माँ तो सबकी होती है
मेरी थोड़ी अनोखी है
कुछ ऐसे छुप कर बैठी है
जैसे जन्म से मुझ से रूठी है

हाँ सुना है मैंने,
“वो नही रही” मेरे बचपन से
पर सरल नही है यूँ समझाना
उसको जिसका दूध छिना हो

मुझे यकीं था आयेगी वो
और ढूंढेगी हर पल मुझको
और उसे जब पीड़ा होगी
लग के सीने सो जायेगी

बिटिया बड़ी हो रही है ऐसे
हो जैसे जन्म की हेरा फेरी
जब तक है वो सुध की भोली
सोचूँ माँ आयी है आँगन मेरी