मैं सन् १९९४ से सिगरेट पी रहा था, बीच में कई बार छोड़ा भी पर कभी भी पूरी तरह नहीं छूटा. लेकिन इस बार लगभग दो महीने हो गए इस बला को हाथ नहीं लगाया, आप कह सकते हैं कि मुँह नहीं लगाया. मुझे हमेशा से यह लगता था कि मैं इसे तो  जब चाहे छोड़ सकता हूँ, या फिर क्या फर्क पड़ता है. शादी के बाद इस बात के लिए धर्मपत्नी से थोड़ी बहुत अनबन भी होती रही. फिर जैसा कि हर सिगरेट पीने वाले कभी कभी सोचते हैं मैंने भी सोचा कि क्यों न इसे छोड़ ही दिया जाय, सो चलिए छोड़ दिया.

अब इस से पहले मैं यह बताऊँ कि यह कैसे छूटा, यह जानना जरूरी है कि मैं सिगरेट क्यों और कब पीता था. मैं उन चीजों के बारे में पहले बताना चाहूँगा जो मुझे सिगरेट पीने को उकसाते थे.

१) खालीपन: मेरी सबसे बड़ी मुश्किल है कि मैं बेकार नहीं बैठ सकता, कुछ न कुछ करने को चाहिए. जब खाली हूँ या कहिये कि पूरी तरह बेकार हूँ, मैं सिगरेट को याद करता था.

आज कल थोड़ी पढाई करता हूँ और बाकी समय में ब्लॉग लिखता, पढता हूँ या टी वी पर कोई सिनेमा वगैरह देखने लगता हूँ. कुछ नहीं तो किसी से बात कर लिया.

२) मुँह में कुछ-खाए पिए का बचा हुआ स्वाद: मैंने जब से नियमित रूप से काम करने लगा, जाने क्या हुआ कि ब्राह्मणत्व छोड़ दिया. जिसमे एक कर्म यह है कि कुछ खाने पीने के बाद कुल्ला करना. इसकी एक वजह यह है कि हर जगह यह सुविधा उपलब्ध नहीं होती या फिर  मैं आलसी हो जाता था.

आजकल ब्राह्मणत्व में से यह कर्म वापस शुरू कर दिया है और यदि नहीं कर सकता तो पानी तो पिया ही जा सकता है. दूसरा ऐसे ही समय काटने के लिए चाय, ठंडा पेय वगैरह पीना कम कर दिया.

३) शराब पीना: जब मैं लन्दन में था तो एक महिला ने मुझसे कहा था कि स्मोकिंग और ड्रिंकिंग साथ-साथ न करें, वैसे भी वहां अब पब या बार में पीना पूरी तरह मना है. वह एक बहुत ही मददगार स्तिथि थी.

अब मैं कभी कभार ही एकाध घूँट लेता हूँ उस पर भी साथ में या बाद में कभी भी सिगरेट नहीं पीता, अगर मुँह का स्वाद बदलना ही हो तो मीठा पान मिलता है.

४) गुस्सा, चिढ, बोरियत और उदासी: ये भावनाएं मुझे अकेला महसूस करती थी और ऐसे में मुझ जैसे कई लोग सिगरेट पर अपना गुस्सा निकालते हैं.

मैं अब अकेला नहीं रहता, गुस्से में चुप रहना अच्छा समझता हूँ, और बाहर नहीं जाता बल्कि किसी कमरे में चुप चाप बैठना ज्यादा कारगर है. बोरियत और उदासी से बचने के लिए कुछ न कुछ करते रहता हूँ.

५) स्टाइलिश दिखना: यह भावना तो उम्र की बजह से अब नहीं रही, पर जिन्हें भी लगता है कि वो सिगरेट पीते हुए अच्छे दिखते हैं तो उनको इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि आपका स्टाइल आपके स्वस्थ्य पर ज्यादा निर्भर करता है.

और भी वजहें रही होंगी पर शायद मेरे मन में अभी नहीं है. चाहे जो कुछ भी है आप यदि अपनी कमजोरियों को गौर से पहचाने और उनके इलाज ढूंढें तो सिगरेट छोड़ना आपके लिए भी कोई मुश्किल काम न होगा.

मेरे शुभकामनायें उन सब के साथ जो इस बला को छोड़ना चाहते हैं.

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