लोकतंत्र का महापर्व कहलाता है यह चुनाव
और नेतागिरी का अखाडा भी कहलाता है चुनाव
हमें अपने अधिकार भी याद दिलाता है चुनाव
पुरातन पार्टी या उसी के टुकड़े ही ढूंढ लाता है चुनाव

रात जैसे कटेगी कभी नहीं, ऐसे ख्वाब दिखता है चुनाव
हर बार अलग मिठाई की तस्वीरें दिखता है चुनाव
बासी मिठाई की भी स्वाद मुँह में लाता है चुनाव
पिछले बार के वादे भी याद हमें दिलाता है चुनाव

चेहरे बदल बदल कर एक ही नेता लाता है चुनाव
शिकायतों और लांछनों के बंडल भी खुलवाता है चुनाव
देशी शराब के ठेके भी कहीं कहीं मुफ्त चलवाता है चुनाव
और नतीजे भी हर बार एक ही लाता है चुनाव

जैसे बहनों बेटियों के लिए करते हो दूल्हे का चुनाव
वैसे ही किया करो अपने क्षेत्र के नेता का चुनाव
दुरुस्त करनी हो चीजों को, तो करो ठीक तुम अपना चुनाव
या फिर ना कहो कि क्या हमें दिलवाता है यह चुनाव