बाकी सब कोपी करते हैं सो हिन्दी ब्लॉग पर मौलिक केवल अनूप के अनुसार विवेक ही हैं । किसी विषय पर अपनी इकांकी राय देना अलग बात हैं । सिदार्थ त्रिपाठी अगर बता सके की मेने कब आर कहा किसी के आलेख पर ये कहां की यी बकवास कृति हैं । ब्लॉग और साहित्य अलग अलग विधा हैं और हिन्दी साहित्य को &quot;जाचने &quot; के लिये कोई तो डिग्री / डिप्लोमा / दोक्ट्राते हिन्दी मे हो नी आवश्यक ।
या आप सब ये मानते हैं को लोग हिन्दी मे डिग्री । दोक्ट्राते लेते हैं और कॉलेज मे छात्रो को पढाते हैं और मौलिक लेखन सीखते वो सब बेकार मास्टरी करते हैं । क्या हिन्दी मे शिक्षित हुए बिना ही हिन्दी जाँची जा सकती हैं ।

अनूप शुक्ल के लिये कोई भी ब्लॉगर चहेता हो सकता हैं पर क्या अनूप शुक्ल के पास हिन्दी मे वो योग्यता हैं की वो जितनो को पढ़ते हैं उनको एक दुसरे से टोल कर बता सके की कौन मौलिक लेखन करता हैं । अगर हैं तो उसको बताने मे क्या बुराई हैं ।

और रही बात ब्लोगिंग की तो आप को अगर किसी को नहीं पढ़ना आप वहा ना जाए , आप को कोई कमेन्ट करने को मना करे ना करे , और पब्लिक लिटिगेशन भी हो सकता इस वक्तव्य पर जो अनूप शुक्ल ने पूरी ब्लोगिंग कम्युनिटी { हिन्दी } के लिये दिया हैं ।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>किसी की हिन्दी कृतियों का मूल्यांकन करने के लिये हिन्दी भाषा मे कोई ना कोई उपाधि जरुर होनी चाहिये । पसन नापसन अपनी जगह होती हैं लेकिन ये कहना की केवल और केवल एक ब्लॉगर मे मोलिकता देखी गयी का सीधा अर्थ हैं की बाकी सब कोपी करते हैं सो हिन्दी ब्लॉग पर मौलिक केवल अनूप के अनुसार विवेक ही हैं । किसी विषय पर अपनी इकांकी राय देना अलग बात हैं । सिदार्थ त्रिपाठी अगर बता सके की मेने कब आर कहा किसी के आलेख पर ये कहां की यी बकवास कृति हैं । ब्लॉग और साहित्य अलग अलग विधा हैं और हिन्दी साहित्य को &#8220;जाचने &#8221; के लिये कोई तो डिग्री / डिप्लोमा / दोक्ट्राते हिन्दी मे हो नी आवश्यक ।<br />
या आप सब ये मानते हैं को लोग हिन्दी मे डिग्री । दोक्ट्राते लेते हैं और कॉलेज मे छात्रो को पढाते हैं और मौलिक लेखन सीखते वो सब बेकार मास्टरी करते हैं । क्या हिन्दी मे शिक्षित हुए बिना ही हिन्दी जाँची जा सकती हैं ।</p>
<p>अनूप शुक्ल के लिये कोई भी ब्लॉगर चहेता हो सकता हैं पर क्या अनूप शुक्ल के पास हिन्दी मे वो योग्यता हैं की वो जितनो को पढ़ते हैं उनको एक दुसरे से टोल कर बता सके की कौन मौलिक लेखन करता हैं । अगर हैं तो उसको बताने मे क्या बुराई हैं ।</p>
<p>और रही बात ब्लोगिंग की तो आप को अगर किसी को नहीं पढ़ना आप वहा ना जाए , आप को कोई कमेन्ट करने को मना करे ना करे , और पब्लिक लिटिगेशन भी हो सकता इस वक्तव्य पर जो अनूप शुक्ल ने पूरी ब्लोगिंग कम्युनिटी { हिन्दी } के लिये दिया हैं ।</p>
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