एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
अच्छा तालीबान -बुरा तालीबान
सुना है पाकिस्तान सरकार ने तालिबानियों का वर्गीकरण किया है, अच्छा तालीबान और बुरा तालीबान. टाईम्स ऑफ़ इंडिया ने लिखा है मस्ट बी जोकिंग. नहीं वह मजाक नहीं कर रहे, उनका अच्छे तालीबान का मतलब उन तालिबानियों से है जो सरकार के इशारे पर चलते हैं और बुरे तालिबानियों का अर्थ कि वह अब उन्हें काबू नहीं कर पा रहे हैं.
स्तिथि जितनी गंभीर दिखती है, वास्तव में उस से कई गुना ज्यादा गंभीर और भयावह है. आप इस बात का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि जब छानबीन ठीक से शुरू भी नहीं हुई थी कुछ पाकिस्तानी नेताओं और अधिकारीयों ने हथियारों के भारत में निर्मित होने की बात कह दी.
मैं इस बात से ज्यादा चिंतित नहीं हूँ कि वे भारत से बदले का मौका ढूंढ रहे थे या अंदरूनी कमजोरियों को ढकने की कोशिश. भयावह यह है कि किस तरह ये नेतागण और अधिकारीगण स्तिथि से मुँह मोड़ कर लोगों का ध्यान बटा कर इस बात से इनकार कर रहे हैं कि वास्तव में पाकिस्तान में कोई समस्या है भी.
और जब तक ये स्तिथि को इमानदारी से जायजा ले कर स्वीकार नहीं करते, सुधार की तो सोच भी नहीं सकते. मतलब इन्होने यह मान लिया है कि चाहे देश भांड में जाये इन्हें कुछ नहीं होगा.
कितना गलत सोच रहे हैं? एक बार अपने सारे कमरे बंद कर के एकांत में निष्पक्ष हो कर फिर से सोचें तो पता चल जायेगा कि क्या हो रहा है.
शायद आप लोगों ने भस्मासुर का किस्सा न सुना हो. अगर सुना होता तो पता होता कि असल तालीबान वही है जिसे आप बुरा तालीबान करार रहे हैं. वास्तव में ऐसी जितने भी गुट हैं जो कलयुगी राक्षस का काम कर रहे हैं वे शक्ति और समृध्धि पाने के लिए कलयुगी देवताओं की तपस्या करते हैं. जिनमे आज एक नहीं कई शिव हैं जो इन भस्मासुरों को अमरता का वरदान देने पर तुले हुए हैं. समस्या तब बढ़ जाती है जब ये भस्मासुर निवासी हों.
आप कलयुगी देवताओं को इस बात का तनिक भी अहसास नहीं है कि यदि ये भस्मासुर इसी तरह बढ़ते रहें और किसी दिन अपनी औकात पर आ जाएँ तो आपको किन कंदराओं में शरण लेनी पर सकती है.
| Print article | This entry was posted by दरभंगिया on March 5, 2009 at 11:26 am, and is filed under मेरी बात. Follow any responses to this post through RSS 2.0. You can leave a response or trackback from your own site. |
