एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
महिला-पुरुष की बराबरी और थोथी दलीलें
मैंने देखा है लोगों को महिला-पुरुष की बराबरी की वकालत करते हुए. और कई बार बेवकूफाना सवाल यह होता है कि जब बनाने वाले ने फर्क नहीं किया तो आप कौन होते हैं फर्क करने वाले.
मैं कहता हूँ आप अंधे हैं, बेवकूफ हैं, या कभी दोनों को एक साथ नहीं देखा? “जब बनाने वाले ने फर्क नहीं किया”. अच्छा? यह तो मुझे पता ही न था की महिला और पुरुष की शारीरिक बनावट एक सी होती है. आपने मुझे गधा समझ कर एक दलील दे डाली और मैंने सुन भी लिया. मेरे जैसे और अहमक भाई लोग भी हैं सो आपकी जीत भी हो गयी.
परन्तु मुझे सिर्फ इतना बता दें, कि आपकी किस आँख से महिला-पुरुष में शारीरिक फर्क नहीं दिखता. यदि दिखता है तो यह न कहिये कि बनाने वाले ने फर्क नहीं किया. मुझे तो दोनों के शारीरिक और मानसिक दोनों स्तर पर फर्क दिखता है. मैं मानता हूँ कि दोनों में फर्क है और दोनों के कर्त्तव्य और अधिकार क्षेत्र अलग होने चाहिए. सीधी सी बात है अगर मेरे और मेरी पत्नी के ऊपर कोई लाठी लिए दौरा आ रहा हो और यदि मैं अपनी पत्नी के भरोसे लाठी न उठाऊँ तो दोनों की हत्या होने में देर न लगेगी, सो मुझे लाठी उठाने का कर्त्तव्य और अधिकार दोनों स्वयमेव मिल गए. और इस परिस्तिथिजनित अधिकारों और कर्तव्यों का सम्मान होना चाहिए. जो थोथी दलील देने वाले कदापि नहीं सोचते.
मैं सीधे सपाट शब्दों में महिलाओं के लिए संपत्ति और शिक्षा जैसे अधिकारों में बराबरी का हक़ मानता और मांगता हूँ परन्तु उनके कर्तव्यों और कार्य क्षेत्रों पर मैं बराबरी का विरोध करता हूँ. मैं यह भी मानता हूँ कि उनके कर्त्तव्य जीवन के उन क्षेत्रों में ज्यादा होनी चाहिए जहाँ भावनाओं को समझने की जरूरत है. रोजगार सम्बन्ध में भी मैं किसी महिला को सीमा पर बन्दूक ले कर भेज देने के खिलाफ हूँ, वहीं शिक्षा और चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में उनका महत्व बढा हुआ देखता हूँ.
मैं बात को ज्यादा न खीचूँगा पर सारांश में यह कहना चाहता हूँ कि महिला और पुरुष दोनों अलग हैं और उनके अधिकार और कर्त्तव्य अलग होने चाहियें. हरेक क्षेत्र में गडद-मड्ड करने से समाज का फायदा के बजाय नुकसान हो जायेगा.
| Print article | This entry was posted by दरभंगिया on March 30, 2009 at 11:26 pm, and is filed under मेरी बात. Follow any responses to this post through RSS 2.0. You can leave a response or trackback from your own site. |


about 2 years ago
……..मिथ्या धारणाएं और वैज्ञानिक तथ्य……..
http://gendifhindi.blogspot.com/
about 2 years ago
विचारणीय बात है कौतुक जी !
about 2 years ago
kautuk jee ne keval sharirik sagarachana par vichar kiya hain , maanaav jeev par nahee jo ek jaisa hain . rahee gairbarabaree kee baat to vah nar me bhee hain koi kaala to koi gora , koi lamba to koi chota karykshhamata aur maansik kshhamata kaa bhee antar keval nar – naaree me nahee hain , antar to nar aur nar ke beech me bhee hain . mool to aatmaa ya jeev hain aur vaha koi antar nahee hain kyoki sabhee ishvar hee kee kritee hain.