शायद! तभी तो कर्नाटक में अपराध और अराजकता बढ़ती है तो एक पढ़ा लिखा लोग कहते हैं कर्नाटक बिहार बन रहा है. मध्यप्रदेश में कुछ ढंग का नहीं हुआ तो बिहार मत बनाओ. किसी भी और राज्य में रहिये किसी को नीचा दिखाना हो तो बिहारी कह दो.

नहीं ऐसा नहीं है!!! यह उनकी हीनग्रंथि बोल रही है.

हाल की बात है, ट्रेन से पटना जा रहा था, नैनी के पास किसी यात्री के सामन पर किसी उठाईगीर ने झपट्टा मारा (पर सफल न हो सका). संयोग वश वह और उसके सहयात्री तमिलनाडु, आँध्रप्रदेश और कर्णाटक से थे, पहले कहा बिहार में ऐसा होता है. मैं यह पता करने के बाद कि क्या हुआ फिर से उपन्यास में गम हो गया. पर जब “बिहार” शब्द जब कान में पड़ा तो मन विचलित हो आया और तुंरत उन्हें बताना पड़ा कि अमूमन तो आप अभी बिहार पहुंचे नहीं, यु पी में ही हैं. ऊपर से आप ऐसे कह रहे हैं जैसे ऐसे अपराध आप लोगों के राज्य में नहीं होते? फिर जा कर चुप हुए. जी में आता है वैसे हर दिमाग से पैदल और मुंह से हवाई चू$@$ को गर्दन पकड़ कर बिहार ले जाएँ और दिखाएँ कि आओ देखो कहाँ कहाँ हम तुम से बेहतर हैं और कहाँ कहाँ तुम्हारे बराबर.

पर नहीं उन्हें कुछ कह कर अपना वक़्त बर्बाद करने से अच्छा है बिहारी अपने और अपने राज्य की तरक्की के साथ इमेज के बारे में भी सोचें. वैसे बहार राज्यों में रहने वाले बिहारियों की हालत विदेशो में बस रहे भारतीयों जैसी है इसलिए ज्यादा चिंता करने की बात नहीं है. हाँ अपने ज्ञान और कर्म से आप कहीं भी पहुँच जाएँ अपने व्यवहार से सामने वाले को कष्ट न हो इसका ख्याल तो सदैव रखना ही चाहिए, इसमें अमूमन अधिकतम भारतीय असंवेदनशील या अख्खड़ हो जाते हैं.

इस लिए बिहारी भईयों बजाय पत्रकारों, जजों, अधिकारीयों, पुलिस वालों या नेताओं से यह कहने के कि बिहार को गाली मत दो यह सोच कर शांत रहो की उन्हें असलीयत तो एकदम नहीं पता और ऊपर से वे हीनग्रंथि के शिकार हो चुके हैं.