एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
मेरी पीं पीं करने वाली गुड़िया
बिटिया बड़ी हो रही है.
अब वो पीं पीं करने वाले खिलौनों से नहीं खेलती.
अब उसे चाहिए नए कपडे, गहने और गुडिया.
कल ही की बात है कि हथेलियों में समा जाती थी.
शायद कल गोद में भी न समायेगी.
रह जायेगी यही यादें मेरे साथ.
जब कभी दूर वो चली जायेगी.
उन्ही यादों का एक कतरा
रख लेता हूँ सजों कर अपने पत्र में.
अच्छा है अब पत्र बोल सकते हैं.
वरना कहाँ वापस आएगा ये मेरा बचपन.
| Print article | This entry was posted by दरभंगिया on April 21, 2009 at 8:37 am, and is filed under चित्रपट. Follow any responses to this post through RSS 2.0. You can leave a response or trackback from your own site. |


about 2 years ago
उन्ही यादों का एक कतरा
रख लेता हूँ सजों कर अपने पत्र में.
अच्छा है अब पत्र बोल सकते हैं.
वरना कहाँ वापस आएगा ये मेरा बचपन.
badi hi marmsprashi rachana hai.beti kab badi huyi pata hi na chale.
about 2 years ago
अच्छा है अब पत्र बोल सकते हैं.
वरना कहाँ वापस आएगा ये मेरा बचपन.
बहुत सुन्दर बात कही आपने ..यह यादे अब यूँ संजो लेना बहुत अच्छा लगता है ..बढ़िया लगी यह
about 2 years ago
कल ही की बात है कि हथेलियों में समा जाती थी.
शायद कल गोद में भी न समायेगी.
रह जायेगी यही यादें मेरे साथ.
जब कभी दूर वो चली जायेगी.
-सुन्दर.
about 2 years ago
bahut touching sa hai ……
about 2 years ago
Dil ko choo dene wali baat kahi K.
Beti (nine months young) bagal me so rahi hai apne pa k paas sochta hoon ki kal yehi sab dekhunga jo ab padh raha hoon…..