हैं निराश तुम्हारी प्रतिक्रिया से
अब न कोई उम्मीद है तुमसे.
कर सकता नही तू निष्पक्ष विचार,
तू कर नाटक
ले कर बदलाव कि आशा
हम लोगों ने तुम्हे जिताया था.
पर तुम तो निरे सत्ता लोलुप,
तू कर नाटक
जन मानस का बोध नही तुम्हे
न ही तुम्हे विविधता का ज्ञान.
पर आ ही गए तुम राजनीति में,
तू कर नाटक
नही भूलती जनता कुछ भी
जैसे तुम भूलते विचार हो.
अभी देर बहुत चुनाव में है,
तू कर नाटक
तुम अपने से पहले नही हो
आए यहाँ बहुतेरे तुम से.
जब तक आती है बारी मेरी,
तू कर नाटक
तुम भूलोगे, जग भूलेगा
पर कैसे भूलेगी मेरी बहना.
जो हाथ उठाया, वो मित्र तुम्हारा,
तू कर नाटक
पर याद रहे यह वचन हमारा
ऐसे ही नही यह कर्नाटक है.
जब तक हम तेवर बदलें,
तू कर नाटक
Lizabeth Arenos
on Sep 6th, 2010
@ 1:02 pm:
When the rubber meets the road I would try to face it whenever I can.