सरकारी नौकरियों में ओ बी सी और एस सी / एस टी की तरह औरतों को भी आयु सीमा में राहत मिलनी चाहिए. इस का सीधा सा तर्क है. कई बार ऐसा होता है की पढाई के दौरान ही लड़कियों की शादी हो जाती है और उनकी पढाई में रूकावट आ जाती है. खास कर गांवों और छोटे शहरों में ऐसा अक्सर होता है. जब तक वह अपने को ससुराल में स्थापित करे और फिर से पढाई शुरू करे, कई बार उनके बच्चे भी हो जाते हैं. ऐसे हालात में एक बार फिर से पढाई को छोड़ बच्चों की परवरिश करनी पड़ती है. याने कि फिर से एक लम्बा अन्तराल. ऐसी महिलाओं को यदि अवसरों में आयु सीमा का रोक लगा कर अलग किया जाता है तो यह सरासर गलत है.

वह चाहे किसी भी वर्ग की महिला हो उसे यह हक होना चाहिए की वह अपने उन सखियों के साथ बराबरी कर सके जिसके साथ वह इम्तहान पास करती है. और इसके लिए नहीं बहुत तो आयु सीमा में कम से कम पांच साल की रियायत मिलनी ही चाहिए. विधि निर्माता इसे और भी तर्कसंगत बना सकते हैं. यह अवश्य ही महिलाओं के हित में होगा और उनके परिवार निर्माण में योगदान की क्षमता में वृद्धि करेगा. जिस से समाज और परिवार में उसका महत्व बढेगा.

वैसे तो मुझे इसकी उम्मीद कम ही है कि कोई विधि निर्माता इसे नोटिस में लेगा.

तूती को मालूम है नक्कारखाने उसकी आवाज नहीं सुनती
फर्ज यही है कि फिर भी तूती आवाज लगाती रहे.