धर्म की चिंता होती उनको
वे भाषा की भी चिंता करते
और राज्य भी तो चिंतनीय है
पर हम अकिंचन पर कोई क्यों चिन्ते

इन्द्र देव को भूल गए वो
और भूले वो रति कामदेव को
इसीलिए तो तोड़ा मदिरालय

किन किन चीजों की बात करें हम
स्वयम्वर भी उन्हें याद नहीं अब
तभी तो विरोध वैलेंटाइन डे का

जो भूल गए मेरे माँ बाप सिखाना 
की निज स्वतंत्रता नही धर्म हमारा  
वो सिखा रहें हैं अब अपनी जिद से

हंसी आ गयी जब पढ़ा हमने
भेजी नोटिस मीडिया को पुलिस ने
कि नही बताया घटना हुई है कोई

और थोड़ा सा रोना आया उन प्यारों पर
जो निकल पड़े अपराध के रस्ते
कुछ सस्ते सुंदर से नारों पर