आज कल कुछ खास होता ही नहीं
और अगर होता भी है तो कुछ मौतें
और होती है कुछ गिनतियाँ और समीक्षाएं
मालूम नहीं कब तक यूँ मैं रोज मरता रहूँगा
किसी आतंकी, किसी अपराधी, किसी नेता के हाथों
कोई बचाए ऐसा तो कोई दीखता ही नहीं
एक ही बार में मार डाले ऐसा कोई दिखे तो कहना