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इस रात की सुबह तो जल्दी आयेगी

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तुम तो रहोगी दूर, मगर रात तो आयेगी
यहाँ न होगा आँचल तेरा, क्या हवा सुलायेगी
सुबह तो होगी रोज पर वो कैसे मुझे जगायेगी
कपरों की सिलवटों से तुम्हारी याद तो आयेगी

एक नयी आदत लगी है तुम से झगरने की
जब दिल न लगेगा तो ये घर मुझे चिढायेगी
सूना दरवाजा सूना कमरा खाली बिस्तर
ये सब हर पल हर दिन मुझे रुलायेगी

बिखरी चीजों की याद तुम्हे भी आयेगी
बच्चों की शैतानी से जब तुम थक जाओगी
“कहाँ गए तुम” यह आवाज अन्दर से आयेगी
हम तो रहेंगे दूर मगर याद तो आयेगी

हाँ फोन करूंगा और तुम भी करना
क्या इन से जुदाई कुछ कम हो पायेगी
है भरोसा ये रात नही है ज्यादा लम्बी
इस रात की सुबह तो जल्दी आयेगी

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One Response to “इस रात की सुबह तो जल्दी आयेगी”


  1. Ariel Helom
    on Sep 6th, 2010
    @ 12:24 pm

    They have dedicated advocates.

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