वरुण भाई ने हिन्दुओं को यह महसूस कराने के लिए कि मुसलमान हमारे दुश्मन हैं और हमें उनसे दूरी बनाये रखनी चाहिए. उन्हें अपनी हिन्दुओं की एकीकृत शक्ति से डरा कर ही सिर्फ शांत किया जा सकता है. कुल मिला के सार तत्त्व यह कि वे हिन्दुओं को बता रहे थे कि यदि उनकी पार्टी सरकार में आये तो वे हिन्दुओं को सबसे सुरक्षित रखेंगे, खास कर मुसलमाओं से.

अब आप यदि यह कहें कि आप हमें वोट दो हम आपको किसी दूसरी कॉम से कोई खतरा न होने देंगे तो किसी को ऐतराज न हो. पर उनके भाषण में आपत्तिजनक शब्द थे. मैंने तो पूरा न देखा न पढ़ा. पर जो कहीं टुकड़ों में मिला वह उन्हें एकदम से निर्दोष तो साबित नहीं करता.

अब लेते हैं बहन जी की बात. उन्होंने वरुण को रोकने के लिए सिर्फ गिरफ्तार करना जरूरी न समझा. जो कि आसानी से किया जा सकता है. हरेक मजिस्ट्रेट को यह अधिकार होता है कि किसी भी व्यक्ति को शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिए गिरफ्तार करे या अपने जिले में आने से मना कर दे. आप उदहारण लेना चाहें तो, लालू जी ने आडवाणी जी का रथ रोका था, पर ऐसा किसी कानून का इस्तेमाल नहीं किया था जो उन्हें राष्ट्रघाती साबित करने पर तुली हो. यदि हिन्दू-मुस्लिम में तनाव पैदा करना राष्ट्रघाती है तो अगड़े-पिछड़े, या जातिगत तनाव पैदा करना भी उतना ही बड़ा दोष है. पर उन्होंने वरुण को सबक सिखाने के लिए रासुका का प्रयोग किया है.

अब हालात यह है, कि कल को कोई भी सरकार इस कानून का, इस प्रकरण से सीख लेते हुए, इसे विरोधी दल के नेताओं पर प्रयोग कर सकती है. फिर इस कानून का महत्व राष्ट्रीय-सुरक्षा से न जुड़कर गंदी राजनीति से हो जायेगा.

कानून का ऐसा दुरुपयोग रोकना चाहिए. रासुका देश को सुरक्षित बनाने के लिए बनाया गया कानून है. इसका गलत उपयोग इसे संसद को इसे निरस्त करने पर बाध्य करेगा और फिर वह न हो सकेगा जिसकी जरूरत है.

भगवन इन नेताओं को सदबुध्धि दे.