कुछ दिनों के लिए अवकाश पर हूँ. बिटिया का मुंडन है.

लौटने पर कुछ नया लिखने की कोशिश करूंगा. तब तक के लिए सभी ब्लॉग साथियों को नमस्कार. तीन दिन की यात्रा जाने की, तीन दिन की यात्रा आने की. दो दिन देवघर आने-जाने के लिए, एक दिन सिमरिया जाना होगा. समय लगा तो पटना भी जाऊँगा, पुराने दोस्तों से मिलना हो जाये शायद. फिर दो दिन कोलकाता का भी आनंद लेना है. कुछ न कुछ तो सूझ ही जायेगा, आशा है कुछ अच्छा लिखने को मिलेगा.

पढने के लिए, मई दिवस आने वाला है. और निश्चित ही कुछ न कुछ लिखा जायेगा. यदि कम्यनिस्ट विचारधारा से कुछ अच्छा पढने को मिले तो सम्यक लगेगा.

रस्ते में पढने के लिए हिंदी किताबें ढूँढने गया था, सपना बुक हाउस ने कह दिया वे हिंदी नहीं रखते. बंगलोर में और कहाँ मिल सकता है यह मुझे मालूम नहीं, स्टेशन पर मिल जाए शायद अन्यथा यात्रा दुरूह हो जायेगी.  हाँ वहां, आज एन आर एन मूर्ति की एक नयी किताब दिखी, पर उसे लौट कर पढने का विचार है. अभी भी अंगरेजी पढने में समस्या आती है. और यदि वाकया समझ में आ भी जाये, तो वो कहते हैं ना कि it strikes the cord, वाली बात नहीं आती.

एक महत्वपूर्ण चर्चा में से बीच में ही अलग होना पड़ रहा इसका खेद रहेगा.

तब तक के लिए आप सबको शुभकामनायें. हैप्पी बग्गिंग..आउच..हैप्पी ब्लॉग्गिंग.

यह लगभग बिन बाल के पैदा हुई थी, अब फिर से वैसी ही हो जायेगी. हा हा हा
यह लगभग बिन बाल के पैदा हुई थी, अब फिर से वैसी ही हो जायेगी. हा हा हा