बिटिया बड़ी हो रही है.
अब वो पीं पीं करने वाले खिलौनों से नहीं खेलती.
अब उसे चाहिए नए कपडे, गहने और गुडिया.
कल ही की बात है कि हथेलियों में समा जाती थी.
शायद कल गोद में भी न समायेगी.
रह जायेगी यही यादें मेरे साथ.
जब कभी दूर वो चली जायेगी.

उन्ही यादों का एक कतरा
रख लेता हूँ सजों कर अपने पत्र में.
अच्छा है अब पत्र बोल सकते हैं.
वरना कहाँ वापस आएगा ये मेरा बचपन.