हाँ कुछ अच्छा भी हुआ था आज

मैंने बिटिया को स्कूल छोरा

और बेटे के साथ की थोरी मस्ती

दफ्तर को निकलने से पहले बीवी को क्या प्यार

बहुत अच्छा लगा ये सब बहुत दिनों के बाद

 

अरे नही, हम एक कॉम से आते हैं

जो पुरा दिन काम में लगा देते हैं

और जमा करते हैं कुछ चर्बी अपने तन में

जो दिखाती है कि कितने कर्मठ होंगे हम

 

कसूर हमारा नहीं कि हम ऐसे हो गए

थे तो हम भी निठल्ले ही बचपन से

कि अचानक शौक चर्राया नौकरी का

और अमीरों की तरह जीने का

 

कुछ इस तरह अमीर होने लगे हम

कि चल नहीं सकता घर दो महीने

बिना माहवारी तनख्वाह और भत्ते के

हाँ मिला एक भरम कि हम सुखी हैं

 

शायद हम भी आज एक किसान होते

पर पुरखों को रास आया नहीं खेत

और हमें नहीं भायी गाँव की धूल