एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
जानकी! कतए छी? आउ नैहर
जानकी! कतए छी? आउ नैहर.
देखू ने धिया पुता सब पैघ भय गेल.
किछ तऽ नेतो बनल अछि.
पैघ कुर्सी पर चढ़ल अछि.
वचन दऽ कय जाए कोना
दृग आ मुंह मोरि लेने अछि.
जानकी! कतए छी? आउ नैहर.
आउ बुझबियौक ओकरो कने
कोना राम राज्य चलै छल.
एक टा तऽ वैद्य भय गेल
नाम ओकर देश विदेश भेल
नहि मुदा देखा पड़ैत ओकरा
दीन हीन पीड़ित सहोदर
जे व्याधि से मूडी फोरी रहल अछि.
जानकी! कतए छी? आउ नैहर.
आउ कने ओकरो बुझबियौक
सहोदर कोना व्यवहार करै अछि.
जानकी! कतए छी? आउ नैहर.
देखू ने धिया पुता सब पैघ भय गेल.
बाढ़ि तऽ सभ साल अबै अछि
दहा जायेत अछि माल जाल
बहि जाए नेना बच्चा, बूढ़ माए बाप
गाम उजड़ि जाए जेना विधवाक मांग
जानकी! कतए छी? आउ नैहर.
आउ कने हिनको बुझबियौक
बहई अछि जे गाम से कमला, कोशी, बलान.
जानकी! कतए छी? आउ नैहर.
देखू ने धिया पुता सब पैघ भय गेल.
पर नहि देखा पड़ैत छैक
पीड़ अहि देह केर
नोचि नोचि कय खाए गेल
सभ अहांक बचल खुचल नाम.
अहांक बचल खुचल नाम.
जानकी! कतए छी? आउ नैहर.
देखू ने धिया पुता सब पैघ भय गेल.
| Print article | This entry was posted by दरभंगिया on April 21, 2009 at 7:31 pm, and is filed under कवितायेँ, मैथिली. Follow any responses to this post through RSS 2.0. You can leave a response or trackback from your own site. |


about 2 years ago
कोना कय एती जानकी नैहर छन्हि बेहाल।
अपने के रहितहुँ कोना मिथिला के ई हाल।।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
http://www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.
about 2 years ago
आपका ब्लॉग ही नहीं वरन तस्वीर भी काफी गंभीर और प्रभावशाली है अभी थोड़ी व्यस्तता है फिर इत्मीनान से पढ़ के कुछ लिखता हूँ आपको.
about 2 years ago
बहुत नीक लागल अहाँक ब्लॉगपर आबि कए।
about 1 year ago
bad nik lagal ee web site mithla ke naam uuch karai ke lagal enaithe likhait rahab.
madhubani bihar
about 1 year ago
ham ta chot dhiaputa chi maithli sikh rahal chi maithli sikhai ke lail bad nik site chai,
ham bihari chi bujaliy chalu rakhai chhi phair mailab akhain hamar umaar chhai 7month.
chalu phair milab 10 saal baad.
about 2 years ago
बहुत सुन्दर टिप्पणी. धन्यवाद. टिप्पणीक उत्तर लेल जाऊ.
मिथिला के ई हाल कियैक सेहो ने पूछल जाए
जिनक नाम लैत लैत ककरो जीह ने भोथराए.
बजाय रहल छी जानकी के स्वयं, ई संदेशक प्रेषण लेल
हे नेना हउ, हे बुच्ची यै, आब करू काज समाजक लेल
अपने आबि कहि देथुन्ह आब, जे हे नैहरक जीव!
कहिया तक नाम बेचि के पड़ल रहब निर्जीव.
उठू ठार होऊ, करू उद्यम स्वयं, अपन विकासक लेल
नहीं ताकय पड़त फेर ककरो दिस अपन समाजक लेल
हँ कोना एती, कियैक एती, ओ नैहर आब
सासुर जरैत रामक नाम से, नैहर अछि बेहाल
की यैह कहऽ सूनऽ लेल अउती जनक कुमारी
देखि कहीं ने समा जाईथ ओ फेर धरती में बेचारी