एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
मेरा भारत महान?
मेरा बाप मर गया
उस के नाम पर दे दो भाई
उसकी माँ भी मर गयी साहब
उस के नाम पर तो दे दो भाई
मेरे बाप का नाना बड़ा सयाना
उसके नाम पर तो दे दो भाई
अल्लाह के नाम पर दे दो भाई
राम के नाम पर दे दो भाई
ईशा के नाम पर ही दे दे भाई
वाहे गुरु दा खालसा, वाहे गुरु दी फतह
अब तो तुम दे दो भाई.
भिखारी लोग घबरा गए,
इधर उधर भागने लगे,
चिल्लाने लगे, चारो तरफ चिल्ल-पों .
फिर एक आवाज आयी
ये तो हमारे नारे थे
तुम अपनी वाली लगाओ ना.
पब्लिक खड़ी सोचती रही
ये अपने नाम पर कब मांगेंगे.
पुलिस भी खड़ी सोचती रही
इनके आगे-पीछे हम क्यूँ भागेंगे.
जनता परेशान और हलकान
वोट दे कर छुड़ाई जान.
नेपथ्य से आवाज आयी
कब तक दिलासा दोगे खुद को
कह के “मेरा भारत महान” ?
| Print article | This entry was posted by दरभंगिया on April 16, 2009 at 4:32 pm, and is filed under कवितायेँ. Follow any responses to this post through RSS 2.0. You can leave a response or trackback from your own site. |


about 2 years ago
उत्तम.